एक्सपर्ट के मुताबिक, इस वजह से क्रैश हुआ Boeing 737 Max

इथोपिया विमान हादसे में 157 लोगों की जान चली गई. पांच महीने पहले Lion Air विमान हादसे में 189 लोगों की जान चली गई थी.

एक्सपर्ट के मुताबिक, इस वजह से क्रैश हुआ Boeing 737 Max
भारत में बोइंग 737 Max8 के 17 विमान उड़ते हैं जिसमें से 12 विमानों को ग्राउंड किया गया है. (फाइल)

नई दिल्ली: इथोपिया विमान हादसे के बाद बोइंग की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. ब्रिटेन, चीन, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया, सींगापुर और अब भारत में भी SpiceJet ने 12 Boeing 737 Max को ग्राउंड कर दिया है. सोमवार से कंपनी की शेयर की कीमत 10.80 फीसदी तक गिर चुकी है. पिछले तीन दिनों में कंपनी का मार्केट वैल्यू करीब 26 बिलियन डॉलर कम हो गया है. पूरे विश्व में बोइंग के 350 737 Max विमान उड़ते हैं, जिसपर अब संकट मंडरा रहा है.

दरअसल पांच महीने पहले (29 अक्टूबर 2018) इंडोनेशिया के Lion Airlines का 737 Max विमान भी हादसे का शिकार हो गया था. उस हादसे में विमान में सवार सभी 189 लोगों की मौत हो गई थी. पांच महीने में बोइंग के दो विमानों के क्रैश करने से कंपनी के लिए संकट पैदा हो गया है.

'बोइंग 737 मैक्स का परिचालन रोकने का कोई आधार नहीं'

एविएशन एक्सपर्ट जीतेंद्र भार्गव ने कहा कि भारत में भी बोइंग के 17 737 Max विमान उड़ते हैं, जिसे चाहिए कि ग्राउंड कर दिया जाए. उन्होंने इस हादसे को लेकर टेक्नीकल पहलू पर बात की.  बता दें 737 Max में स्टालिंग की समस्या को रोकने के लिए MCAS (Maneuvering Characteristics Augmentation System) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. इसके बारे में ज्यादा जानने से पहले बता दें कि Lion Airlines हादसे के बाद नवंबर महीने में इंडोनेशिया की तरफ से जो शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आई उसके मुताबिक, पायलट एंटी-स्टॉलिंग सिस्टम (जिसे MCAS के रूप में देखा जाता है) को नहीं समझ पाए और इस दौरान विमान कुछ देर हवा में रही और आखिरकर हादसे का शिकार हो गई.

Stalling क्या होती है?
स्टालिंग का विमान के इंजन से कोई लेना देना नहीं है. हवा में विमान इसलिए उड़ पाता है क्योंकि लिफ्ट (विमान को उठाने वाली ताकत) ग्रैविटी (विमान को नीचे की ओर खीचती है) से ज्यादा होती है. लेकिन, स्टॉलिंग की स्थिति में लिफ्ट कम हो जाता और विमान गिरने लगता है. इसकी वजह होती है कि विमान का आगे का हिस्सा जरूरत से ज्यादा ऊपर उठ जाता है या नीचे झुक जाता है. इसे Angle of Attack भी कहते हैं. विमान गिरने की स्थिति में पायलट उसके नोज (आगे वाले हिस्से) को नीचे और ऊपर की ओर खींचते हैं जिससे कि बैलेंस बनाया जा सके.

क्या है MCAS टेक्नोलॉजी?
स्टॉलिंग की समस्या को दूर करने के लिए बोइंग ने 737 Max के सातवें और आठवें सीरीज विमानों में MCAS टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया. यह एक ऑटोमेटेड सिस्टम है जो स्टॉलिंग की समस्या को दूर करता है. आसान शब्दों में यह Angle of Attack का बैलेंस बिगड़ने पर खुद काम करता है. लेकिन, जिन पायलट को इसकी बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है उनके लिए यह स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है. क्योंकि, बैलेंस के दौरान लगने वाले झटके और Angle of Attack में बदलाव से उन्हें लगता है कि स्टॉलिंग हो रही है. ऐसे में MCAS टेक्नोलॉजी और पायलट दोनों एक ही काम को करने लगते हैं और स्थिति बिगड़ती चली जाती है.

इथोपिया विमान हादसे के बाद बोइंग के MCAS टेक्नोलॉजी को लेकर सवाल उठने लगे हैं. हालांकि, ऊपर जो कुछ कहा गया है यह एक्सपर्ट का नजरिया है. Lion Airlines और इथोपियन विमान हादसे को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक रिपोर्ट सामने नहीं है. ऐसे में हादसे की क्या वजह है, उसके लिए फाइनल रिपोर्ट का इंतजार करना होगा.