कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस में तेज हुआ घमासान, पार्टी ने बताई सीएम पद से हटाने की वजह
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कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस में तेज हुआ घमासान, पार्टी ने बताई सीएम पद से हटाने की वजह

कांग्रेस ने आखिरकार ये बता ही दिया कि अमरिंदर सिंह को पंजाब के मुख्यमंत्री के पद से क्यों हटाया गया. जवाब सुन कैप्टन ने भी पार्टी हाईकमान पर पलटवार किया है.

कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस में तेज हुआ घमासान, पार्टी ने बताई सीएम पद से हटाने की वजह

नई दिल्ली: पंजाब (Punjab) में सियासी संग्राम जारी है. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) ने शनिवार को दावा किया कि अमरिंदर सिंह को पंजाब के मुख्यमंत्री पद से पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने नहीं हटाया बल्कि कांग्रेस के 78 विधायक उन्हें हटाना चाहते थे. सुरजेवाला का बयान ऐसे समय आया है जब अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद पार्टी नेतृव पर उन्हें अपमानित करने का आरोप लगाया है.

'सीएम नहीं बदलते तो इसे तानाशाही कहते'

सुरजेवाला ने कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस करते हुए कहा, 'जब कोई मुख्यमंत्री अपने सभी विधायकों का विश्वास खो देता है तो उसे अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. 79 में से 78 विधायकों ने कांग्रेस हाईकमान को लिखा था कि सीएम को बदल देना चाहिए. अगर हम सीएम नहीं बदलते तो इसे तानाशाही कहते. एक तरफ 78 विधायक और एक तरफ अकेला मुख्यमंत्री. सोनिया गांधी कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष हैं और पंजाब में मुख्यमंत्री बदलने का फैसला उन्होंने नहीं लिया. जैसा कि मैंने आपको बताया, 78 विधायकों ने पत्र लिखा था और उसके बाद हमने मुख्यमंत्री को बदल दिया.'

'चन्नी को सीएम बनाकर पेश की मिसाल'

रणदीप सुरजेवाला ने आगे कहा कि कांग्रेस ने पंजाब में अनुसूचित जाति वर्ग के बेटे चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) को मुख्यमंत्री बनाकर मिसाल पेश की है. बीजेपी 15 राज्यों में सत्ता पर काबिज है, उसने एक भी अनुसूचित जाति वर्ग को मुख्यमंत्री बनाया है. जब कांग्रेस ने नजीर पेश की है तो भाजपा को दिक्कत क्यों हो रही है.

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किया पलटवार

वहीं, सुरजेवाला के बयान पर पलटवार करते हुए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Capt Amarinder Singh) ने कहा, 'मैंने 2017 के बाद से पंजाब में हर चुनाव जीता है. यह वे लोग नहीं थे जिन्होंने मुझ पर से विश्वास खो दिया था. पूरे मामले की साजिश नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) और उनके सहयोगियों ने की थी. न जाने क्यों उन्हें अब भी हुक्म चलाने की इजाजत दे रहे हैं.'

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