हनीप्रीत ने जमानत के लिए लगाई गुहार, 1 मई को होगी मामले की सुनवाई

प्रियंका तनेजा उर्फ हनीप्रीत की दलील है कि उसका नाम एफआईआर में बाद में डाला गया. उसे पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया, बल्कि 3 अक्तूबर 2017 को उसने खुद सरेंडर कर दिया था. 

हनीप्रीत ने जमानत के लिए लगाई गुहार, 1 मई को होगी मामले की सुनवाई
राम रहीम की सजा के एलान के बाद से हनीप्रीत 38 दिनों तक फरार रही और उस पर हिंसा फैलाने का केस दर्ज है.

नई दिल्ली: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की सबसे बड़ी राजदार हनीप्रीत उर्फ प्रियंका तनेजा ने नियमित जमानत के लिए पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट में गुहार लगाई है. हाईकोर्ट की रजिस्ट्री ने सभी पक्षों को 1 मई के लिये नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. हनीप्रीत ने कोर्ट में अपनी याचिका में कहा है कि 25 अगस्त 2017 को पंचकूला में जब हिंसा हो रही थी, तब वह डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के साथ थी. डेरा प्रमुख को दोषी ठहराए जाने के बाद वो पंचकूला से सीधा रोहतक की सुनारिया जेल चली गई थी. उसने कहा कि हिंसा में उसका कहीं कोई रोल नहीं है.

प्रियंका तनेजा उर्फ हनीप्रीत की दलील है कि उसका नाम एफआईआर में बाद में डाला गया. उसे पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया, बल्कि 3 अक्तूबर 2017 को उसने खुद सरेंडर कर दिया था. उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर नंबर 345 के अन्य 15 आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, इसलिए उन्हें भी ज़मानत दे दी जाए. बता दें कि हरियाणा पुलिस के मुताबिक उन्होंने राम रहीम की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत को 3 अक्टूबर 2017 को पटियाला जीरकपुर रोड से गिरफ्तार किया था.

जब प्रियंका तनेजा उर्फ हनीप्रीत को पंचकूला की कोर्ट में पेश किया गया था, तब उन्होंने राम रहीम के साथ रिश्तों पर भी सफाई दी थी. हनीप्रीत ने कहा था कि उनके रिश्तों को गलत तरीके से पेश किया गया है. साथ ही उन्होंने हिंसा फैलाने के आरोप को भी सिरे से खारिज किया था. हनीप्रीत ने फरार होने की वजह डर बताया था और कहा कि वो नेपाल में नहीं थी बल्कि अपने ही देश में थी. राम रहीम की सजा के एलान के बाद से हनीप्रीत 38 दिनों तक फरार रही और उस पर हिंसा फैलाने का केस दर्ज है.