DNA ANALYSIS: मीडिया को धमकाने वाली 'कट्टरपंथी सोच' का DNA टेस्ट

पूरी दुनिया की ताकत इस बात पर लगी है कि कोरोना के संक्रमण को कैसे रोका जाए. कैसे इस वायरस को खत्म करने की दवा तैयार की जाए? कैसे लाखों लोगों को मौत से बचाया जाए? कैसे इस वायरस से इंसानियत को बचाया जाए? लेकिन भारत में एक विचारधारा ऐसी है, जिसका इस विचारधारा पर ज़ोर है कि कैसे कोरोना वायरस को फैलाया जाए? 

DNA ANALYSIS: मीडिया को धमकाने वाली 'कट्टरपंथी सोच' का DNA टेस्ट

नफरत और जहर फैलाने वालों ने पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के मामले में भारत का ट्रैक रिकॉर्ड खराब कर दिया है. तबलीगी जमात की वजह से भारत में कोरोना वायरस के मामले अब बहुत तेज़ी से बढ़ रहे हैं. ताज़ा अपडेट ये है कि भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 4544 हो गई है. भारत में इस वायरस से मौत का आंकड़ा 100 के पार हो गया है. भारत में कोरोना वायरस से मरने वालों की कुल संख्या 129 हो गई है जबकि 324 लोग अब तक ठीक हो चुके हैं. संक्रमण के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है, जहां कुल 868 लोग अब तक संक्रमित हो चुके हैं. 

यहां हम आपको ये भी बता दें कि ये आंकड़े देश के अलग-अलग राज्यों में मौजूद Zee News के रिपोर्टर्स द्वारा दिए गए हैं जबकि स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े इससे थोड़े अलग हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक भारत में संक्रमित लोगों की संख्या 4281 हैं और 111 लोगों की मौत हो चुकी है. आंकड़ों में ये अंतर इसलिए है क्योंकि कई बार राज्य सरकारों से आंकड़े केंद्र तक पहुंचने में कुछ समय लगता है. और ये एक ऐसी महामारी है जिसके आंकड़े लगातार बदल रहे हैं.

स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत में पिछले 24 घंटों में संक्रमण के मामलों में सबसे बड़ा जंप आया है. 24 घंटों में इस वायरस के 704 नए मामले सामने आए हैं. भारत में इस वायरस से पिछले 24 घंटों में 28 लोगों की मौत हुई है. और रविवार को 32 लोगों की मौत हुई थी. यानी एक खास विचारधारा के लोगों की गलती अब पूरा भारत भुगत रहा है. और सैंकड़ों लोग अपनी जान भी गंवा रहे हैं.

पूरी दुनिया में ये वायरस अब तक 12 लाख 89 हजार से ज्यादा लोगों को संक्रमित कर चुका है और 70 हज़ार 5 सौ से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है. 2 अप्रैल को इस महा-मारी से संक्रमित लोगों का आंकड़ा 10 लाख के पार पहुंच गया था और पिछले 4 दिनों में ही लगभग 3 लाख नए लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं. हालांकि अच्छी बात ये है कि पूरी दुनिया में अब तक 2 लाख 70 हजार से ज्यादा लोग पूरी तरह ठीक भी हो चुके हैं.

अमेरिका में सबसे ज्यादा करीब 3 लाख 38 हजार लोग कोरोना वायरस से पीड़ित हैं. मौतों के मामले में भी अमेरिका हर रोज़ नया रिकॉर्ड बना रहा है. अमेरिका में अब तक साढे 9 हज़ार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. अमेरिका में पिछले तीन दिनों से लगातार हर रोज़ एक हज़ार से ज्यादा लोग मारे जा रहे हैं. शनिवार को ये आंकड़ा 1 हजार 497 तक पहुंच गया, और एक दिन में इससे ज़्यादा मौतें दुनिया में कहीं नहीं हुईं.

पूरी दुनिया की ताकत इस बात पर लगी है कि कोरोना के संक्रमण को कैसे रोका जाए. कैसे इस वायरस को खत्म करने की दवा तैयार की जाए? कैसे लाखों लोगों को मौत से बचाया जाए? कैसे इस वायरस से इंसानियत को बचाया जाए? लेकिन भारत में एक विचारधारा ऐसी है, जिसका इस विचारधारा पर ज़ोर है कि कैसे कोरोना वायरस को फैलाया जाए? कैसे इस वायरस को भी धर्म का मुद्दा बना दिया जाए? ये वो लोग हैं, जो कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ देश की लड़ाई में धर्म को लेकर आ गए हैं. लेकिन जब ऐसे लोगों को हमने एक्सपोज किया तो ये लोग हमें ही धमकी देने लगे हैं. सच बोलने पर हम पर ही हमला करने लगे हैं, हमें अपशब्द कहने लगे हैं. कोरोना वायरस से भी ज़हरीली सोच वाले ऐसे लोग किस तरह की ज़हरीली बातें कर रहे हैं. उसका एक उदाहरण हम आपको दिखाते हैं. 

