Pankaj Shukla

MP: सियासी रस्‍साकशी में अदालत नहीं बनी ‘पॉलीटिकल कोर्ट’

MP: सियासी रस्‍साकशी में अदालत नहीं बनी ‘पॉलीटिकल कोर्ट’

मप्र में विधानसभा चुनाव नवंबर अंत तक होना है.

अंग्रेजों से आजादी मिल गई, लेकिन 'इस' आजादी को बचाने की फिक्र भी कीजिए

अंग्रेजों से आजादी मिल गई, लेकिन 'इस' आजादी को बचाने की फिक्र भी कीजिए

15 अगस्‍त अपनी आजादी का दिन है. आजादी माने खुली हवा में सांस लेने की छूट. खुली हवा... यानी बंधनों से मुक्ति.

जातीय समीकरणों में घिरती मप्र कांग्रेस की राजनीति

जातीय समीकरणों में घिरती मप्र कांग्रेस की राजनीति

भारतीय समाज वर्ण व्‍यवस्‍था का पालन करता आया है. जाति हमारी सोच, हमारे व्‍यवहार और हमारे क्रियाकलापों के केन्‍द्र में रही है. जातिगत फैसलों ने हमारी सामाजिकी को प्रभावित किया है.

स्‍मृति शेष: अमृतलाल वेगड़ के सदेह हमारे बीच न होने के मायने...

स्‍मृति शेष: अमृतलाल वेगड़ के सदेह हमारे बीच न होने के मायने...

अमृतलाल वेगड़ नहीं रहे... 6 जुलाई की सुबह 11 बजे के लगभग यह सूचना मिली. ज्‍यों ही ये शब्‍द कानों में पड़े यकायक नर्मदा, वेगड़जी द्वारा शब्‍दों और चित्रों में उकेरी नर्मदा की छवियां कौंध गईं.

मध्यप्रदेश में कर्मचारी संगठन के राजनीति में आने के मंतव्‍य

मध्यप्रदेश में कर्मचारी संगठन के राजनीति में आने के मंतव्‍य

मध्यप्रदेश में 2018 के अंत में विधानसभा चुनाव होना है. मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सक्रियता के साथ बीजेपी तो प्रदेश अध्‍यक्ष कमलनाथ की नियुक्ति के साथ कांग्रेस चुनाव मोड में आ चुकी हैं.

हम भीड़ क्‍यों हो जाना चाहते हैं?

हम भीड़ क्‍यों हो जाना चाहते हैं?

खबर आई कि नैनीताल में पर्यटकों की संख्‍या इतनी अधिक हो गई कि पुलिस को हाउसफुल का बोर्ड लगाना पड़ा, लेकिन फिर भी ‘प्रकृति प्रेमी’ लोग माने नहीं. वे सड़क पर वाहनों का जाम लगाए खड़े रहे.

त्वरित टिप्पणी- आसाराम पर फैसला : आस्थाओं के कांपने और न्याय पर विश्वास का दिन

त्वरित टिप्पणी- आसाराम पर फैसला : आस्थाओं के कांपने और न्याय पर विश्वास का दिन

आस्थाएं न कांपें तो मानव फिर मिट्टी का भी देवता हो जाता है.

तरक्‍की के झांझ-मंजीरे बाद में, पहले बीमार शिक्षा की फिक्र कर लें

तरक्‍की के झांझ-मंजीरे बाद में, पहले बीमार शिक्षा की फिक्र कर लें

अधिक दिन नहीं हुए, कुछ बरस पहले तक ही, बच्‍चे का हाथ शिक्षकों को सौंपते हुए कहा जाता था- ‘इसका भविष्‍य आपके हाथों में है. न पढ़े तो खाल खींच लीजिएगा और यह भरोसा शिक्षक की तरफ से भी होता था.

खोखले वादों के विपरीत नर्मदा को सदा नीरा रखने के जन यत्‍न

खोखले वादों के विपरीत नर्मदा को सदा नीरा रखने के जन यत्‍न

मप्र की जीवन रेखा कही जाने वाली नर्मदा संकट में है. धमनियों की तरह नर्मदा को पोषित करने वाली सहायक नदियां सूख चुकी हैं और इस कारण नर्मदा की लय भी कई जगह से टूट रही है.

मिशन 2018 और आदिवासी राजनीति की नई करवट

मिशन 2018 और आदिवासी राजनीति की नई करवट

विधानसभा चुनाव 2018 के पहले मप्र की राजनीति में इनदिनों एक नई तस्‍वीर में रंग भरे जा रहे हैं. ये रंग वास्‍तव में आदिवासी एकता के नारे के साथ उभरे हैं.