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भक्तों ने हड़प लिया भगवान का 8 करोड़ रुपया

भारत देश में हर अवसर, त्योहार या किसी विशेष अवसर पर मंदिरों मे जाकर चढ़ावा चढ़ाते हैं. कुछ इंसान किसी मन्नत के पूरे होने पर मंदिरों में आभूषण या पैसे अर्पण करते हैं लेकिन राजस्थान और अन्य 6 राज्यों में लोगों के चढ़ाए गए चढ़ावे का कुछ अता-पता ही नहीं है. भक्तों ने भगवान का ही पैसा  हड़प लिया. 

भक्तों ने हड़प लिया भगवान का 8 करोड़ रुपया

जयपुर: मंदिरों में चढ़ाए गए पैसे और आभूषणों की रखवाली के लिए भारत में विभाग बनाया गया है. जिसके अधिकारियों का काम मंदिरों के चढ़ावे का निरीक्षण करना है. खबर आई है कि राजस्थान के मंदिरों की संपत्तियों की देखरेख करने वाला देवस्थान विभाग खुद की उधारी को वसूलने में असमर्थ है. राजस्थान व अन्य 6 राज्यों के मंदिरों का रखरखाव देवस्थान करती है. राज्य के बाहर स्थित मंदिरों की संपत्तियों की देखरेख सहायक आयुक्त ऋषभदेव और उत्तरप्रदेश, उत्तरांचल, दिल्ली में स्थित मंदिरों एवं परिसम्पतियों की व्यवस्था के लिए सहायक आयुक्त वृन्दावन की नियुक्ति की हुई है. इनकी सहायता के लिए मंदिर के प्रबंधक, पुजारी व अन्य कई कर्मचारी हैं.

बेदखली अधिनियम की तहत हो रही है कार्रवाई
देवस्थान विभाग के अधीन सम्पत्तियों को किराये पर देने की नीति 6 जून 2000 को लागू की गई थी. इसी के अंतर्गत सम्पत्तियां किराए पर दी जाती हैं. विभाग के निरीक्षक और प्रबंधक की ओर से प्रतिमाह किराया वसूल करने के लिए मांग पत्र दी जाती है. भुगतान में चूक करने पर सम्पत्तियों को खाली करवाने का भी प्रावधान है और इसके लिए राजस्थान में सार्वजनिक भू-गृहादि, अप्राधिकृत आदिवासियों की बेदखली अधिनियम 1964 के तहत कार्रवाई करने का भी प्रावधान है. साथ ही किराया राशि में वृद्धि किए जाने को लेकर एक किराया नीति 2000 में पास की गई थी. इसके अनुसार प्रति तीन वर्ष बाद 15 प्रतिशत किराया बढ़ा दिया जाता है.

देवस्थान विभाग से की गई है रिपोर्ट की मांग
देवस्थान विभाग के पास राजस्थान में कुल 2 हजार 90 मंदिरो की संपत्ति है. 1953 से यह विभाग अपना काम कर रही है और लगभग 137 संपत्ति कानूनी विवाद या अन्य वजहों से खाली पड़े हैं. विभाग को इन संपत्तियों से लगभग 4 करोड़ रूपये सलाना मिल रहे हैं. इन संपत्तियों पर सालों से एक ही घर, परिवार के लोगों का अधिकार है. इसको देखते हुए रिपोर्ट की मांग की गई है कि किस संपति का कितना किराया है और कब से किराया निर्धारित हो रहा है. 

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कहां कितना बकाया है किराया ?
इन सब को देखते हुए किस संपति से कितना किराया आ सकता है यह भी अब विभाग मूल्यांकन करेगी. राजस्थान के मंदिरों की बात करें तो जयपुर, उदयपुर, भरतपुर, अलवर, बीकानेर, बूंदी, झालावाड़ व अन्य शहरों को मिला कर करोड़ों की संपत्ति का कोई पता नहीं है. जोधपुर जिले में 367 संपतियों से 70 लाख रुपए, जयपुर जिले में 344 संपत्तियों से सालाना एक करोड़ 12 लाख रुपए, भरतपुर जिले में देवस्थान विभाग की कुल 464 संपत्ति हैं इनमें से 452 किराए पर हैं और शेष 12 खाली पड़ी हुई हैं. पूरे प्रदेश में देवस्थान विभाग की 544 आवासीय और 1498 व्यवसायिक संपत्ति है जिससे देवस्थान विभाग को सालाना 55 लाख रुपए किराए के तौर पर मिलता है.