टाइटैनिक: वह अभागा जहाज जो 10 अप्रैल को अपने पहले और आखिरी सफर पर निकला

टाइटैनिक के साथ जो कुछ भी हुआ उसके पीछे सबसे बड़ा हाथ विलासिता और अतिमहत्वकांक्षा का था. महत्वकांक्षा थी इतिहास बनाने की, इस बात की कि समुद्र में सबसे बड़ा जहाज पहली बार सबसे तेज गति से तैरा. लेकिन इतिहास इस बात पर बना कि सबसे बड़े जहाज का पहला ही सफर आखिरी हो गया. 

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Apr 10, 2021, 10:16 AM IST
  • टाइटैनिक की कुल लम्बाई 882 फीट और 9 इंच थी
  • टाइटैनिक के डिजाइनरों में Lord Pirrie का नाम प्रमुख है.
टाइटैनिक: वह अभागा जहाज जो 10 अप्रैल को अपने पहले और आखिरी सफर पर निकला

नई दिल्लीः टाइटैनिक जहाज का 10 अप्रैल से गहरा नाता है. यह बदकिस्मत जहाज 10 अप्रैल के दिन ही ब्रिटेन के साउथेम्पटन बंदरगाह से अपनी पहली और अंतिम यात्रा पर रवाना हुआ था.

वैसे टाइटैनिक जहाज का जिक्र आते ही इससे जुड़ी दुर्घटना के तमाम मंजर आंखों के सामने से गुजर जाते हैं.

सिर्फ याद रह गई फिल्म
वैसे यह भी हकीकत है कि जहाज कब बना, किसने बनाया, यह कब अपनी यात्रा पर निकला यह सारे तथ्य 1997 में आई फिल्म टाइटैनिक ने धुंधले कर दिए और याद रह गई जेम्स कैमरन की यह शानदार फिल्म, विशाल जहाज के डैक पर बांहें फैलाए खड़े लियोनार्डो डी कैप्रियो और केट विंस्लेट, नीले हीरे वाली माला और पानी का रौद्र रूप.

आज भी बाकी हादसे की याद
लेकिन टाइटैनिक की यादगार के दिन इन सारे तथ्यों पर निगाह जरूर डाल लेनी चाहिए. क्योंकि इतिहास की यह भीषण दुर्घटना कभी न भुला दिए जाने वाले हादसों में से एक है. यह हादसा इस बात का गवाह है कि जरूरत के बजाय विलासिता को महत्व देना कितना भारी पड़ता है और यह भी की अति महत्वकांक्षाएं आपके साथ कैसा सुलूक कर सकती हैं. 

इसलिए हुई टाइटैनिक के साथ दुर्घटना
यह सच है कि टाइटैनिक के साथ जो कुछ भी हुआ उसके पीछे सबसे बड़ा हाथ विलासिता और अतिमहत्वकांक्षा का था. महत्वकांक्षा थी इतिहास बनाने की, इस बात की कि समुद्र में सबसे बड़ा जहाज पहली बार सबसे तेज गति से तैरा.

लेकिन इतिहास इस बात पर बना कि सबसे बड़े जहाज का पहला ही सफर आखिरी हो गया. 

शांतिकाल में हुई सबसे बड़ी समुद्री आपदा
टाइटैनिक दुनिया का सबसे बड़ा भाप आधारित यात्री जहाज था. साउथहैम्पटन (इंग्लैंड) से अपनी पहली यात्रा पर यह जहाज 10 अप्रैल 1912 को रवाना हुआ. चार दिन की यात्रा के बाद, 14 अप्रैल 1912 को एक आइसबर्ग से टकरा कर डूब गया. हादसे में 1,517 लोगों की मृत्यु हुई. यह मौतें इतिहास की सबसे बड़ी शांतिकाल हुई समुद्री आपदा बन गईं. 

यह कंपनी करती थी संचालन
ओलंपिक श्रेणी का यात्री लाइनर टाइटैनिक का संचालन व्हाइट स्टार लाइन शिपिंग कंपनी कर रही थी. इसका निर्माण Belfast (Ireland) के Harland ओर Wolff शिपयार्ड में किया गया था. वह 2,223 यात्रियों के साथ न्यूयॉर्क शहर के लिए रवाना हुआ था. 