तबलीगी जमात का सच बर्दाश्त नहीं
आपने सुना कैसे ये मौलाना मेरा नाम लेकर धमकियां दे रहा है. ऐसी सोच वाले लोग एक वायरस से लड़ाई को मस्जिद बनाम आश्रम की लड़ाई बनाने में जुटे हैं. ये इसे मस्जिद बनाम मंदिर की लड़ाई बनाने में जुटे हैं. हमने तबलीगी जमात का जो सच दिखाया, वो इन्हें बर्दाश्त नहीं हो रहा है. इसलिए ऐसी सोच वाले लोग हम पर पूरी ताकत से हमला कर रहे हैं. लेकिन सच यही है कि देश में कोरोना फैलाने में इनकी सोच वाले लोग ही जुटे हैं. हम आपको कुछ आंकड़े दिखाते हैं. 

देश में कोरोना के करीब 35 प्रतिशत मरीज तबलीगी जमात के हैं.
देश भर में 4 हज़ार 67 मरीजों में 14 सौ 45 मरीजों का तबलीगी जमात से कनेक्शन है.
दिल्ली में कोरोना के करीब 63 प्रतिशत मरीज तबलीगी जमात के हैं.
उत्तर प्रदेश में कोरोना के करीब 52 प्रतिशत मरीज तबलीगी जमात के हैं.
आंध्र प्रदेश में कोरोना संक्रमण के करीब 88% मामले तबलीगी जमात के हैं.
तमिलनाडु में कोरोना के करीब 91 प्रतिशत मामले तबलीगी जमात के हैं.
देश भर में तबलीगी जमात के 25,500 से ज़्यादा लोगों की पहचान कर उन्हें क्वारंटाइन किया गया है. 
तबलीगी जमात के 2 हज़ार 83 विदेशी नागरिकों में 17 सौ 50 नागरिकों को ब्लैकलिस्ट किया गया है. 

लेकिन ये सच दिखाना देश में एक खास विचाराधारा वाले लोगों को अच्छा नहीं लग रहा है. ऐसे लोग कोरोना से लड़ाई पर धार्मिक ध्रुवीकरण का एजेंडा चला रहे हैं. मीडिया को धमका रहे हैं कि वो सच बोलना बंद कर दे, नहीं तो ये लोग मीडिया का सड़क पर निकलना मुश्किल कर देंगे. 

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ये वो लोग हैं, जो देश में असहनशीलता की बात करते हैं, धर्मनिरपेक्षता की बात करते हैं, सांप्रदायिकता की बात करते हैं और अल्पसंख्यक कार्ड खेलते हैं. ऐसे लोग देश पर आए सबसे बड़े संकट के बीच भी धर्म का नाम लेकर ज़हर फैला रहे हैं. ये वो लोग हैं, जिन्हें संसद पर विश्वास नहीं, सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा नहीं, और अब इन्हें मीडिया पर भी विश्वास नहीं है. ये सिर्फ मीडिया के उस हिस्से पर विश्वास करते हैं, जिस हिस्से में डिज़ायनर पत्रकार हैं, टुकड़े-टुकड़े गैंग है, और ऐसे लोग हैं, जो देश को तोड़ने, देश को हराने की बात करते हैं. मीडिया का जो हिस्सा, देश की बात करता है, देश में समान अधिकार की बात करता है, जो ऐसे लोगों को एक्सपोज करता है, वो इन्हें पसंद नही हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि इन्हें तुष्टिकरण की आदत पड़ गई है. इन्हें विशेष अधिकार चाहिए. इनके लिए देश के कानून से बड़ा फतवा है. ये फतवे से चलते हैं, देश के कानून पर नहीं चलते. ऐसे लोग ही देश में एक खास वर्ग के अंदर नफरत की वो सोच भरते हैं, जिस सोच की वजह से इंदौर जैसी घटनाएं होती हैं.

