गर्भवती महिला से बच्चे में ट्रांसफर होती है कोरोना वायरस एंटीबॉडीज: स्टडी

कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद शरीर में जो एंटीबॉडीज बनती हैं वह प्रेगनेंसी के दौरान ही गर्भवती महिला से बच्चे में ट्रांसफर हो जाती है. एक नई स्टडी में यह बात सामने आयी है.

गर्भवती महिला से बच्चे में ट्रांसफर होती है कोरोना वायरस एंटीबॉडीज: स्टडी
मां से बच्चे में आती है एंटीबॉडीज

नई दिल्ली: कोरोना वायरस महामारी के समय सबसे अधिक चिंता गर्भवती महिलाओं को लेकर है क्योंकि अगर उन्हें कोविड-19 (Covid-19) संक्रमण होता है तो उनके गर्भ में पल रहे बच्चे के भी संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है. लिहाजा प्रेग्नेंट लेडीज के मन में अक्सर एक सवाल जरूर आता होगा कि कोरोना से संक्रमित होने के बाद उनके शरीर में बनने वाली एंटीबॉडीज जो कोविड-19 इंफेक्शन के खिलाफ सुरक्षा देती है क्या वह मां से गर्भ में पल रहे बच्चे तक भी पहुंचती हैं? तो इसका जवाब है- हां.

मां से बच्चे में ट्रांसफर होती हैं एंटीबॉडीज

अमेरिकन जर्नल ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गाइनैकोलॉजी में प्रकाशित एक स्टडी में बताया गया है कि एंटीबॉडीज (Antibodies) जो कोविड-19 इंफेक्शन के खिलाफ सुरक्षा देती हैं वह गर्भ में रहते हुए ही मां से बच्चे में ट्रांसफर हो जाती हैं. इस खोज से इस बात के पुख्ता सबूत मिलते हैं कि गर्भवती महिलाएं (Pregnant Ladies) जिनके शरीर में कोरोना वायरस संक्रमण के बाद सुरक्षात्मक एंटीबॉडीज बनते हैं, वे उसे नैचरल इम्यूनिटी के तौर पर अपने बच्चे को भी ट्रांसफर करती हैं. ऐसे में स्टडी के नतीजों से इस बात को भी बल मिलता है कि अगर गर्भवती महिला को कोविड का टीका (Vaccination) लगाया जाए तो यह नवजात शिशु के लिए भी फायदेमंद हो सकता है.

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टीके की एंटीबॉडी भी बच्चे तक पहुंचने की संभावना है

अमेरिका के न्यू यॉर्क स्थित वील कॉर्नेल मेडिसिन में पैथोलॉजी और लैबोरेट्री मेडिसिन की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ यावे जेनी यांग और इस स्टडी की सीनियर ऑथर कहती हैं, 'चूंकि अब हम विश्वास के साथ कह सकते हैं कि गर्भवती महिलाएं कोविड-19 के खिलाफ जिस एंटीबॉडी का निर्माण करती हैं वह गर्भ में पल रहे उनके शिशु तक पहुंचता है, इसलिए हमें ऐसा लगता है कि इस बात की भी संभावना अधिक होगी कि शरीर को टीका लगाने के बाद बनने वाले एंटीबॉडी भी मां से बच्चे तक पहुंचेंगे.' 

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88 गर्भवती महिलाओं के ब्लड सैंपल की जांच की गई

बीते साल मार्च से मई 2020 के बीच डॉ यांग और उनकी टीम ने न्यूयॉर्क के वील कॉर्नेल मेडिकल सेंटर में बच्चे को जन्म देने वाली 88 गर्भवती महिलाओं के ब्लड सैंपल की जांच की. सभी महिलाओं के खून में कोविड-19 एंटीबॉडीज थे जो इस बात का संकेत है कि वे सभी किसी न किसी रूप में वायरस से संक्रमित हुई थीं, हालांकि 58 प्रतिशत महिलाओं में कोविड-19 के एक भी लक्षण नहीं थे. इसके अलावा गर्भवती महिलाओं में एंटीबॉडी की जो प्रतिक्रिया थी उसका पैटर्न ठीक वैसा ही था जैसा कि सामान्य मरीजों में होता है. इससे भी इस बात की पुष्टि होती है कि गर्भवती महिलाओं में कोरोना वायरस के खिलाफ वैसा ही इम्यून रिस्पॉन्स बनता है, जैसा आम लोगों में. 

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स्टडी में शामिल महिलाओं के बच्चों में से 78 प्रतिशत बच्चे ऐसे थे जिनके गर्भनाल के खून (Umbilical Cord) में एंटीबॉडीज मौजूद थे. यह डेटा बताता है कि गर्भवती महिलाएं वैक्सीन से बनने वाली एंटीबॉडीज को भी नवजात शिशु में उसी तरह से ट्रांसफर करेंगी जैसे कोविड-19 एंटीबॉडीज को. ऐसा होने पर संभावित रूप से भविष्य के संक्रमण से मां और बच्चे दोनों को बचाया जा सकता है. हालांकि, यह अभी तक ये ठीक से पता नहीं है कि ये एंटीबॉडी कितने सुरक्षात्मक हैं, या कितने लंबे समय तक सुरक्षा दे सकते हैं.

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