पाकिस्तानी नेता ने ओवैसी को कहा- अयोध्या फैसले से नाखुश हो तो पाकिस्तान चले जाओ ?

कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद इस पाकिस्तानी नेता ने एक गाना गाया था "सारे जहां से अच्छा हिंदु्स्तान हमारा." अब वहीं MQM का नेता किसी बात पर ओवैसी को पाकिस्तान भेज कर खुद भारत में आना चाहता है. उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारत में राजनयिक शरण की मांग की है. 

पाकिस्तानी नेता ने ओवैसी को कहा- अयोध्या फैसले से नाखुश हो तो पाकिस्तान चले जाओ ?

नई दिल्ली: पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तानी हुकूमत के नाक में दम मचा कर रखने वाले नेता अल्ताफ हुसैन ने भारत में शरण की मांग की है. पाकिस्तान में रहते हुए अपनी ही सरकार के खिलाफ हेट स्पीच फैलाने के मामले में MQM मुताहिदा कौमी मूवमेंट के फाउंडर अल्ताफ हुसैन पर देशद्रोह का मुकदमा दायर कर लिया गया था. लेकिन गिरफ्तारी से पहले ही वह अपने साथियों के संग पाकिस्तान छोड़ कर रफूचक्कर हो निकले. फिलहाल ब्रिटेन में छुपे अल्ताफ ने प्रधानमंत्री मोदी से भारत में उनके साथ अपने साथियों के लिए शरण की मांग की है. हालांकि भारत सरकार ने अभी तक इसका कोई जवाब नहीं दिया.

कश्मीर पर भारत के समर्थन में दिया बयान

अल्ताफ हुसैन फिलहाल ब्रिटेन में हैं और वहां से भी इमरान सरकार के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं. कश्मीर से अनुच्छेद 370 का हटाया जाना हो या अयोध्या राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला इन तमाम विषयों पर भारत सरकार की तारीफ और हिंदुस्तान के पक्ष में बोलते नजर आते हैं. पाकिस्तानी हुकूमत का बयान चाहे जो भी हो, अल्ताफ लगातार उसकी आलोचना में लगे रहते हैं और भारत की भक्ति करते हैं. कुछ ही दिनों पहले घाटी से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद मुताहिदा कौमी के नेता ने सारे जहां से अच्छा हिंदुस्ताना गाना कर फैसले का स्वागत किया था. जिसके बाद पाकिस्तानी हुकूमत ने अपनी भौंहे चढ़ा ली थी. 

ओवैसी को दी पाकिस्तान चले जाने की नसीहत

अब अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले की तारीफ करते हुए राम मंदिर निर्माण के फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि "वह अयोध्या जमीनी विवाद के फैसले पर मस्जिद बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से अलग जमीन दिए जाने के फैसले का स्वागत करते हैं. भारतीय सरकार को हक है कि वह भारत को हिंदू राज के रूप में स्थापित करे. इतना ही नहीं अल्ताफ हुसैन ने AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी को आड़े हाथों लिया. उन्होंने ओवैसी के राम मंदिर फैसले पर की गई टिप्पणी के बाद कहा कि इस्लामिक कट्टरपंथी मान्यताओं को मानने के लिए ही पाकिस्तान बनाया गया है. जिसे उस फैसले से दिक्कत हो वह हिंदु्स्तान छोड़ पाकिस्तान चला जाए."

देशद्रोह के मुकदमे के बाद से ही हैं फरार

पाकिस्तान की राजनीति में अल्ताफ हुसैन विवादित लेकिन बड़े जाने-माने चेहरे हैं. कराची में अपनी ही सरकार के खिलाफ भीड़ को उकसा कर हिंसा के मामले में उन्हें दोषी पाया गया है. मुकाहिदा कौमी नेता अल्ताफ हुसैन के अलावा मोहाजिर पार्टी के उर्दु बोलने वाले कुछ मुस्लिम नेता भी पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ और भारत के प्रति प्रो सोच रखने वाले हैं.

पाकिस्तानी नेता ने हेट स्पीच मामले पर सवाल पूछे जाने पर मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि "यह सिर्फ उन पर आरोप है. वह शांति प्रिय इंसान हैं. वह राजनीति के पचड़े में नहीं पड़ना चाहते. भारत सरकार से भी उन्होंने यहीं अपील की है कि वे और उनके साथी किसी भी तरह के राजनीति में नहीं आएंगे. बस भारत में उन्हें शरण दे दी जाए. इसके अलावा कुछ बलोच और सिंधी लोगों को भी जो मुसीबत में हैं, उनके साथ ही शरण दे दी जाए." 

सिंधी और बलोचों के लिए जारी रखना चाहते हैं लड़ाई

भारत से गुहार लगाते हुए अल्ताफ हुसैन ने कहा कि "पाकिस्तानी सरकार ने उनके घर और ऑफिस सबको सीज कर लिया है. उनके पास न्याय के लिए लड़ने का कोई साधन नहीं बचा है. भारत सरकार अगर उन्हें शरण नहीं दे सकती तो कुछ प्रभावी और आर्थिक रूप से मजबूत लोगों का साथ ही दिलवा दे ताकि वे यूएन की इंटरनेशनल कोर्ट में बलोच, सिंधी और मुहाजिर्स के लिए अपनी लड़ाई जारी रख सकें."

भारत में शरण लेना चाहते हैं अल्ताफ

अल्ताफ हुसैन को पाकिस्तानी हुकूमत भले भगौड़े की नजर से देख रही हो लेकिन कही न कहीं अल्पसंख्यकों के बीच उसकी छवि को देख इमरान सरकार भी डर रही थी. अपनी ही सरकार के खिलाफ रंजिशें बढ़ाने के आरोप में अल्ताफ हुसैन पर देशद्रोह का मुकदमा ठोंक उन्हें जेल में बंद करने का आदेश जारी किया गया है. पाकिस्तानी नेता कहते हैं कि भारत के प्रति उनके प्यार को देख पाकिस्तानी हुकूमत देशद्रोह के आरोप में उनको जेल में बंद कर मारने का षडयंत्र रच रही है. हुसैन ने कहा कि उनके दादा-दादी हिंदुस्तान में ही जन्में और वहीं दफन हुए. वे भारत में उनके मजार पर जाना चाहते हैं.

भारत सरकार ने फिलहाल अल्ताफ हुसैन की अर्जी पर कुछ विचार नहीं किया है और ना ही सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है.