RBI ने यस बैंक के ग्राहकों से कहा-18 मार्च के बाद अंधाधुंध पैसा न निकालें, दिया ये आश्‍वासन

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को यस बैंक के जमाकर्ताओं को आश्वस्त किया कि उनकी गाढ़ी कमाई सुरक्षित है.

RBI ने यस बैंक के ग्राहकों से कहा-18 मार्च के बाद अंधाधुंध पैसा न निकालें, दिया ये आश्‍वासन

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को यस बैंक के जमाकर्ताओं को आश्वस्त किया कि उनकी गाढ़ी कमाई सुरक्षित है. उन्होंने यस बैंक की पुनर्गठन योजना को विश्वसनीय और टिकाऊ बताया. दास ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो केंद्रीय बैंक इस निजी बैंक में अतिरिक्त तरलता डालेगा. उन्होंने जमाकर्ताओं से कहा कि बुधवार (18 मार्च) को प्रतिबंध समाप्त होने के बाद अंधाधुंध निकासी न करें.

दास ने यस बैंक और कोरोनावायरस संकट पर यहां मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, "यह एक बहुत ही विश्वसनीय और टिकाऊ पुनर्गठन योजना है."

उन्होंने बैंक के पुनर्गठन को एक ऐतिहासिक घटना बताया, और कहा कि यह पहला उदाहरण है जब एक कमजोर और विफल बैंक का किसी मजबूत बैंक के साथ विलय नहीं किया गया, बल्कि इसके बदले आरबीआई ने इस बैंक का पुनर्गठन किया. उन्होंने कहा, "यह एक निजी क्षेत्र के बैंक को जिंदा करने के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) का भी एक उदाहरण है."

महाराष्ट्र सरकार ने निर्णय लिया है कि वह अपने खाते अब निजी क्षेत्र के बैंकों में नहीं रखेगा. इस संदर्भ में दास ने कहा कि आरबीआई ने सभी राज्य सरकारों को यह कहते हुए लिखा है कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर मजबूत और सुरक्षित है, जिसमें निजी बैंकिंग सेक्टर भी शामिल हैं.

उन्होंने कहा, "इस बात का कोई कारण नहीं है कि राज्य प्रशासन निजी बैंकों से दूरी बनाएं, जो कि बैंकिंग सेक्टर के महत्वपूर्ण घटक हैं."

सरकार शनिवार को नकदी संकट से जूझ रहे यस बैंक लिमिटेड के पुनर्गठन योजना को अधिसूचित किया, जिसके साथ ही बैंक को अपना कामकाज पूर्ण रूप से शुरू करने का रास्ता साफ हो गया. बैंक ने सोमवार को कहा कि बुधवार (18 मार्च) शाम छह बजे से कामकाज पूरी तरह शुरू हो जाएगा.

निजी बैंकों द्वारा यस बैंक में किए गए निवेश की राशि अबतक 3,950 करोड़ रुपये हो गई है. निजी बैंकों में आईसीआईसीआई बैंक और हाउसिंग डेवलपमेंट फायनेंस कॉरपोरेशन (एचडीएफसी) ने अलग-अलग 1000 करोड़ रुपये का वादा किया है. एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक ने क्रमश: 600 करोड़ रुपये और 500 करोड़ रुपये निवेश का वादा किया है. फेडरल बैंक और बंधन बैंक को उनके वादों के मुताबिक उन्हें अलग-अलग 300 करोड़ रुपये के शेयर आवंटित किए गए हैं. आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को यस बैंक में 250 करोड़ रुपये के शेयर जारी किए गए हैं.

इसके अलावा एसबीआई इस संकटग्रस्त बैंक में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी रखेगा और उसे 6,050 करोड़ रुपये कुल मूल्य के 605 शेयर आवंटित किए गए हैं. देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने वास्तव में 7,250 करोड़ रुपये का वादा किया है. गुरुवार को बैंक ने कहा कि उसके केंद्रीय बोर्ड की कार्यकारी समिति (ईसीसीबी) ने 10 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से यस बैंक में 725 करोड़ शेयर खरीदने की मंजूरी दे दी है.

आरबीआई ने पांच मार्च से यस बैंक को अपने नियंत्रण में ले लिया था और निकासी की सीमा महीने में 50 हजार रुपये तय कर दी थी. अधिसूचित योजना की शर्तो के अनुसार प्रतिबंध अब 18 मार्च को शाम छह बजे समाप्त हो जाएगा.
 
आरबीआई करेगी 2 अरब डॉलर की खरीद-बिक्री, रुपये में आएगी स्थिरता
 इसके साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने छह महीने तक दो अरब डॉलर की खरीद व बिक्री करने का फैसला लिया है, जिसका मकसद देश के विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में तरलता बनाए रखना और डॉलर की जरूरतों को आसान बनाना है. केंद्रीय बैंक ने इस बाबत का फैसला सोमवार को लिया. आरबीआई के इस कदम से डॉलर के मुकाबले देसी मुद्रा रुपये में जो अस्थिरता देखी जा रही है, उस पर लगाम लगेगी.

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि कई हिस्सों में नीलामी के जरिए डॉलर की खरीद-बिक्री (स्वाप) की जाएगी.

आरबीआई ने कहा कि कोरोना वायरस के प्रकोप और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में गिरावट के साथ-साथ विकसित देशों में बांड से होने वाली आय में गिरावट आने के कारण बढ़े जोखिम को कम करने के लिए दुनियाभर के वित्तीय बाजार में बिकवाली का भारी दबाव है.

आरबीआई ने कहा, "सभी परिसंपत्तियों में अस्थिरता बढ़ने के कारण उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बना हुआ है."

बीते सप्ताह छह मार्च को विदेशी पूंजी भंडार 487.24 अरब डॉलर था. आरबीआई ने कहा कि किसी संकट की स्थिति का सामना करने के लिए यह रकम पर्याप्त है.

(इनपुट: एजेंसी आईएएनएस)

 

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