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ZEE जानकारी: रोडरेज की घटनाएं आधुनिक भारत की महामारी!

सर्वे में शामिल 16 प्रतिशत लोगों ने माना है कि वो वाहन चलाते हुए इतने तनाव में चले जाते हैं कि वो दूसरे वाहन चालकों और पलिस वालों से भी लड़ने लगते हैं.

ZEE जानकारी: रोडरेज की घटनाएं आधुनिक भारत की महामारी!

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच जो युद्ध शुरु हुआ उसकी जड़ में एक पार्किंग विवाद था . पार्किंग को लेकर होने वाले लड़ाई झगड़े और रोडरेज की घटनाएं आधुनिक भारत की महामारी बन गई हैं . हाल ही में किए गए एक सर्वे के मुताबिक देश के मेट्रो शहरों में वाहन चलाने वाले 56 प्रतिशत लोगों की स्थिति ऐसी है ..कि वो कभी भी रोडरेज की घटना को अंजाम दे सकते हैं . जबकि सर्वे में शामिल 16 प्रतिशत लोगों ने माना है कि वो वाहन चलाते हुए इतने तनाव में चले जाते हैं कि वो दूसरे वाहन चालकों और पलिस वालों से भी लड़ने लगते हैं . जबकि 20 प्रतिशत लोगों का कहना है कि ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या उनके गुस्से की सबसे बड़ी वजह है .

यानी ये दोनों समस्याएं देश के लोगों की रगों में एक वायरस की तरह समा चुकी हैं और धीरे धीरे ऐसे सामाजिक जहर में बदल रही है जो लोगों को आपस में लड़ने पर मजबूर कर रहा है . इसलिए अगर पार्किंग और ट्रैफिक की समस्या को वक्त रहते हल नहीं किया गया तो रोडरेज (Road Rage) की घटनाएं जल्द ही दंगों में बदल जाएगी .

इसी साल जून में दिल्ली में एक ऐसी ही घटना सामने आई थी..जिस में एक सिख टैंपो चालक ने पुलिस वाले पर तलवार से हमला कर दिया था . आरोपों के मुताबिक पुलिस वाले के वाहन और टैंपो के बीच टक्कर हो गई थी . जिसके बाद दोनों के बीच हाथापाई हुई और ये हाथापाई खूनी संघर्ष में बदल गई . इसके बाद सिख समुदाय ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन किए थे और आरोपी पुलिसकर्मी के पर कार्रवाई की मांग की थी . लेकिन इन घटनाओं से हमें ये सबक मिलता है कि हमारे देश नें भीड़ कभी भी हिंसा पर उतारू हो सकती है.

बस इस भीड़ को एक बहाना चाहिए . बहाना चाहे धर्म के आधार पर हमले का हो या फिर पुलिस वालों के खिलाफ गुस्सा निकालने का . हड़ताल के दौरान टैक्सी वाले तोड़फोड़ करते हैं . वकील... पुलिसवालों और आम लोगों की पिटाई करते हैं . डॉक्टर्स मरीज़ों के परिवारवालों पर हमला करते हैं और आम लोग सिस्टम के खिलाफ गुस्से का इज़हार हिंसा के ज़रिए करते हैं . हमारे देश में हिंसा का ये दौर यूं ही चलता रहता है और कुछ लोग हिंसा की इन घटनाओं के बहाने देश को धर्म और जाति के नाम पर बांटने लगते हैं.