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PMC ही नहीं देश के ये सहकारी बैंक भी मुश्किल में फंसे, यहां पढ़ें पूरी लिस्ट

पीएमसी बैंक (PMC Bank) घोटाले के आरोपियों की हिरासत कोर्ट की तरफ से लगातार तीसरी बार बढ़ा दी गई है. बैंक घोटाले के आरोपी राकेश वाधवान, सारंग वाधवान और वरियम सिंह को 23 अक्टूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

PMC ही नहीं देश के ये सहकारी बैंक भी मुश्किल में फंसे, यहां पढ़ें पूरी लिस्ट

नई दिल्ली : पीएमसी बैंक (PMC Bank) घोटाले के आरोपियों की हिरासत कोर्ट की तरफ से लगातार तीसरी बार बढ़ा दी गई है. बैंक घोटाले के आरोपी राकेश वाधवान, सारंग वाधवान और वरियम सिंह को 23 अक्टूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. दूसरी तरफ किल्ला कोर्ट के बाहर विरोध कर रहे खाताधारकों को पुलिस वैन से कमिश्नर ऑफिस ले जाया गया, जहां पर पुलिस कमिश्नर और खाताधारकों के बीच बातचीत हुई.

मृतकों के लिए दो मिनट का मौन रखा
इससे पहले पीएमसी खाताधारकों ने किल्ला कोर्ट के बाहर 2 मिनट का मौन रखकर मृत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की. आपसे बता दें पीएमसी बैंक के दो खाताधारकों की हार्टअटैक से मौत हो गई थी. इसके बाद कोर्ट के बाहर इकट्ठा हुए खाताधारकों ने बैंक प्रबंधन के खिलाफ नारे लगाए और विरोध किया. प्रदर्शनकारियों ने अपने पैसे वापस किए जाने की मांग की.

आपको बता दें मुंबई के पीएमसी बैंक के अलावा भी देश के कई सहकारी बैंक भी मुश्किल में फंसे हुए हैं. साल 2017-19 के बीच जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार निम्मलिखित बैंक मुश्किल में फंसे हुए हैं.

मुश्किल में फंसे को-ऑपरेटिव बैंक
- PMC बैंक
- वसंदादा सहकारी नागरी सहकारी बैंक
- विट्टलराव विखे पाटिल सहकारी बैंक
- कराड़ जनता सहकारी बैंक
- शिवाजीराव निलांगेकर को-ऑपरेटिव बैंक
- मापुसा अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक
- CKP को-ऑपरेटिव बैंक
- भीमावरम अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक
- भारती को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक
- बिदार अर्बन महिला को-ऑपोरेटिव बैंक
- कपोल को-ऑपरेटिव बैंक
- मराठा सहकारी बैंक
- मुधोल को-ऑपरेटिव बैंक
- हिंदू को-ऑपरेटिव बैंक
- यूपी सिविल सेक्रेटेरियेएट प्राइमरी को-ऑपरेटिव बैंक
- इंडियन मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक
- भाग्योदय अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक
- युनाइटेड को-ऑपरेटिव बैंक
- कोलिकाता महिला को-ऑपरेटिव बैंक
- यूथ डेवलपमेंट को-ऑपरेटिव बैंक
- रुपी को-ऑपरेटिव बैंक
- अडूर को-ऑपरेटिव बैंक
- श्रीआनंद को-ऑपरेटिव बैंक
- शिवम सहकारी बैंक
(ये आंकड़े 2017-19 के बीच के ही हैं)

वित्त मंत्रालय को UCBs की खबर ही नहीं!
- वित्त मंत्रालय से UCBs (Urban Co-Operative Bank) की निगरानी नहीं की जाती
- मंत्रालय में UCBs को लेकर कोई सेल/सेक्शन ही नहीं
- UCBs के अहम रोल के बाद भी आज तक ध्यान नहीं
- को-ऑपरेटिव संगठनों की मांग पर अब विचार शुरु हुआ
- हर साल फेल हो रहे UCBs फिर भी कोई ध्यान नहीं
- 2004 में 1926 UCBs थे 2018 तक घटकर 1551
- UCBs का रेगुलेशन RBI और कृषि मंत्रालय के अधीन
- MSCS Act और बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के तहत कामकाज
- RBI UCBs के सुपरविजन और रेगुलेशन तक सीमित
- UCBs का मैनेजमेंट चेंज का अधिकार कृषि मंत्रालय को
- NBFC जैसा अंब्रेला ऑर्गनाइजेशन बनाने पर अब काम शुरु
- RBI का सुझाव UCBs खुद ब खुद स्मॉल फाइनेंस बैंक बनें

देश में UCBs की हैसियत
संख्या 1551
डिपॉजिट 4,56,500 करोड़ रुपये
कुल लोन 2,80,500 करोड़ रुपये
मुनाफा 4,000 करोड़ रुपये