रेलवे ने खोजी कोहरे की काट! इस Device से ट्रेनों की लेटलतीफी पर लगेगी लगाम

Indian railways: कोहरा अब ट्रेनों के पहिए नहीं थाम सकेगा, रेलवे ने एक ऐसी तरकीब और डिवाइस इजाद की है, जिसके इस्तेमाल से ट्रेनों की लेटलतीफी पर काफी हद तक लगाम लग सकती है. आप भी देखिए ये रोचक तरकीब

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Dec 26, 2020, 17:38 PM IST

नई दिल्ली: ठंड और कोहरे (Fog) की वजह से सबसे ज्यादा असर ट्रेनों की आवाजाही पर होता है. कई ट्रेनें कैंसिल हो जाती हैं तो बहुत सी घने कोहरे की वजह से घंटों लेट रहती हैं. कई सालों से भारतीय रेल कोहरे की काट खोजने में जुटी है. एक ऐसी ही कोशिश रेलवे ने की है, जिससे कोहरे से निपटने में काफी हद तक सफलता मिल सकती है.

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कोहरे के लिए खास डिवाइस लगेंगे

special devices to be deployed

ठंड और कोहरे को देखते हुए ट्रेनों में अब खास तरह के डिवाइस लगाए जाएंगे, जिनकी मदद से ट्रेन के ड्राइवरों को कम विजिबिलिटी में भी कोहरे से निपटने में आसानी होगी. उत्तर रेलवे (Northern Railways) के महाप्रबंधक (General Manager) आशुतोष गंगाल ने उस प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार की है, जिससे किसी स्टेशन पर कोहरे की स्थिति की घोषणा होती है.

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कोहरे की स्थिति जानने में मिलेगी मदद

fog situation to be declaired

उनके मुताबिक, रेलवे में कई विभाग कोहरे से पैदा हुई परिस्थितियों के लिए व्यवस्थाएं करते हैं. रेलवे स्टेशनों पर विजिबिलिटी चेक करने के लिए उपकरण लगाए जाते हैं. अगर तय दूरी पर रखी गई कोई चीज दिखाई नहीं दे रही है तो स्टेशन मास्टर इसे कोहरे घोषित करते हैं. जब वो चीज दिखाई दे जाती है तो कोहरे की स्थिति वापस ले ली जाती है.

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सिस्टम ऐसे करता है काम

visibility object

विजिबिलीटी टेस्ट ऑब्जेक्ट को स्टार्टर से 180 मीटर की दूरी पर रखा जाता है. अगर यह स्टेशन मास्टर को दिखाई नहीं देता है, तो कोहरे की स्थिति घोषित की जाती है. और कोहरे का संकेत दर्ज किया जाता है और उसका टाइम नोट किया जाता है. जब टेस्ट ऑब्जेक्ट दिखाई देने लगता है तो कोहरे की स्थिति को फिर से वापस ले लेते हैं

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ट्रेन ड्राइवर जरूरत के हिसाब से स्पीड घटा या बढ़ा सकता है

speed regulation of train

गंगाल ने बताया कि कोहरे के कारण चालक दल को सिग्नल देखने में दिक्कत हो सकती है. इसलिए फ़ॉग सेंसिंग उपकरणों को एक सिग्नल के अंतराल के बीच रखा गया है. सिग्नल लोकेशन बुकलेट भी चालक दल को दिए गए हैं ताकि वे सिग्नल के स्थान से अवगत हों. अगर यह दिखाई न दे, तो ड्राइवरों को ट्रेन की गति को जरूरत के हिसाब से घटाने बढ़ान में मदद मिलती है.