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कीमतों में कटौती से तेल कंपनियों का निकला तेल, धराशायी हुए HPCL और रिलायंस के शेयर

शेयर बाजार के लिए गुरुवार का दिन सुबह से ही गिरावट भरा था और शाम को वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती की घोषणा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए बिजली की तरह आई और उनके शेयरों में भारी गिरावट का रुख दिखाई दिया.

कीमतों में कटौती से तेल कंपनियों का निकला तेल, धराशायी हुए HPCL और रिलायंस के शेयर
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का मुनाफा घट सकता है.

नई दिल्ली: शेयर बाजार के लिए गुरुवार का दिन सुबह से ही गिरावट भरा था और शाम को वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती की घोषणा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए बिजली की तरह आई और उनके शेयरों में भारी गिरावट का रुख दिखाई दिया.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि सरकार पेट्रोल-डीजल पर 1.5 रुपए तक एक्साइज ड्यूटी कम करेगी. वहीं, तेल कंपनियां भी प्रति लीटर पेट्रोल-डीजल पर एक रुपये कम करेंगे. इसका मतलब है कि तेल कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ेगा और आने वाले दिनों में उनका घाटा भी बढ़ सकता है. बाजार को इस खबर का अंदाज सुबह से ही था और इस कारण इन कंपनियों के शेयर में गिरावट का रुख सुबह से ही देखने को मिल रहा था और ये खबर आते ही गिरावट बढ़ गई. 

कितनी गिरावट हुई
कारोबार खत्म होने पर एचपीसीएल के शेयर 12.23 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए, हालांकि दिन के कारोबार के दौरान इसमें 22 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली. इसी तरह इंडियन ऑयल के शेयर में 10.57 प्रतिशत, भारत पेट्रोलियम में 10.89 प्रतिशत और रिलायंस इंडस्ट्रीज में सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. भारत पेट्रोलियम के शेयर दिन के कारोबार के दौरान 16 प्रतिशत तक गिर गए थे, हालांकि बाद में इसमें थोड़ा सुधार हुआ.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दाम गुरुवार को 86 डॉलर प्रति बैरल के भाव को पार कर गए थे. इसके बाद जरूरी हो गया था कि सरकार आम लोगों के लिए राहत का कोई फैसला करे क्योंकि एक स्तर से अधिक पेट्रोल-डीजल की कीमत में इजाफा होने से अर्थव्यवस्था के सामने महंगाई की चुनौती बढ़ सकती थी.

रेग्युलेटेड कीमतों का दौर!
वित्त मंत्री द्वारा पट्रोल-डीजल की कीमतों में तेल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा एक रुपये प्रति लीटर की कटौती करने की घोषणा के साथ ही एक सवाल ये उठ गया है कि क्या हम एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की रेग्युलेटेड कीमतों के दौर में प्रवेश कर रहे हैं. अतीत में सरकार पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर सब्सिडी द्वारा नियंत्रण रखती थी, हालांकि पिछली यूपीए सरकार ने कीमतों को बाजार आधारित करने की पहल की और वर्तमान मोदी सरकार ने सब्सिडी को पूरी तरह खत्म करते इसे बाजार आधारित बना दिया.

इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों की प्रतिदिन समीक्षा करने का फैसला भी किया गया, ताकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को घाटा न उठाना पड़े. ऐसे में एक सवाल ये है कि प्रतिदिन कीमतों की समीक्षा को जारी रखा जाएगा या नहीं. क्योंकि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत तेजी से बढ़ती गई, तो आज की गई एक्साइज कटौती का कोई खास फायदा आम उपभोक्ताओं को नहीं मिल पाएगा.