रेल यात्री ध्यान दें, आपके साथ हो रहा है 'धोखा', सफर से पहले जरूर जानिए ये बात

राजधानी के नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से शुक्रवार को अवैध पानी की एक बड़ी खेप पकड़ी गई है. ये पानी वैशाली एक्सप्रेस ट्रेन से उतारा गया. पकड़ा गया पानी तीन अलग - अलग लोकल ब्रांड का था.

रेल यात्री ध्यान दें, आपके साथ हो रहा है 'धोखा', सफर से पहले जरूर जानिए ये बात
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नम्बर छह पर वैशाली एक्सप्रेस से पकड़ी गई पानी की अवैध खेप (फाइल फोटो)

नई दिल्ली : राजधानी के नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से शुक्रवार को अवैध पानी की एक बड़ी खेप पकड़ी गई है. ये पानी वैशाली एक्सप्रेस ट्रेन से उतारा गया. पकड़ा गया पानी तीन अलग - अलग लोकल ब्रांड का था. रेलवे के नियमों के अनुसार रेलगाड़ियों व स्टेशन परिसर में सिर्फ रेल नीर बेचने की ही अनुमति है. क्योंकि रेल नीर में ठेकेदारों को कमीशन कम मिलता है ऐसे में मोटे मुनाफे के लीए वे रेलवे परिसर में अवैध तौर पर लोकल ब्रांड के पानी ला कर बेचते हैं. 

लोकल पानी में है मोटा मुनाफा 
रेलवे स्टेशन हो या रेलगाड़ियां रेलवे के नियमों के तहत सभी जगहों पर रेल नीर ही बेचना अनिवार्य है. रेलवे ने इस पानी की कीमत भी 15 रुपये निर्धारित कर रखी है. किसी रेलगाड़ी में पैंट्रीकार वाले को रेल नीर बेचने पर लगभग तीन रुपये बचते हैं. ऐसे में अधिक मुनाफे के लिए ठेकेदार लोकल पानी अवैध तौर पर बेचते हैं. शुक्रवार को वैशाली एक्सप्रेस की जांच के दौरान दिल्ली मंडल के सीनियर डीसीएम की ओर से बनाए गए विशेष दस्ते में शामिल टीटी रमेश कुमार व सतीश सिंह ने लगभग 100 पेटी अवैध पानी पकड़ा. इन पेटियों में लगभग 1200 बोतल पानी था. लोकल ब्रांड होने के बावजूद इन बोतलों पर 18 व 20 रुपये एमआरपी थी. सूत्रों के अनुसार इस अवैध पानी को बेचने पर ठेकेदारों को 10 से 12 रुपये बचते हैं.

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यात्रियों के स्वास्थ्य से कर रहे खिलवाड
ठेकेदार मुनाफे के चक्कर में यात्रियों के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ कर रहे हैं. रेल नीर रेलवे की ओर से अधिकृत विशेष प्लांटो में बनता है. यहां पानी की गुणवत्ता की नीयमित जांच होती है. वहीं लोकल पानी विभिन्न शहरों में लगी छोटी मोटी प्लांटों में बनता है. इस पानी की क्या गुणवत्ता होती है इसका कहीं कोई रिकॉर्ड नहीं होता. यदि किसी ठेकेदार को रेल नीर उपलब्ध नहीं हो पाता तो उसे कौन से पानी यात्रियों को देना होगा उसकी भी सूची निर्धारित है. लेकिन ठेकेदार मुनाफे के चक्कर में अवैध पानी बेचते हैं. 

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रेलवे को होती है राजस्व की हानि 
मोटे मुनाफे के चक्कर में ठेकेदार रेल नीर की बजाए लोकल पानी बेचना पसंद करते हैं. ऐसे में रेलनीर की मांग घट जाती है जिससे रेलवे को राजस्व की हानि होती है. पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में रेलवे की ओर से चलाए गए अभियान के चलते रेल नीर की मांग में भी इजाफा देखा गया है. सूत्रों के अनुसार पिछले एक महीने में दिल्ली में रेल नीर की दो हजार पेटी से अधिक की मांग बढ़ी है. 

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सभी स्टशनों पर पकड़ा जा रहा लोकल पानी 
मोटे मुनाफे के लिए ठेकेदार दिल्ली के सभी स्टेशनों पर लोकल पानी का कारोबार कर रहे हैं. पिछले कुछ दिनों से दिल्ली मंडल के सीनियर डीसीएम की ओर से बनाए गए टीटियों के विशेष दस्ते की ओर से चलाए गए अभियान में अब तक हजारों बोतल अवैध पानी पकड़ा जा चुका है. सिर्फ नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर ही लगभग तीन हजार पेटी से अधिक पानी पकड़ा जा चुका है. रेलवे के दिल्ली मंडल के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इन अवैध तरीके से पानी बेचने वालों के खिलाफ जल्द ही बड़ी कार्रवाई की जाएगी.