1983 की जीत ने दिया था आत्मविश्वास, 2011 की विश्वविजय ने बनाया क्रिकेट की दुनिया का बादशाह

भारत ने 2011 के विश्वकप में श्रीलंका को हराकर दूसरी बार 50-50 ओवर का विश्वकप जीता था. भारतीय क्रिकेट की सूरत बदलने वाली इस जीत को आज 10 साल पूरे हो गये हैं.   

Written by - Adarsh Dixit | Last Updated : Apr 2, 2021, 09:36 AM IST
  • धोनी ने खेली थी शानदार नाबाद 91 रन की पारी
  • गंभीर की धैर्य भरी पारी से आसान हुई थी जीत की राह
1983 की जीत ने दिया था आत्मविश्वास, 2011 की विश्वविजय ने बनाया क्रिकेट की दुनिया का बादशाह

नई दिल्ली: मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम. नुवान कुलाशेखरा की गेंद और महेंद्र सिंह धोनी का गगनचुंबी छक्का. आप समझ गये होंगे हम किस मैच का जिक्र कर रहे हैं.

हम बात कर रहे हैं 2 अप्रैल 2011 की. आज से 10 साल पहले इसी दिन भारत ने श्रीलंका को हराकर दूसरी बार वर्ल्डकप जीता था.

ये वो दिन था जिसे याद करते ही हर हिंदुस्तानी की छाती गर्व से चौड़ी हो जाती है क्योंकि ये केवल सामान्य गेंद पर लगाया गया आम छक्का नहीं था बल्कि इस छक्के ने करोड़ो भारतीयों के उस सपने को साकार किया था जो दशकों पहले देखा गया था.

ऐतिहासिक जीत के 10 साल पूरे

भारत ने 2011 के विश्वकप में श्रीलंका को हराकर दूसरी बार 50-50 ओवर का विश्वकप जीता था. भारतीय क्रिकेट की सूरत बदलने वाली इस जीत को आज 10 साल पूरे हो गये हैं.

गौतम गंभीर की 97 रनों की शानदार पारी और जहीर खान के नेतृत्व में गेंदबाजों की धारदार बॉलिंग के दम पर भारत ने ये जीत हासिल की थी.

इस जीत से 28 साल पहले 1983 में कपिल देव के नेतृत्व में भारत ने वेस्टइंडीज को हराकर पहली बार विश्वकप का खिताब जीता था और इस जीत ने भारतीय क्रिकेट को जो आत्मविश्वास दिया था उसी का परिणाम था कि भारत ने पहली बार अपने घर में खिताब जीतने का कारनामा किया.

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गंभीर और धोनी की जुझारू पारी हमेशा याद रखेगा देश

275 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को खराब शुरुआत मिली. वीरेंद्र सहवाग पारी की दूसरी ही गेंद पर शून्य पर आउट हो गये थे.

उनके बाद पूरे विश्वकप में भारत की बल्लेबाजी की धुरी रहे सचिन तेंदुलकर भी 7वें ओवर में 18 रन बनाकर आउट हो गये. गौतम गंभीर ने बेहद दबाव में धैर्य के साथ जूझारू पारी खेली और भारत की जीत की नींव तैयार की.

गंभीर ने पहले विराट कोहली के साथ मिलकर 83 रनों की साझेदारी की और फिर धोनी के साथ मिलकर भारत को जीत की ओर ले गये. फाइनल में धोनी ने भी नाबाद 91 रन बनाए थे.

श्रीलंका लगातार दूसरी बार विश्वकप का फाइनल हारा

2007 और 2011 के विश्वकप में लगातार दो बार लंकाई टीम फाइनल तक पहुंची लेकिन वो खिताब से हर बार दूर रह गई. सितारों से सजी श्रीलंका को फाइनल में हरा पाना आसान नहीं थी.

मलिंगा, मुरलीधरन, संगाकारा, जयवर्धने और दिलशान जैसे दिग्गज खिलाड़ियों ने पूरा जोर लगाया लेकिन अपनी टीम को विश्वकप नहीं जिता पाए. श्रीलंका की ओर से फाइनल में महेला जयवर्धने ने 88 गेंद में 103 रनों की शानदार पारी खेली थी.

भारत की ओर से जहीर और युवराज ने 2-2 जबकि हरबजन सिंह ने 1 विकेट झटका था.

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