मीना कुमारी से मिलने के बाद क्यों भर आई थीं धर्मेंद्र की आंखें?

पचास और साठ के दशक की टॉप एक्ट्रेस मीना कुमारी आज अगर होतीं तो अपना 88 वां जन्मदिन मना रही होतीं. ट्रेजिडी क्वीन के नाम से मशहूर मीना कुमारी का पैदाइशी नाम महजबीन था. बेहद गरीब परिवार में उनका जन्म हुआ था.

मीना कुमारी से मिलने के बाद क्यों भर आई थीं धर्मेंद्र की आंखें?
मीना कुमार (File Photo)

नई दिल्ली: पचास और साठ के दशक की टॉप एक्ट्रेस मीना कुमार आज अगर होतीं तो अपना 88 वां जन्मदिन मना रही होतीं. ट्रेजिडी क्वीन के नाम से मशहूर मीना कुमारी का पैदाइशी नाम महजबीन था. बेहद गरीब परिवार में मीना कुमारी (Meena Kumari) का जन्म हुआ था. उनके पिता मास्टर अली बख्श फिल्मों में छोटे-मोटे रोल कर गुजारा किया करते थे.

मीना कुमारी से पहले अली बख्श की दो बेटियां थीं. उन्हें और बेटियों की ख्वाहिश नहीं थी. अपनी बेटी को मास्टर एक अनाथालय के सामने छोड़ आए थे. उनका ध्यान नहीं गया कि जहां बच्ची को छोड़ा था,  वहां लाल चीटियों ने घर बनाया हुआ था. चीटियों के काटने से बच्ची रोने लगी, तब कहीं जा कर अली बख्श बेटी को वापस उठा लाए.

तंग हाली के चलते मास्टर ने अपनी तीनों बेटियों को बतौर बाल कलाकार काम पर लगा दिया था. जब पहली बार उस समय के सुपर स्टार अशोक कुमार ने मीना कुमारी को देखा, तो देखते ही कह दिया, यह लड़की एक दिन बहुत बड़ी अभिनेत्री बनेगी और मेरे साथ काम करेगी. ऐसा हुआ भी. अशोक कुमार और मीना कुमारी ने कई फिल्मों में बतौर हीरो-हीरोइन काम किया. मीना कुमारी की जिंदगी में हमेशा उथल-पुथल मची रहती थी.

जिन दिनों वे टॉप पर थीं, एक फिल्म में काम करने के दस हजार रुपए लेती थीं. जो उस समय के टॉप हीरोज भी नहीं लेते थे. उनके घर के आगे प्रोड्यूसरों की लाइन लगी रहती थी. मीना कुमारी ने लगभग नब्बे फिल्मों में काम किया था, पर अपने अंतिम दिनों में उनके पास ना पैसा था ना कोई साथी.

जहां किया भरोसा, वहीं मिला धोखा
मीना कुमारी ने अपनी जिंदगी में कई बार डूब कर इश्क किया. प्रोड्यूसर, डायरेक्टर और राइटर कमाल अमरोही के इश्क में मीना ऐसी दीवानी हुईं कि अपने हिटलर जैसे अब्बा हुजूर को नाराज कर बैठीं. शादी मीना कुमारी को रास ना आई. कुछ वक्त तक वो गुलजार के बहुत करीब रहीं. लेकिन आखिरकार उन्हें सुकून मिला अपने से कम उम्र के नए-नवेले एक्टर धर्मेंद्र के साथ.

धर्मेंद्र ने समझा था मीना का दर्द
धर्मेंद्र और मीना कुमारी ने 1965 में 'पूर्णिमा' फिल्म में साथ काम किया था. धर्मेंद्र की सादगी और खुशनुमा व्यक्तित्व से मीना कुमारी काफी प्रभावित हो गई थीं. उन दिनों मीना बुरे दौर से गुजर रही थीं. 'साहब, बीवी और गुलाम' फिल्म के बाद उन्हें शराब पीने की लत लग चुकी थी. वो अपने आशिकों से बुरी तरह टूट चुकी थीं. उनके पास ऐसा कोई साथी नहीं था, जो उनका दर्द बांटता. मीना कुमारी और धर्मेंद्र शूटिंग के बाद मेकअप रूम में साथ में रहते थे. मीना कुमारी धर्मेंद्र को अपनी नज्में पढ़ कर सुनाती थीं. जब भी धर्मेंद्र मीना जी के कमरे से बाहर आते उनकी आंखों में आंसू होते थे.

कहते हैं कि मीना कुमारी ने ही पंजाब के गांव से आए धर्मेंद्र को फिल्मी दुनिया के लिए रफ एंड टफ बनाया. मीना कुमारी ना होतीं तो धर्मेंद्र इंडस्ट्री में टिक ही नहीं पाते. मीना उन्हें धर्म बुलाती थीं और बहुत प्यार से उन्हें एक्टिंग के गुर सिखाती थीं. मीना कुमारी के गुजर जाने के बाद काफी दिनों तक धर्मेंद्र सदमे में रहे. उनके बीच जो रिश्ता बना था, वो अनकहा था, पर ना कहते हुए भी बहुत कुछ कह गया.

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