जानिए कौन-सी पढ़ाई करके, आप भी बना सकते हैं वैक्सीन

एक स्टूडेंट्स के लिए यह सवाल सोचना लाजिम है कि आखिरी ये वैक्सीन कौन बनाता है? और वैक्सीन बनाने के लिए कौन-सी पढ़ाई करनी होती है?

जानिए कौन-सी पढ़ाई करके, आप भी बना सकते हैं वैक्सीन
फाइल फोटो

नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Coronavirus) ने पिछले दो सालों से पूरे विश्व में तबाई मचा रखी है. एक समय ऐसा भी था, जब पूरी दुनिया के पास कोई वैक्सीन नहीं थी, जो इस संक्रमण को रोक सके. लोग अपने घरों में बंद किसी खुशखबरी का इंतजार कर रहे थे. ऐसे में ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने कोरोना वायरस वैक्सीन बनाने की घोषणा की. धीरे-धीरे दुनिया के कई देश में अपनी-अपनी वैक्सीन लेकर आ गए. ऐसे में एक स्टूडेंट्स के लिए यह सवाल सोचना लाजिम है कि आखिरी ये वैक्सीन कौन बनाता है? और वैक्सीन बनाने के लिए कौन-सी पढ़ाई करनी होती है? आज हम आपको इन्हीं सवालों के जवाब दे रहे हैं. 

वायरोलॉजिस्ट (Virologist) करते हैं वायरस पर काम 
दरअसल, सबकी-सबकी अपनी अलग-अलग फील्ड होती है. ठीक ऐसी ही वायरस के ऊपर रिसर्च करने वालों को वायरोलॉजिस्ट कहते हैं. कोरोना वायरस ही नहीं बल्कि दुनिया भर के वायरोलॉजिस्ट Zika, SARS या Ebola जैसे वायरस के बारे में अध्ययन करते हैं. देखते हैं कि वायरस का व्यवहार क्या है. वो कैसे बढ़ता है. उसे रोकने के लिए क्या किया जाना चाहिए. ये सभी काम वायरोलॉजिस्ट ही करते हैं.  ऐसे में किसी भी वायरस की वैक्सीन को विकसीत करने में भी वायरोलॉजिस्ट का योगदान होता है. वही ये बताते हैं कि किसी वायरस को कैसे नियत्रिंत किया जाता है. 

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कितना है स्कोप? 
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में वायरोलॉजी के प्रोफेसर सुनित सिंह बताते हैं कि इस फील्ड में हमेशा से स्कोप रहा है. बात ये है कि आप कितना अच्छा काम करते हैं, ये एक व्यक्तिग रूप से निर्भर करता है. खास बात है कि स्कोप हमेशा रहेगी.  क्योंकि जब तक पृथ्वी पर मानव है, तब तक वायरस जनित बीमारियां खत्म नहीं होना वाली हैं. 

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कैसे बन सकते हैं वायरोलॉजिस्ट? 
वायरोलॉजी विषय मॉइक्रोबयोलॉजी (Microbiology) के अंदर आता है. इस विषय में अन्य जीवों की तुलना में, वायरस की अलग-अलग विशेषताओं (गुणा, संरचना, आदि के संबंध में) को पढ़ाया जाता है. यदि आप मॉइक्रोबयोलॉजी पढ़ाना चाहते हैं, तो इसकी शुरुआत 12वीं से करनी होगी. सांइस स्ट्रीम से 12वीं पास करना होगा. वहीं, ग्रेजुएशन में बीएसई में भी अन्य विषयों के साथ मॉइक्रोबयोलॉजी का अध्ययन किया जा सकता है. इसके अलावा MBBS, Biomedical Sciences और  Biotechnology के जरिए भी वायरोलॉजिस्ट की दुनिया में कमद रखा जा सकता है.

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हालांकि, मास्टर में आकर विषय और स्पेशफिक हो जाता है. यहां मेडिकल मॉइक्रोबयोलॉजी, मॉइक्रोबयोलॉजी, इम्यूनोलॉजी या वायरोलॉजी पढ़ी जा सकती है. साथ ही में पीएचडी में भी मॉइक्रोबयोलॉजी का चयन किया जा सकता है. या फिर वायरोलॉजी में भी पीएचडी किया जा सकता है. 

कहां से कर सकते हैं अध्ययन?
भारत में वायरलॉजी से संबंधित कई सस्थान हैं. जहां पर रिसर्च कराया जाता है. 
1.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पुणे
2.मणिपाल यूनिवर्सिटी, कर्नाटक
3.इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस बीएचयू, वाराणसी
4.सावित्री बाई फुले यूनिवर्सिटी, महाराष्ट्र
5. श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी, तिरुपति

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