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मुख्‍यमंत्री जनता तय करे, मैं तो उनके जुड़ने आया हूं: आदित्‍य ठाकरे

आदित्‍य ठाकरे ने कहा कि यात्रा का माहौल देखकर लगता नहीं कि हमारे बीच बाला साहब ठाकरे नहीं हैं. मुझे सभी लोगों में बाला साहब ठाकरे नजर आ रहे हैं. 

मुख्‍यमंत्री जनता तय करे, मैं तो उनके जुड़ने आया हूं: आदित्‍य ठाकरे
आदित्‍य ठाकरे ने कहा है कि जनआशिर्वाद यात्रा मेरे लिए तीर्थ यात्रा की तरह है. मुझे लोगों ने पहले भी आशिर्वाद दिए हैं, एक बार फिर मैं वही आशिर्वाद लेने आया हूं. (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली: महाराष्‍ट्र में जनआशिर्वाद यात्रा पर निकले शिवसेना के युवा प्रमुख आदित्‍य ठाकरे से जब पूछा गया कि क्‍या वे मुख्‍यमंत्री बनना चाहते हैं. इस सवाल के जवाब में उन्‍होंने कहा कि यह जनता की इच्‍छा होनी चाहिए. मेरी कोशिश है कि मैं जनता से जुड़ सकूं. मैं जनआशिर्वाद यात्रा के जरिए जानना चाहता हूं कि जनता की ख्‍वाहिशें क्‍या हैं. वहीं मैं समझने की कोशिश कर रहा हूं. 

जी मीडिया संवाददाता कृष्णात पाटिल से बातचीत में उन्‍होंने कहा कि जनआशिर्वाद यात्रा मेरे लिए तीर्थ यात्रा की तरह है. मुझे लोगों ने पहले भी आशिर्वाद दिए हैं, एक बार फिर मैं वही आशिर्वाद लेने आया हूं. उन्‍होंने कहा कि यह न ही अभी कोई चुनाव है और न ही मैं किसी चुनाव प्रचार में आया हूं. लोगों ने पिछले पांच साल हमारा समर्थन किया है, इस लोकसभा चुनाव में भी जनता में हमारा पूरा साथ दिया है. 

बीजेपी की विकास यात्रा को लेकर आदित्‍य ठाकरे ने कहा कि हम दोनों पार्टियां अभी महाराष्ट्र को भगवा करने के लिए निकले हैं. हम साथ में चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन जो हमारे इलाके हैं, वहां के लोगों से जुड़ना भी जरूरी है. हमने पांच सालों में जाम किए हैं, उन्‍हें जनता को बताना है. उन्‍होंने कहा कि शिवसेना सत्ता में हो, या फिर ना हो, हमने हमेशा जनता की आवाज बुलंद किया है. 

सीएम पद की उम्‍मीदवारी को लेकर उन्‍होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह सिर्फ दूर की बातें हैं. यह चीजें मेरे हाथों में नहीं हैं. मेरे हाथों में सिर्फ यही है कि जो हमने जनता को वचन दिए हैं, उन्‍हें प्राथमिकता के साथ पूरे करने हैं. बालासाहब ठाकरे को याद करते हुए उन्‍होंने कहा कि जब मैं मैं महाराष्ट्र की यात्रा पर निकला तो उनकी याद आ गई. 

उन्‍होंने कहा कि जब बाला साहेब ठाकरे दौरे पर निकलते थे, तब एक माहौल बनता था, उन्‍हें लोगों का भरपूर प्‍यार मिलता था. अगर इस यात्रा के माहौल को देखें तो लगता नहीं कि वह हमारे बीच नहीं हैं. यहां सभी लोगों में मुझे बाला साहेब दिख रहे हैं.