हिसार: पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो रही हाड़तोड़ सर्दी

हिसार के ढंढूर गांव में बने गौ अभ्यारण केंद्र में पशुओं के हाल का भी हमने मुआयना किया. मौके पर ​एक शैड वाले बड़े हाल जिसे पशुओं के लिए आईसीयू का नाम दिया गया था, वहां बेजुबान सर्दी के इस सितम को कैसे झेल रहे थे.

हिसार: पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो रही हाड़तोड़ सर्दी
हिसार के गौ अभ्यारण सेंटर में मौजूद गायें.

हिसार: हरियाणा में इन दिनों हाडतोड़ सर्दी है. सर्दी के सितम से आमजन के साथ-साथ पशुओं के लिए भी परेशानी खड़ी हो गई है. हिसार में करोड़ों की लागत से गौ अभ्यारण बनाया गया, मकसद था आवारा पशुओं से शहर को​ निजात दिलाना और सड़कों इन पशुओं से होने वाले हादसो पर अंकुश लगाना, हिसार में इसे नगर निगम विभाग की लापरवाही कह लिजिए या फिर पशुओं की बदकिस्मती, गौ अभ्यारण सेंटर में रोजाना पशुओं की मौत हो रही है. 

2016 में तत्कालीन कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने गौ अभ्यारण का उद्घाटन किया था. जिस उद्देश्य को लेकर हिसार में गौ अभ्यारण का आगाज किया गया था, वो दोनों ही उद्देश्य पूरे नहीं हो पाए. ना तो आवारा पशुओं से नेशनल हाइवे या फिर हिसार सिटी को निजात मिली और ना ही इन गौवंश को वैसा सहारा मिला, जैसा मिलना चाहिए था. सर्दी की मार इन बेजुबानों पर ऐसी पड़ रही है, कि इन्हें अपनी जान से हाथ गंवाना पड़ रहा है. 

हिसार के ढंढूर गांव में बने गौ अभ्यारण केंद्र में पशुओं के हाल का भी हमने मुआयना किया. मौके पर ​एक शैड वाले बड़े हाल जिसे पशुओं के लिए आईसीयू का नाम दिया गया था, वहां बेजुबान सर्दी के इस सितम को कैसे झेल रहे थे. पूरे केंद्र में 2500 के करीब गौवंश है, लेकिन सर्दी से बचाव के लिए जैसे इंतजाम होने चाहिए, वहां वैसे नजर नहीं आ रहे है. हालांकि राहत पहुंचाने के लिए पर्दे जरूर नजर आएं, लेकिन जितनी संख्या में पशुओं की तादाद थी, वैसी व्यवस्था दिखी नहीं.

आईसीयू में रैलियों के फलैक्स नजर आए
सेंटर में बने आईसीयू के आप हालात देखेंगे, तो हैरान रह जाएंगे. रैलियों में लगने वाले पोस्टर्स के सहारे शीत लहर को रोकने का प्रयाय किया जा रहा है. इनमें से भी कई जगहों से यह पोस्टर्स फटे हुए थे. मसलन शीतलहर सीधे अंदर दस्तक दे सकती थी. हालांकि कुछ शैड के चारों तरफ बड़े कपड़ों को बांधा गया था, दावा था कि रात के वक्त सभी गाये शैड के नीचे चली जाती है.

402 पशुओं की हो चुकी मौत
हिसार में गौ अभ्यारण को लेकर मिले डाटा की अगर बात करे तो हिसार के ढंढूर में बने गौ अभ्यारण सेंटर में 2045 गाय है, 410 नंदी है. इसी तरह धांसू में बने गौ अभ्यारण में 922 नंदी है. 30 नवंबर तक के डाटा की अगर बात करे तो 402 पशुओं की मौत हो गई है. लेकिन दिसंबर जिसमें भंयकर सर्दी पड़ रही है, इस महीने में आंकडे चौंकाने वाले है. अभी पिछले तीन दिनों में ही रोजाना एक दर्जन के करीब पशुओं की मौत हो रही है. सर्दी की मार से पशुओं की मौत की तस्दीक वहां मौजूद उन लोगों ने नाम ना छापने की शर्त पर कर दी, जो वहां मजदूरी का काम करते है. उन्होंने माना की सर्दी की वजह से हर रोज गौ अभ्यारण में पशुओं की मौत हो रही है.

हिसार में आज भी आवार घूमते नजर आते है पशु
प्रशासन ने जिस उद्देश्य को लेकर गौ अभ्यारण सेंटर की स्थापना की थी, उसका मुख्य मकसद यह था कि हिसार को आवारा पशुओं से मुक्ति मिल सके. साथ ही गौ वंश के हो रहे निरादर से छुटकारा मिल सके. लेकिन हैरानी देखिए, हिसार में आज भी गौवंश सड़कों पर भटकने के लिए मजबूर है, और पॉलिथीन खाकर अपना गुजर बसर करने को मजबूर है. इनका यह हाल देख ऐसा लगता है मानों करोड़ों रुपये की लागत और रोज का लाखों का बजट केवल और केवल दिखावा है.

अधिकारी बोले, इंतजाम पूरे हैं
उधर, इस मसले को लेकर हमने नगर निगम के चीफ सुपरीटेंडिंग इंजीनियर रामजीलाल से भी बातचीत की. उन्होंने इस मसले को लेकर कहा कि रोजाना 2 से 3 की ही पशुओं के मरने की एवरेज है, लेकिन उन्होंने जोड़ा कि मौत सर्दी से नहीं बीमार और पॉलिथीन खाने वाले पशुओं से हो रही है.  उन्होंने कहा कि दानी सज्जनों का सहयोग लिया जा रहा है, पशुओं केा किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होने दी जा रही. साथ ही अधिकारी ने बिना तथ्य के ही कह दिया कि पशुओं वाले आईसीयू में ठंड से रोकने के लिए कोई पोस्टर्स नहीं लगे, जनाब फोटो तक दिखाने का दावा करने लगे.

मसलन, मुद्दा यह है कि एक तरफ तो जहां गौवंश की सुरक्षा के लिए सरकार कानून बना चुकी है. लेकिन दूसरी तरफ सर्दी से ही प्रशासन इस गौवंश को नहीं बचा पा रहा, ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या धरातल पर भी वैसा असर दिखेगा जैसा दावे किए जाते रहते है.

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