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दिल्ली हाईकोर्ट सात दिसंबर को करेगी शरजील इमाम की जमानत याचिका पर सुनवाई

शरजील इमाम के वकील ने कोर्ट में कहा, भाषण में धार्मिक दुश्मनी बढ़ाने वाली बात नहीं की. इमाम ने कथित तौर पर भारत से असम और बाकी पूर्वोत्तर को ‘काटने’ की चेतावनी दी थी. 

 

अलामती तस्वीर
अलामती तस्वीर

नई दिल्लीः संशोधित नागरिकता कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान मुबैयना तौर पर भड़काऊ भाषण देने के इल्जाम में गिरफ्तार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के छात्र शरजील इमाम (Sharjeel Imam) ने बुधवार को दिल्ली की एक अदालत में कहा कि उनके भाषण में ऐसा कुछ भी नहीं था जिससे धार्मिक दुश्मनी हो. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत 2019 में दो विश्वविद्यालयों में इमाम द्वारा दिए गए कथित भाषणों के लिए उनके खिलाफ दायर एक मामले की सुनवाई कर रहे थे, जहां इमाम ने कथित तौर पर भारत से असम और बाकी पूर्वोत्तर को ‘काटने’ की चेतावनी दी थी. 

सात दिसंबर को कोर्ट सुनाएगी फैसला 
इमाम को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून (यूएपीए) के तहत और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत राजद्रोह के कथित अपराध के लिए गिरफ्तार किया गया था और अब उन्होंने मामले में जमानत के साथ-साथ आरोपमुक्त करने का अनुरोध किया है. न्यायाधीश रावत जमानत और आरोप मुक्त करने के इमाम की अर्जियों पर आदेश सात दिसंबर के लिए सुरक्षित रखा और विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद को राज्य की तरफ से विस्तृत लिखित बयान दाखिल करने का निर्देश दिया. 

आरोपी का क्या है पक्ष 
इमाम ने 2019 जामिया हिंसा से संबंधित राजद्रोह के एक और मामले में जमानत के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर रखी है. कार्यवाही के दौरान इमाम के वकील ने कहा कि भाषण में ऐसा कुछ भी नहीं था जो किसी भी तरह की धार्मिक दुश्मनी का कारण बनता हो. हम संदर्भ से अलग कर नहीं देख सकते हैं. सीएए-एनआरसी के संबंध में शरजील इमाम ने जो कहा वह यह कि सीधे तौर पर एक समुदाय को जितना प्रभावित करता है, ऐसे में बहुसंख्यक समुदाय से किस तरह का समर्थन मिलना चाहिए.

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश का दिया हवाला 
वकील तनवीर अहमद मीर ने आगे कहा कि अगर किसी शख्स को एक सरकारी नीति के संबंध में कहना है जो एक समुदाय ‘ए’ को सीधे प्रभावित करता है तो दूसरे समुदाय ‘बी’ के लोगों को उनके साथ खड़े होना चाहिए. अगर वे आपका समर्थन नहीं कर रहे हैं तो इस बारे में हम नहीं कह सकते कि भाषण का वह हिस्सा दो समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देता है. उन्होंने न्यायाधीश को हाल में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश से भी अवगत कराया, जिसमें इमाम को जनवरी 2020 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में दिए गए एक भाषण के लिए उनके खिलाफ दर्ज राजद्रोह के मामले में जमानत दी गई थी.

उच्च न्यायालय ने पुलिस से मांगा जवाब 
वहीं एक अन्य मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने राजद्रोह के इल्जाम में गिरफ्तार छात्र शरजील इमाम की जमानत याचिका पर बुधवार को दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया. इमाम पर 2019 में सीएए-एनआरसी विरोधी प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण देने और हिंसा भड़काने के आरोप हैं. न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर ने इमाम की याचिका पर अभियोजन पक्ष को नोटिस जारी किया और उसे 11 फरवरी से पहले जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 फरवरी की तारीख सूचीबद्ध की गई है. इमाम ने उसकी जमानत याचिका खारिज करने के निचली अदालत के 22 अक्टूबर के आदेश को चुनौती दी है. याचिका में कहा गया, ‘‘यह स्वीकार करने के बाद भी कि अभियोजन पक्ष ने जिन सबूतों पर भरोसा किया, वह ‘अस्पष्ट’ हैं और सभी सह आरोपी जमानत पर हैं, इसके बाद भी निचली अदालत ने याचिकाकर्ता को जमानत नहीं दी.’’ 

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