Reliance Capital: आज होगा अन‍िल अंबानी की 'क‍िस्‍मत' का फैसला! म‍िलकर इस समस्‍या का हल न‍िकालेंगे कर्जदाता
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Reliance Capital: आज होगा अन‍िल अंबानी की 'क‍िस्‍मत' का फैसला! म‍िलकर इस समस्‍या का हल न‍िकालेंगे कर्जदाता

Reliance Capital Latest News: सूत्रों के अनुसार बोलीदाताओं ने काफी कम कीमत की बोल‍ियां लगाई हैं. ऐसे में कंसलटेंट और कर्जदाताओं की समिति की समाधान प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग राय हैं.

Reliance Capital: आज होगा अन‍िल अंबानी की 'क‍िस्‍मत' का फैसला! म‍िलकर इस समस्‍या का हल न‍िकालेंगे कर्जदाता

Anil Ambani: अन‍िल अंबानी और कर्ज में डूबी उनकी कंपनी रिलायंस कैपिटल (Reliance Capital) की मुश्‍क‍िलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. प‍िछले द‍िनों आई खबरों से र‍िलायंस कैप‍िटल और उसके कर्जदाताओं ने राहत की सांस ली थी. लेक‍िन अब रिलायंस कैपिटल के कर्जदाताओं और परामर्शदाताओं (Lenders and Counselors) के बीच मतभेद उभरकर सामने आए हैं. अंतिम निर्णय के ल‍िये कर्जदाताओं की समिति (COC) की आज ही बैठक होनी है.

ल‍िक्‍व‍िडेशन से 70 प्रत‍िशत कम की बोल‍ियां
सूत्रों के अनुसार बोलीदाताओं ने अब तक काफी कम कीमत की बोल‍ियां लगाई हैं. ऐसे में कंसलटेंट और कर्जदाताओं की समिति की समाधान प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग राय हैं. उनके पास ल‍िक्‍व‍िडेशन (liquidation) के लिये कदम उठाना या फिर चल रही बोली प्रक्रिया को जारी रखने का विकल्प है. इस मामले में रिलायंस कैपिटल ल‍िम‍िटेड (RCL) के प्रशासक वाई नागेश्वर राव के प्रोसेस कंसलटेंट (Process Consultant) डेलॉयट का कहना है क‍ि बोलियों का मूल्य ल‍िक्‍व‍िडेशन (Liquidation) का 13,000 करोड़ रुपये से 70 प्रतिशत कम है.

कर्ज देने वाली कंपन‍ियों की सम‍ित‍ि में एक राय नहीं
इस स्‍थ‍ित‍ि में रिलांयस कैपिटल ल‍िक्‍व‍िडेशन (Liquidation) के लिये जाती है तो इनसॉल्‍वेंसी और दिवाला संहिता (IBC) के तहत कंपनी को करीब 13,000 करोड़ रुपये मिलेंगे. दूसरी तरफ, सीओसी की सलाहकार केपीएमजी का कहना है कि उन्हें मौजूदा प्रक्रिया के साथ कदम बढ़ाकर सबसे ऊंची बोली को स्वीकार करनार चाह‍िए. सूत्रों का यह भी कहना है क‍ि दो प्रक्रिया सलाहकारों के बीच अलग-अलग राय के साथ कर्ज देने वाली कंपन‍ियों की सम‍ित‍ि में एक राय नहीं है.

LIC और EPFO के पास 35 प्रतिशत मतदान का अधिकार
सीओसी की कुछ सदस्‍य कंपन‍ियों का कहना है क‍ि ज्‍यादा बोली लगाने वाले की बोली फाइनल होनी चाह‍िए. वहीं कुछ का कहना है क‍ि ज्‍यादा राशि के लिये ई-नीलामी का विकल्प अपनाया जा सकता है. यह पूरी तरह पारदर्शी होगा. सूत्रों का यह भी कहना है क‍ि मतभेदों को दूर करने में एलआईसी (LIC) और ईपीएफओ (EPFO) की महत्वपूर्ण भूमिका है. नों के सीओसी में 35 प्रतिशत मतदान अधिकार हैं.

एलआईसी का बकाया 3,400 करोड़ रुपये
रिलांयस कैपिटल के ऊपर एलआईसी का बकाया 3,400 करोड़ रुपये है. वहीं, ईपीएफओ (EPFO) के 2,500 करोड़ रुपये बाकी हैं. इसी को देखते हुए मंगलवार यानी आज महत्वपूर्ण बैठक है. बैठक में हल न‍िकालने के ल‍िए सभी विकल्पों और सुझावों पर विचार किया जाएगा. रिलायंस कैपिटल के लिए 28 नवंबर की आख‍िरी तारीख तक चार बोलियां म‍िली हैं. कॉस्मिया फाइनेंशियल और पीरामल ने संयुक्त रूप से 5,231 करोड़ रुपये के साथ सबसे ऊंची बोली लगाई है. दूसरी तरफ स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं ने रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (आरसीएल) के ल‍िक्‍व‍िडेशन को 12,500 करोड़ से 13,200 करोड़ तक आंका है. (इनपुट भाषा से भी)

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