तमिलनाडु में कंज्यूमर के अधिकारों के साथ हो रहा है खिलवाड़, जानिए कैसे ?

क्या कंज्यूमर को उसकी पसंद से महरूम किया जा सकता है ?क्या उसपर अपनी पसंद थोपी जा सकती है. क्या कंज़्यूमर की पसंद नापसंद तय करने का अधिकार किसी संस्था या कंपनी को है ? ये सवाल इसलिए क्योंकि जिस देश में कंज़्यूमर को किंग बनाने के लिए तमाम नियम बनाए गए वहीं कुछ कंपनियां उसे धता बताते हुए अपने हितों को आगे करने में लगी हैं. 

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Dec 25, 2019, 03:45 PM IST
    • ज़ी ने पैक के टैरिफ में नहीं किया कोई बदलाव
    • ट्विटर पर दिख रही है लोगों की बौखलाहट
    • क्या है पूरा मामला
तमिलनाडु में कंज्यूमर के अधिकारों के साथ हो रहा है खिलवाड़, जानिए कैसे ?

चेन्नई: फ्री मार्केट इकोनॉमी में कंज़्यूमर की पसंद और उसके अधिकारों को सबसे ऊपर जगह दी गई है, लेकिन तमिलनाडु में कुछ केबल ऑपरेटर्स की मनमानी के चलते दर्शक देश के सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले ज़ी टीवी नेटवर्क के चैनल्स नहीं देख पा रहे हैं. तमिलनाडू के तीन केबल ऑपरेटर अरसू, एससीवी और वीके डिजिटल ने बिना कोई कारण बताए या पूर्व सूचना के अपने नेटवर्क से ज़ी के चैनल्स को हटा दिया है.

ज़ी ने पैक के टैरिफ में नहीं किया कोई बदलाव

सूत्रों के मुताबिक तीनों केबल ऑपरेटर्स ने ज़ी के चैनल्स को अपने बेस पैक से हटाने के पीछे पैक की फी बढ़ाने को कारण बताया है जबकि ज़ी नेटवर्क ने साफ कहा है कि उनके पैक के टैरिफ में कोई बदलाव नहीं किया गया है.अगर तमिलनाडु में सबसे लोकप्रिय ब्रॉडकास्टर्स के टैरिफ प्लैन को देखें तो ज़ी प्राइम पैक तमिल एसडी में दर्शकों को 9 चैनल सिर्फ 10 रुपए महीने में देखने को मिल रहे हैं जबकि स्टार वैल्यू तमिल पैक में 8 चैनल के लिए 25 रुपए देने पड़ रहे हैं जबकि सन के तमिल बेसिक एसडी बुके में 7 चैनल के लिए 40 रुपए वसूले जा रहे हैं.

ट्विटर पर दिख रही है लोगों की बौखलाहट

साफ है कि ज़ी का पैक सबसे VALUABLES है और इसमें ज़्यादा चैनल भी देखने को मिल रहे हैं. तीनों केबल ऑपरेटर के ज़ी चैनल्स को नहीं दिखाने पर दर्शक काफी नाराज़ हैं और सोशल मीडिया के ज़रिए अपनी भड़ास निकाल रहे हैं. विजय एएम राघवन नाम के एक दर्शक ने ट्विटर पर लिखा है कि मैं पिछले दो साल से एससीवी ऑपरेटर की सेवा ले रहा हूं. मैंने ज़ी तमिल चैनल के लिए इस महीने की शुरुआत में फीस जमा की थी लेकिन उन्होंने महीने के बीच में ही इन चैनल्स को दिखाना बंद कर दिया. क्या इन चैनल्स को फिर से देख पाने का कोई और ज़रिया है या क्या मुझे इन चैनल्स के लिए जमा फीस रिफंड हो सकती है?

एक दूसरे दर्शक ने ट्वीट किया है कि कुछ ऑपरेटर्स ने ज़ी तमिल चैनल को बिना पूर्व सूचना के बंद कर दिया है. ट्राई को दखल देकर समस्या का समाधान करना चाहिए.

ज़ी ने अपने सभी दर्शकों से कहा है कि वो अपने केबल ऑपरेटर से ज़ी के चैनल दिखाए जाने को कहें जिसके लिए वो महीने के 10 रुपए दे रहे हैं. नियम के मुताबिक भी जब तक कंज़्यूमर खुद किसी चैनल को अपने बुके से ना हटा दे कोई केबल ऑपरेटर किसी भी चैनल को इस तरह बंद नहीं कर सकता. हर चैनल दिखाने के लिए ऑपरेटर कानूनन बाध्य है लेकिन तमिलनाडु में अरसू, एससीवी और वीके डिजिटल ने जिस तरह ज़ी के चैनल्स को नहीं दिखा रहे हैं. वो नियम के खिलाफ है, और कहीं न कहीं कार्टलाइज़ेशन की ओर इशारा कर रहा है.

क्या है पूरा मामला 

दरअसल इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि ज़ी नेटवर्क ने पिछले दिनों चार नए रीजनल चैनल्स लॉन्च किए जिनमें तमिल मूवी चैनल ज़ी थरई और कन्नड़ मूवी चैनल ज़ी पिच्चर भी शामिल है. इसके अलावा ज़ी हिन्दुस्तान पर तमिल और तेलुगु में दिखाई जा रही हैं. ये सभी चैनल्स तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं जिसे रोकने के लिए कहीं न कहीं साजिशन ऐसा किया गया है.

तीनों केबल ऑपरेटर्स के इस दावे को खारिज करने के लिए कि ज़ी ने अपने चैनल्स का ब्रॉडकास्ट तमिलनाडु में बंद कर दिया है नेटवर्क की तरफ से बयान जारी किया गया है कि तमिलनाडु में उसके चैनल्स का ब्रॉडकास्ट अरसू एससीवी वीके डिजिटल केबल ऑपरेटर के अलावा एयरटेल डिजिटल, टाटा स्काई, डिश टीवी, डी2एच और सन डायरेक्ट जैसे डीटीएच प्लैटफॉर्म पर किया जा रहा है.

कहा जा सकता है तमिलनाडु में सीधे सीधे कंज्यूमर के अधिकारों से खिलवाड़ हो रहा है. ऐसे में ट्राई को फौरन इसमें दखल देकर कंज़्यूमर के अधिकारो को बहाल करना चाहिए.

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