आपको इंदौर की घटना याद होगी, जहां एक इलाके में कोरोना संक्रमण की जांच के लिए गई स्वास्थ्य विभाग की टीम पर पत्थरों से हमला किया गया था. महिला डॉक्टर किसी तरह से जान बचाकर भागी थी. ये वो लोग हैं जिन्हें आतंकवादी अफजल गुरू पसंद है, आतंकवादी याकूब मेमन पसंद है. ये लोग आतंकवादियों को फांसी से बचाने के लिए आधी रात को सुप्रीम कोर्ट खुलवा देते हैं. जब अफज़ल गुरु और याकूब मेमन को फांसी दी गई थी तब भी इन्होंने यही कहा था कि इन आतंकवादियों को उनके धर्म की वजह से निशाना बनाया गया है. ये लोग धारा कश्मीर से 370 हटाए जाने के भी विरोदी हैं..क्योंकि ये लोग चाहते हैं कि कश्मीर भारत से कट जाए. भारत के टुकड़े-टुकड़े करने का सपना देखने वाले इन लोगों को अब कोरोना वायरस में भी एक सुनहरा मौका दिखाई दे रहा है.

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आज ऐसे लोगों से हम कहना चाहते हैं कि कोरोना वायरस देश के इतिहास का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बनने जा रहा है. ऐसे लोग देश के सामने एक्सपोज हो जाएंगे. वोटबैंक और तुष्टिकरण की राजनीति खत्म हो जाएगी. क्योंकि देश के लोगों ने ये देख लिया है कि देश के अंदर ही कुछ ऐसे लोग हैं, जो ये चाहते हैं कि कोरोना वायरस फैल जाए. ऐसे लोग आज भी अंदर ही अंदर भारत को हारते हुए देखना चाहते हैं. ये वो लोग हैं, जो चाहते हैं कि कोरोना से युद्ध में भारत हार जाए. ये देशद्रोह है, ये देश के प्रति गद्दारी है. लेकिन सबसे बड़ा विरोधाभास ये है कि इन्हीं लोगों को देशद्रोह और देशद्रोही जैसे शब्दों से नफरत है. इन लोगों को जब गद्दार कहा जाता है, तो इन्हें बहुत दर्द होता है. लेकिन ये लोग अब सच्चाई का सामना नहीं कर पा रहे हैं और सच दिखाने पर मीडिया को धमकाने में जुटे हैं.

तबलीगी जमात के 1445 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित
देश में तबलीगी जमात के 1445 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं. तबलीगी जमात के कारण 1 अप्रैल से 6 अप्रैल के बीच संक्रमण के मामले 200 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गए. जो लोग तबलीगी जमात का बचाव कर रहे हैं, ये आरोप लगा रहे हैं कि तबलीगी जमात को मीडिया निशाना बना रहा है. उन्हें हम एक और आंकड़ा दिखाना चाहते हैं. शायद इस आंकड़े से इन लोगों की आंखें खुल जाएं, जो इन्होंने धर्म के नाम पर बंद कर ली है. भारत में तबलीगी जमात के मामले आने के बाद हर 4 दिन में कोरोना संक्रमण के केस दोगुने हो रहे हैं. अगर तबलीगी जमात ने संक्रमण ना फैलाया होता तो कोरोना के मामले हर 7 दिन में दोगुने होते. पिछले एक हफ्ते में देश भर में कोरोना संक्रमण के 85 प्रतिशत मामले तबलीगी जमात के लोगों से जुड़े हैं.

DNA वीडियो:

कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में मीडिया की बहुत अहम भूमिका है. मीडिया के लोग कोरोना फाइटर्स (Corona Fighters) हैं. हम खतरे को जानकर भी रोज अपने ऑफिस आ रहे हैं. आपको कोरोना वायरस पर एक-एक जानकारी दे रहे हैं. ये जानकारी वायरस के खिलाफ आपकी इम्युनिटी की तरह है. लेकिन एक खास विचारधारा वाले लोग और कट्टरपंथी मौलाना हमें धमकियां दे रहे हैं. आज News Broadcasters Association यानी NBA ने पत्रकारों को मिल रही धमकियों की निंदा की है और ऐसे तत्वों पर कार्रवाई करने की अपील की है. NBA ने कहा है कि कुछ धार्मिक प्रचारक टीवी न्यूज़ एंकर्स के नाम लेकर उन्हें धमकियां दे रहे हैं. उन्हें सोशल मीडिया पर टारगेट किया जा रहा है. जबकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने कोरोना वायरस महामारी पर बेहतरीन रिपोर्टिंग की है. समाज के सभी वर्गों को टीवी डिबेट में उचित प्रतिनिधित्व दिया जाता है. इस तरह की धमकियां संविधान से मिले मौलिक अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है. 

