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मौद्रिक नीति समीक्षा मंगलवार को, यथास्थिति कायम रख सकता है RBI

भारतीय रिजर्व बैंक मंगलवार को पेश होने वाली अपनी मौद्रिक नीति की द्विमासिक समीक्षा में ब्याज दरों में यथास्थिति कायम रख सकता है।

मौद्रिक नीति समीक्षा मंगलवार को, यथास्थिति कायम रख सकता है RBI

नई दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक मंगलवार को पेश होने वाली अपनी मौद्रिक नीति की द्विमासिक समीक्षा में ब्याज दरों में यथास्थिति कायम रख सकता है।

हालांकि, वित्त मंत्री व उद्योग जगत अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए ब्याज दरों में कटौती के लिए दबाव बना रहे हैं। ब्याज दरों में कटौती की मांग इसलिए भी तेजी से उठ रही है क्योंकि मुद्रास्फीति कई बरस के निचले स्तर पर आ गई है, जबकि कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया है।

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की चेयरपर्सन अरुंधति भट्टाचार्य ने कहा, तथ्य यह है कि सभी मानदंड इस ओर संकेत कर रहे हैं कि मुद्रास्फीति में और गिरावट आएगी। नवंबर से जनवरी के दौरान आधार प्रभाव की वजह से यह उपर जा सकती है। लेकिन मार्च तक यह रिजर्व बैंक के लक्ष्य से कम होगी। यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें दो दिसंबर की मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद है, भट्टाचार्य ने इससे इनकार किया।

यूनाइटेड बैंक आफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक दीपक नारंग का मानना है कि रिजर्व बैंक वृद्धि को प्रोत्साहन के लिए ब्याज दरों में कटौती को अभी कुछ समय और इंतजार करेगा। हालांकि, यस बैंक के सीईओ व प्रबंध निदेशक राणा कपूर का विचार है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में चौथाई फीसदी की कटौती कर सकता है। कपूर ने कहा कि रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति में हाल में आई कमी से राहत ले सकता है और ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की कटौती कर सकता है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले सप्ताह साक्षात्कार में उम्मीद जताई थी कि रिजर्व बैंक पूंजी की लागत को कम करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। मार्गन स्टेनली की रिपोर्ट में कहा गया है कि रिजर्व बैंक दो दिसंबर को ब्याज दरों नीतिगत दरों के मोर्चे पर यथास्थिति कायम रखेगा। हम इस बैठक में ब्याज दरों में कटौती को काफी कम संभावना दे रहे हैं।

घरेलू रेटिंग एजेंसी केयर रेटिंग्स ने भी इसी तरह की राय जताते हुए कहा कि रघुराम राजन अगले सप्ताह की मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों में यथास्थिति कायम रखेंगे। विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस सप्ताह ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा, लेकिन चालू वित्त वर्ष के अंत तक वह ब्याज दरों के मोर्चे पर कुछ राहत दे सकता है।