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अलीगढ़ में मुस्लिम औरतों की क्या है सबसे बड़ी दिक्कत? पढ़ें उन्हीं की जबानी

Aligarh Muslim Women: उत्तर प्रदेश में बड़ी मुस्लिम आबादी रहती है. ऐसे में यहां मुस्लिम औरतों को कई परेशानियों का सामना है. यहां की मुस्लिम औरतें चाहती हैं कि उन्हें नौकरी और रोजगार मिले. इससे उनकी जिंदगी बदलेगी.

 

अलीगढ़ में मुस्लिम औरतों की क्या है सबसे बड़ी दिक्कत? पढ़ें उन्हीं की जबानी

Aligarh Muslim Women: उत्तर प्रदेश का जिला अलीगढ़ इन दिनों चर्चा में हैं. हाल ही में पीएम मोदी ने यहां तीन तलाक और हज में मुसलमानों का कोटा बढ़ाए जाने का हवाला देकर वोट मांगा. लेकिन यहां मुस्लिम युवतियों की मौजूदा लोकसभा चुनाव में नौकरी और सुरक्षा बड़ा चुनावी मुद्दा हैं. युवा मुस्लिम महिला मतदाताओं के लिए नौकरियां न केवल आजीविका का साधन हैं, बल्कि खास तौर से आजादी और सुरक्षा का मार्ग भी हैं. 

इस तरह मिलेगी आजादी
शादी के लिए पारिवारिक दबाव का सामना कर रहीं 21 साल की इंजीनियरिंग स्नातक सलमा खातून (बदला हुआ नाम) ने अपने जैसी युवतियों के लिए रोजगार के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा, "मेरे लिए, नौकरी ढूंढना सिर्फ करियर से कहीं ज्यादा है क्योंकि यह मेरी आजादी से जुड़ा मुद्दा है. अगर मुझे नौकरी नहीं मिलती है, तो मुझे अपने परिवार की इच्छाओं का पालन करना होगा." 

काम से बदलेगी जिंदगी
इसी तरह, पहली बार मतदाता बनीं कंप्यूटर इंजीनियरिंग की छात्रा सैयदा फातिमा को उनके परिवार ने सलाह दी है कि अगर उन्हें नौकरी नहीं मिल पाती है तो वे शादी को प्राथमिकता दें. जिले में मुस्लिम महिलाओं के बीच एक आम भावना का जिक्र करते हुए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) की सेवानिवृत्त शिक्षिका फरहत जहां ने कहा, "यहां महिलाओं के लिए, नौकरियां न केवल आजीविका बल्कि स्वतंत्रता और सुरक्षा का प्रतिनिधित्व करती हैं. वे उस समय में वापस नहीं जाना चाहतीं, जब पढ़ाई-लिखाई का उनका एकमात्र उद्देश्य यह था कि उन्हें एक अच्छा पति मिल सके."

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बेरोजगारी का मुद्दा
लोकसभा चुनाव में बेरोजगारी का मुद्दा यहां की महिलाओं के बीच मजबूती से गूंजता है. AMU में 29 साल की PhD स्कॉलर असरा अलवी ने रोजगार हासिल करने की चुनौतियों के बारे में खुलकर बात की, खासकर अकादमिक क्षेत्र में. शैक्षणिक पदों में कमी पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा, "इस वक्त हम लैंगिक या धर्म से परे एक मुख्य समस्या का सामना कर रहे हैं, वह बेरोजगारी है." 

महिला सुरक्षा
एएमयू में आधुनिक भारतीय इतिहास में परास्नातक कर रहीं 22 वर्षीय सदफ तस्नीम ने रोजगार और सुरक्षा सहित महिलाओं को प्रभावित करने वाली बहुमुखी चिंताओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा, "देश में मौजूदा हालात को देखते हुए एक छात्रा के तौर पर मैं रोजगार और महिला सुरक्षा को प्राथमिकता दूंगी." सदफ ने कहा कि इस समय प्रश्नपत्र लीक हो रहे हैं और देश में रोजगार के बारे में बहुत भ्रम की स्थिति है.

इंपुट भाषा से

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Siraj Mahi

सिराज माही युवा पत्रकार हैं. देश, दुनिया और मनोरंजन की खबरों पर इनकी अच्छी पकड़ है. ज़ी मीडिया से पहले वह 'ईटीवी भारत' और 'दि संडे पोस्ट' जैसे मीडिया हाउस में काम कर चुके हैं. लिखने-पढ़ने के अलावा ...और पढ़ें

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