यहां हमारा एक और सवाल है. कि आखिर कौन सी ऐसी संस्था है, जो मुस्लिम समुदाय की सही रहनुमा है. मौलाना आपस में ही एक दूसरे को सर्टिफिकेट बांटते हैं. एक मौलाना दूसरे मौलाना को कहता है कि वो मुस्लिमों का सही प्रतिनिधि नहीं है. ये भी सच है कि इन मौलानाओं के लिए मुस्लिम वर्ग में ही कहा जाता है कि वो ऐसे मौलानाओं की बात नहीं मानते. ये कहा जाता है कि टीवी वाले मौलाना अलग हैं, इन्हें सिर्फ बहस के लिए बुलाया जाता है. ऐसे में सवाल यही है कि मुस्लिम समुदाय में ऐसे कौन लोग हैं, जिनकी बात सब मानते हैं. हमारी अपील है कि मुस्लिम समुदाय आपस में बैठकर अपना प्रतिनिधि तय करे, जिसकी बात सब मानते हों.

वायरस जाति-धर्म पूछकर संक्रमण नहीं फैलाता लेकिन कुछ लोगों के लिए धर्म देश से बड़ा हो गया है. इन लोगों ने अपनी आंखों में धर्म की पट्टी बांध ली है. ये कोरोना से लड़ाई में भारत को हराने वाली सोच रखते हैं, जो आपको सोशल मीडिया पर दिख जाएगी. ऐसी सोच वाले लोगों ने सोशल मीडिया को फेक न्यूज फैलाने, लॉकडाउन को फेल करने और धर्म के नाम पर लोगों को गुमराह करने का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म बना लिया है. ये लोग चाइनीज वीडियो एप TikTok पर भी बहुत एक्टिव हैं. TikTok पर सांप्रदायिक वीडियो बनाकर ये लोगों को बहका रहे है. 
 
ऐसी सोच से कोरोना वायरस के खिलाफ देश की लड़ाई को कमज़ोर किया जा रहा है. इसके लिए TikTok का खास तौर पर इस्तेमाल हो रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना के संक्रमण काल में करीब 30 हज़ार ऐसे वीडियो TikTok पर पोस्ट किए गए. जिनके ज़रिए लोगों को लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन करने के लिए उकसाया जा रहा है और ये कहा जा रहा है कि कोरोना इन लोगों का कुछ नहीं बिगाड़ सकता क्योंकि इनके पास एक खास धर्म की विचारधारा है. सरकार ने कहा है कि वो ऐसे वीडियो पोस्ट करने वालों के खिलाफ एक्शन लेगी लेकिन एक्शन Tik Tok पर भी लिया जाना चाहिए, कि कैसे इस तरह के वीडियो उसके प्लेटफॉर्म पर आ रहे हैं. TikTok ऐप चीन की कंपनी का है, सवाल यही है क्या चीन अपने यहां ऐसा होने देता?

इनकी ये सोच सिर्फ भारत में ही नहीं है, यही हाल पाकिस्तान का भी है. पाकिस्तान के कराची शहर में ...पुलिस ने लोगों को मस्जिद में एक साथ नमाज पढ़ने से रोकने की कोशिश की, तो कट्टरपंथी सोच वाले लोगों ने पुलिस पर ही हमला कर दिया. पुलिस वहां नमाज के दौरान मौजूद एक इमाम को गिरफ्तार करना चाहती थी. लेकिन लोगों ने पुलिस पर पत्थरों से हमला कर दिया. किसी तरह पुलिस वाले वहां से अपनी जान बचाकर भागे. 

जो लोग धर्म का नाम लेकर कोरोना वायरस के खिलाफ़ लड़ाई को कमज़ोर करना चाहते हैं. जो लोग स्वास्थ्य कर्मचारियों से मारपीट कर रहे हैं. उन पर थूक रहे हैं. खुद को छुपा रहे हैं. पहचान करने के लिए जाने पर पुलिस पर हमला कर रहे हैं. और जो सच दिखाने पर मीडिया को धमकियां देते हैं. ऐसी सोच वाले लोगों के लिए हमारे पास एक वीडियो आया है. इस वीडियो में जम्मू कश्मीर की कुपवाड़ा की 9वीं क्लास की छात्रा सीरत का संदेश है. ये संदेश आज इन सभी लोगों को ध्यान से सुनना चाहिए.