ट्रेन की वेटिंग टिकट से जूझने वालों के लिए खुशखबरी

अगर आप ट्रेन से सफर करते हैं और आपको वेटिंग टिकट की समस्या से जूझना पड़ता है तो आपके लिए भारतीय रेलवे ने बड़ी जानकारी दी है. रेल में सफर करने वालों को अब 5 सालों के भीतर कन्फर्म टिकट की सुविधा मुहैया कराई जाएगी.

ट्रेन की वेटिंग टिकट से जूझने वालों के लिए खुशखबरी

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी लेकर आई है. रेल के मुसाफिरों के लिए अब रेलवे ने बड़ी सुविधा देने का बीड़ा उठाया है. दावा किया जा रहा है कि अगले 5 सालों में रेल यात्रियों को कन्फर्म टिकट की व्यवस्था की जाएगी. यानी अब वेटिंग लिस्ट की समस्या दूर करने की तैयारी की गई है.

रेलवे के बिजी रूट पर कन्फर्म टिकट की सुविधा

अगले पांच सालों के भीतर भारतीय रेल यात्रियों की सबसे बड़ी परेशानी दूर करने की तैयारी कर रही है. जानकारी के अनुसार अब वेटिंग लिस्ट की समस्या का निपटाया किया जाएगा और ये समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी. बिजी रूट के लिए रेलवे खासा प्लान तैयार कर रही है.

दिल्ली-मुंबई
दिल्ली-कोलकाता
दिल्ली-चेन्नई

ऐसे रूट पर ज्यादातर वेटिंग टिकट की समस्या से यात्रियों को जूझना पड़ता है. जिसके लिए इस बदलाव को हकीकत में बदलने के लिए मोदी सरकार ने कई प्लान बनाए हैं. रेलवे सेक्टर के रिफॉर्म में ये अब तक का सबसे बेहतर कदम माना जा रहा है.

रेलवे रिफॉर्म की बड़ी बातें

पूरे रेलवे बोर्ड की रिस्ट्रक्चरिंग की गई है. रेलवे बोर्ड मेंबर की संख्या घटाकर सिर्फ 5 तक सीमित करने की तैयारी की गई है, जिसमें रेलवे बोर्ड के चेयरमैन भी शामिल हैं. इसके साथ ही अब रेलवे की भर्तियां UPSC के जरिये होगी. इसके अलावा IRMS यानी इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस स्ट्रीम का गठन होगा. यानी आने वाले वक्त में सभी रेलवे रिक्रूटमेंट IRMS के जरिये ही होगी.

रेलवे में मौजूद APEX लेवल या सेक्रेटरी लेवल की संख्या को 10 से बढ़ाकर 34 किया गया है. सभी जोनल मैनेजर को APEX लेवल या सेक्रेटरी लेवल का दर्जा देने का फैसला किया गया है. GM अपने अपने जोन के सभी बड़े फैसले लेने के लिए स्वतंत्र होंगे. इसमें बार-बार रेलवे बोर्ड के मंजूरी की झंझट खत्म हो जाएगी. डिपार्टमेंट लॉबिंग या ब्यूरोक्रेसी भी खत्म होगी.

इंफ्रा में होगा बड़ा विस्तार

10 साल में रेलवे में 50 लख करोड़ का निवेश होगा. अगले 1 साल में 14000 किमी. पर भारतीय रेलवे मल्टी ट्रैकिंग करेगी. मल्टी ट्रैकिंग मतलब रेल लाइन का दोहरीकरण या ट्रिपल करना. साथ ही दिसंबर 2021 तक रेलवे का सबसे बड़ा इंफ्रा प्रोजेक्ट डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पूरा होगा. 1400 किमी. के डीएफसी यानी ईस्टर्न और वेस्टर्न डीएफसी के पूरा होने से सभी मालगाड़ियां मौजूदा रेल नेटवर्क से डीएफसी की तरफ चली जाएंगी. इसका सीधा मतलब ये है कि मौजूदा रेल नेटवर्क में जबरदस्त capacity एक्सपेंशन हो पायेगा.

देश में जल्द प्राइवेट प्लेयर ऑपरेटेड ट्रैन का बिछेगा जाल

10 दिन के भीतर रेलवे प्राइवेट प्लेयर ऑपरेटेड ट्रेन चलाने के लिए बिडिंग आमंत्रित करने जा रही है. प्राइवेट प्लेयर ऑपरेटेड ट्रैन के लिए 10 रूट का चयन कर लिया गया है. दिल्ली-मुम्बई, दिल्ली-कोलकाता, दिल्ली-चंडीगढ़ अहम रूट जहां प्राइवेट ट्रैनें चलाई जाएंगी.

माल ढुलाई के किराये हो सकते हैं कम

रेलवे जबरदस्त वित्तीय दबाव में है. 125000 करोड़ की कमाई फ्रेट या माल ढुलाई से है, जबकि सिर्फ 45000 करोड़ रुपए की कमाई यात्री किराए से है. पैसेंजर सेंगमेंट में रेलवे को बहुत घाटा है. रेलवे का सीधा लक्ष्य है कि सबसे पहले फ्रेट सेगमेंट में कमाई को बढ़ाना है. फ्रेट सेगमेंट में कमाई बढ़ाने के लिए रेलवे फ्रेट किरायों को जल्द ही कम करेगी. ताकि रोड के जरिये ट्रांसपोर्ट को वो रेलवे की तरफ आकर्षित कर सके.

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इसके साथ ही भारतीय रेलवे यात्रियों के किराये को लेकर भी जल्द फैसला कर सकती है. रेलवे सेक्टर में होने वाले इस बदलाव को ऐतिहासिक करार दिया जा रहा है.

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