टिकटॉक के सीईओ चार माह में ही चलते बने

भारत से निकाले जाने पर कुछ ऐसी हालत बिगड़ी है टिकटॉक को कि अब इसको हर देश में शक की निगाह से देखा जा रहा है और तो और इसके अंदरूनी हालात भी बहुत बुरे हो गए हैं..

टिकटॉक के सीईओ चार माह में ही चलते बने

नई दिल्ली.  कोरोना कंट्री के पाप ढो रहा है ये चीनी ऐप और लगातार परेशानियों में फंस रहा है. खबर आई है कि टिकटॉक के CEO केविन मेयर ने भी दे दिया है इस्तीफ़ा. सीईओ के पद पर केविन मेयर को आये हुए अभी  चार महीने ही पूरे हुए थे कि उनको जाना पड़ गया. ज़ाहिर है, बाहर तो हाल खराब हैं ही, कम्पनी के अंदर भी सब ठीक नहीं है. 

 

चरों तरफ से घिरे थे सीईओ 

टिकटॉक के सीईओ केविन मेयर चारों तरफ से मुसीबतों से घिरे हुए थे. चार माह पहले आये इस सर्वोच्च अधिकारी के लिए इन मुसीबतों से पार पाना आसान नहीं था. भारत ने बैन लगाया तो अमेरिका ने भी टिकटॉक को अस्पृश्य बना डाला है. अब अमेरिका में अस्तित्व के संकट का सामना कर रहे टिकटॉक के सीईओ को इस्तीफे के लिये मजबूर होना पड़ा है. कंपनी का चीनी मालिक भी अमेरिकी दबाव में है और इस वीडियो ऐप को बेचने के लिये उसे जूझना पड़ रहा है.

गूगल ने टिकटॉक को भारत में किया बैन

गूगल अब भारत के बड़े बाजार में कोई खतरा मोल नहीं ले रहा है. गूगल ने टिकटॉक को भारत में बैन कर दिया है ताकि अब कोई इस ऐप को डाउनलोड नहीं कर पाए. जहां भारत ने पहले ही सुरक्षा कारण बता कर इस ऐप को भारत से बारह पत्थर बाहर किया था, उसे अमेरिका ने भी सुरक्षा के लिए खतरा करार दिया है. 

राजनीतिक माहौल ने किया मजबूर

टिकटॉक के सीईओ केविन मेयर ने इस्तीफे का कारण अपने उस पत्र में स्पष्ट किया जो बाद में उन्होने कंपनी के कर्मचारियों को पत्र में लिखा था. केविन मेयर ने पत्र में बताया कि तेजी से बदलते राजनीतिक माहौल ने उनको ये फैसला लेने के लिये विवश किया है. केविन मेयर इसके पहले डिजनी के कार्यकारी अधिकारी के तौर पर सेवायें दे रहे थे.

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