अयोध्या में राम की एक और निशानी के इतने बुरे हाल का कौन है जिम्मेदार ?

अयोध्या राम मंदिर फैसले पर सुप्रीम कोर्ट के महुर लगाने के बाद से ही उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उसे पर्यटन क्षेत्र बनाने के लिहाज से विकसित करने का रोडमैप तैयार कर रहे हैं लेकिन कुछ जगहों पर योगी सरकार फिसड्डी साबित हो सकती है और इसके पीछे अधिकारियों की नाकामी होगी.

अयोध्या में राम की एक और निशानी के इतने बुरे हाल का कौन है जिम्मेदार ?

लखनऊ: उत्तरप्रदेश में योगी सरकार पूरे अयोध्या के सौंदर्यीकरण की योजना में करोड़ों रुपए खर्च करने को तैयार है. वहीं दूसरी ओर कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जिसकी स्थिति अब भी दयनीय बनी हुई है. अयोध्या में राम की पैड़ी की अविरल धारा प्रवाह को फिर से निर्मल बनाने के लिए जो योगी सरकार ने कदम उठाए थे, उसमें अधिकारियों ने और कर्मचारियों ने ठीक ढ़ंग से मेहनत नहीं की. यह अब भी उसी हालत में है जहां कल हुआ करती थी.

राम की पैड़ी है गंदगी से बेहाल

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की मुहर लगने से पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे पर्यटन की नगरी बनाने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया था. लेकिन राम की पैड़ी जो घाटों की खूबसूरती के लिहाज से काफी सुंदर बन सकता था, वहां गंदगी से जगह नर्क बन चुका है. लोग वहां खुले में शौच करने जाते हैं. 

दीपोत्सव पर दुल्हन की तरह सजता है यह स्थान

राम की पैड़ी अयोध्या में सरयू के तट पर बसा एक सुंदर स्थान है जो अब सिर्फ दीपोत्सव के दौरान ही दुल्हन की तरह सजा हुआ दिखता है. बाकी समय इसकी हालत खराब ही रहती है. हालांकि अधिकारियों का और सरकार का मानना है कि इस पर करोड़ो रुपए खर्च करने के बाद भी इसकी स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है. टूटी टाइल्स और गंदगी का अंबार हर तरफ फैला हुआ रहता है. 

अधिकारियों की बंदरबाट का शिकार हुआ यह पावन स्थल

हालत कुछ यूं है कि जहां पंप लगा हुआ था वहां की स्थिति देखकर लगता है कि सदियों पहले इसे बनाने के बाद से राजमिस्त्री फिर कभी यहां पर देखने तक नहीं आए. यह योगी सरकार के लिए वाकई सबसे खराब सा पल हो सकता है कि पर्यटन के लिए जिस जगह को काफी विकसित किए जाने का प्लान लिए बैठे हैं वहीं की एक  खूबसूरत जगह अपने बदहाल रूप में बनी हुई है. 

यहां हर साल दीपोत्सव के दौरान इसे किसी दुल्हन की तरह सजाया जाता है. ऐसा नहीं है कि सरकार ने इसके लिए कोई फंड जारी नहीं किया लेकिन बात यह है कि जारी किया गया फंड धरातल तक पहुंच ही नहीं सका. अधिकारियों और बाबुओं की बंदरबांट में यह अब तक जस का तस बना हुआ है.