टाइटैनिक के डूबने की मुख्य वजह इसका तेज गति से चलना था. टाइटैनिक के मालिक J. Bruce Ismay ने जहाज के कप्तान Edward Smith को जहाज को अत्यधिक गति से चलाने के लिए कहा था.

12 अप्रैल 1912 को टाइटैनिक को 6 बर्फ की चट्टानों की चेतावनिया मिली थी. कप्तान को लगा की बर्फ की चट्टान (Ice Berg) आने पर जहाज मुड़ जाएगा. बदकिस्मती से ऐसा नहीं हुआ. बर्फ की चट्टान आने पर वह अधिक गति के कारण समय पर नहीं मुड़ पाया और चट्टान से जा टकराया. 

इससे जहाज के आगे के हिस्से में छेद हो गए और लगभग 11:40 p.m. पर वो डूबने लगा. तकरीबन 2:20 बजे सुबह वह पूरा अटलांटिक महासागर में समा गया. 

टाइटैनिक का निर्माण Belfast (Ireland) के Harland ओर Wolff शिपयार्ड में किया गया था. इसका बनाया जाना एक प्रतिस्पर्धा थी और इसे Cunard Line के Lusitania और Mauretania जहाजों की प्रतिस्पर्धा के तौर पर डिजाइन किया गया था. दरअसल टाइटैनिक से पहले Mauretania Ship सबसे बड़ा जहाज था और अपनी विलासिता के लिए प्रसिद्ध भी. 

वे सारे नाम जो टाइटैनिक बनाने में शामिल हुए
टाइटैनिक के डिजाइनरों में Lord Pirrie का नाम प्रमुख है. वह Harland & Wolff और White Star के संचालक थे. नौसेना आर्किटेक्ट Thomas Andrews इसी कंपनी में निर्माण प्रबंधक और डिजाइन विभाग के प्रमुख थे. फिर नाम आता है Alexander Carlisle का जो कि शिपयार्ड के प्रमुख रचनाकार और जनरल मैनेजर थे. Alexander Carlisle की ही जिम्मेदारी थी कि वह जहाज में विलासिता से भरी साज-सज्जा कराएं, जरूरी उपकरण, व्यवस्था और Lifeboat रखें. 

टाइटैनिक का निर्माण
टाइटैनिक का निर्माण 31 मार्च 1909 को American J.P. Morgan और International Mercantile Marine Co. की लागत से शुरू हुआ. 
इसके पतवारों को 31 मई 1911 को जल में उतारा गया और तैयारी होने लगी कि अगले साल इसकी यात्रा शुरू कर दी जाए. 

टाइटैनिक की कुल लम्बाई 882 फीट और 9 इंच (269.1 मीटर), इसके ढालों की चौड़ाई 92 फीट (28.0 मीटर), भार 46,328 टन (GRT) और पानी के स्तर से डेक तक की ऊंचाई 59 फीट (18 मीटर) थी. जहाज में दो पारस्परिक जुड़े हुए चार सिलेंडर, triple-expansion steam engines और एक कम दबाव Parsons turbine (जो प्रोपेलर को घुमाते थे) था. 

इसमें 29 boiler थे जो 159 कोयला संचालित भट्टियो से जुड़े हुए थे और जहाज को 23 समुद्री मील (43 km/h, 26 mph) की तेज गति प्रदान करते थे. 62 फीट (19 मी) की उचाई की चार में से केवल तीन funnel काम करती थीं और चौथी funnel, वेंटिलेशन के लिए थी. इसके साथ ही यह जहाज को अधिक सजावटी और आकर्षक भी बनाती थीं. जहाज की कुल क्षमता यात्रियों और चालक दल के साथ 3549 थी.

जिस चट्टान से जहाज टकराया
जहाज अपनी यात्रा के चौथे दिन तेज गति में चलते हुए एक आइसबर्ग से टकरा गया था. एक अनुमान के मुताबिक यह बर्फीली चट्टान करीब 10,000 साल पहले ग्रीनलैंड से अलग हुई थी. 

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