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फिल्म रिव्यू 'शुभ मंगल सावधान'- बोल्ड टॉपिक पर दमदार एक्टिंग

मर्द को कभी दर्द नहीं होता, लेकिन मर्द तो वह भी होता है जो न दर्द देता है और न किसी को देने देता है. आयुष्मान खुराना और भूमि पेडनेकर फिल्म 'शुभ मंगल सावधान' एक ऐसे विषय पर बनी फिल्म है, जिसके बारे में बात करते हुए भी हम हिचकिचाते हैं. 

फिल्म रिव्यू 'शुभ मंगल सावधान'- बोल्ड टॉपिक पर दमदार एक्टिंग
फिल्म का निर्देशन आरएस प्रसन्ना ने किया है (फिल्म पोस्टर)

नई दिल्ली: मर्द को कभी दर्द नहीं होता, लेकिन मर्द तो वह भी होता है जो न दर्द देता है और न किसी को देने देता है. आयुष्मान खुराना और भूमि पेडनेकर फिल्म 'शुभ मंगल सावधान' एक ऐसे विषय पर बनी फिल्म है, जिसके बारे में बात करते हुए भी हम हिचकिचाते हैं. 

यह भी पढ़ें- आयुष्मान खुराना और भूमि पेडनेकर के साथ काम कर खुश हैं आरएस प्रसन्ना

डायरेक्टरः आरएस प्रसन्ना
कलाकारः आयुष्मान खुराना, भूमि पेडणेकर, सीमा पाहवा और बृजेंद्र काला
रेटिंगः 3.5 स्टार

क्या है कहानी- 
फिल्म 'शुभ मंगल सावधान' दिल्ली में रहने वाले मुदित शर्मा (आयुष्मान खुराना) की कहानी है. उसे वहीं की रहने वाली लड़की सुगंधा (भूमि पेडनेकर) से प्यार हो जाता है. दोनों एक दूसरे के करीब आते हैं. और शादी करके हमेशा के लिए एक हो जाने का तय करते हैं. एक दिन सुगंधा के माता-पिता को किसी काम से घर के बाहर जाना पड़ता है. मुदित किसी बहाने से सुगंधा के घर आता है और दोनों शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करते हैं. तभी पता चलता है मुदित को सेक्सुअल प्रॉब्लम है. वह सेक्स नहीं कर पाता. इस बात से वह परेशान हो जाता है, और तमाम उत्तेजक फिल्में देख डालता है और इसी चक्कर में कई बाबाओं के पास भी पैसे लुटा आता है. जैसे ही यह खबर सुगंधा के परिवार में पता चलती है वह इस शादी के खिलाफ हो जाते हैं, लेकिन कहते हैं न यह जो इश्क है उसका रंग इतनी जल्दी नहीं उतरता. मुदित सुगंधा से किसी भी कीमत पर शादी करना चाहता है. सुगंधा भी उसका साथ देती है, लेकिन दोनों के घरवाले और रिश्तेदार हर बात में टांग अड़ाने के लिए काफी होते हैं. दोनों के बीच लड़ाई होती है. नोक-झोंक होती है. फिर क्या होता है यह बताकर हम आपके फिल्म देखने का किरकिरा नहीं करेंगे. 

कैसा है अभिनय- 
मुदित के रोल में आयुष्मान खुराना ने कमाल की एक्टिंग की है. एक दम नैचुरल. बिना किसी लाग-लपेट के. आयुष्मान में यह खास बात है कि वह देसी अंदाज में बहुत ही जल्दी रंग जाते है. फिल्म ‘विक्की डोनर’, ‘दम लगा के हईशा’ इसका एक अच्छा उदाहरण हैं. जहां तक भूमि पेडणेकर की बात है तो उन्हें आप पहली फिल्म से ही देसी अंदाज में देखते आ रहे हैं. भूमि ने एक इंटरव्यू में कहा था, वह चाहती हैं कि अच्छी फिल्में करें, खासकर ऐसी फिल्में जो महिलाओं के लिए विशेष संदेश देती हों. ‘दम लगा के हईशा’, ‘टॉयलेटः एक प्रेम कथा’ से ही आप उनके अभिनय का अंदाजा लगा सकते हैं. फिल्म के सभी किरदार अपने अंदाज में पूरी तरह जमे हैं. खासकर बृजेंद्र काला और सीमा पाहवा का किरदार भी गुदगुदाने वाला और काबिले तारीफ है.

कुछ खास बातें-
'शुभ मंगल सावधान' 2013 में आई तमिल फिल्म कल्याण समायल साधम् की हिंदी रीमेक है. इसके तमिल वर्जन के डायरेक्टर आर. एस. प्रसन्ना ही थे. फिल्म के राइटर हितेश केवलय ने ऐसे मनोरंजक डायलॉग लिखे हैं, जो थियटर में दर्शकों को पेट पकड़कर हंसने पर मजबूर देते हैं. फिल्म में एक और जरूरी बात है, वो है शादी से पहले सेक्स. जैसा कि फिल्म में दिखाया गया है. आयुष्मान ने एक इंटरव्यू में बताया कि वे शादी से पहले सेक्स को गलत नहीं मानते. उनका मानना है पानी में कूदने से पहले ये जांच कर लेनी चाहिए पानी कितना गहरा है. शादी किसी की भी जिंदगी का एक अहम पहलू होता है. उसे आप हल्के में नहीं ले सकते. फिल्म एक कॉमेडी अंदाज में है, दर्शक पसंद करेंगे.

(पूजा बत्रा)

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