परमाणु बम का जनक लेकिन 'स्मगलिंग' की सनक! कुछ ऐसी थी कदीर खान की कहानी
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परमाणु बम का जनक लेकिन 'स्मगलिंग' की सनक! कुछ ऐसी थी कदीर खान की कहानी

 पाकिस्तान को परमाणु ताकत बनाने के साथ-साथ अब्दुल कदीर खान दुनिया के अलग-अलग देशों को भी गैरकानूनी ढंग से Nuclear Technology बेचने लगे.

परमाणु बम का जनक लेकिन 'स्मगलिंग' की सनक! कुछ ऐसी थी कदीर खान की कहानी

नई दिल्ली: किसी को कोड़े मारकर सजा देना कट्टर इस्लाम की देन है लेकिन अगर हम आपसे कहें कि पाकिस्तान का परमाणु बम भी कट्टर इस्लाम की देन है तो शायद आप हैरान रह जाएंगे. इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है जिसके बारे में आपको जानना चाहिए.

पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के जनक कहे जाने वाले वैज्ञानिक अब्दुल कदीर खान की 85 वर्ष की उम्र में मृत्यु हो गई है. वो पिछले कई दिनों से कोरोना से संक्रमित थे. अब्दुल कदीर खान ने पाकिस्तान को परमाणु संपन्न देश बनाया. लेकिन उन्होंने अपनी जिंदगी के आखिरी दिन गुमनामी में गुजारे. अब्दुल कदीर खान पाकिस्तान का पहला परमाणु बम बनाकर पाकिस्तान के सबसे बड़े हीरो बन गए थे. लेकिन फिर उन्होंने इसी परमाणु बम की स्मगलिंग शुरू कर दी और पूरी दुनिया उन्हें एक वैज्ञानिक नहीं बल्कि न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी (Nuclear Technology) के स्मग्लर (Smuggler) के तौर पर देखने लगी. 

हिंदुओं से नफरत करते थे कादिर खान!

अब्दुल कदीर खान का जन्म वर्ष 1936 में भारत के भोपाल में हुआ था और वो 1952 में पाकिस्तान चले गए थे. यानी आजादी के 4 वर्षों के बाद वो अक्सर खुलकर ये कहते थे कि उन्हें हिंदुओं से नफरत है और भारत से उनकी इसी नफरत ने पाकिस्तान को Nuclear Bomb दिला दिया.

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पाकिस्तान की चालबाजी

11 मई 1998 को भारत ने पोखरण में अपना दूसरा परमाणु परीक्षण किया था. इसके ठीक 17 दिनों के बाद यानी 28 मई 1998 को जवाब में पाकिस्तान ने भी अपना पहला परमाणु परीक्षण कर दिया और इसका श्रेय अब्दुल कदीर खान को ही दिया गया. क्योंकि प्रतिबंधों के बावजूद अब्दुल कदीर खान पाकिस्तान का पहला परमाणु बम बनाने में कामयाब हो गए थे. इसके लिए वो बिजनेस के बहाने से दुनिया के अलग-अलग देशों में जाते थे और न्यूक्लियर बम बनाने में इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट्स की खरीददारी करते थे. लेकिन दुनिया को लगता था कि पाकिस्तान गैर परमाणु कार्यक्रम के लिए ये कंपोनेंट्स खरीद रहा है पर असल में अब्दुल कदीर खान दुनिया की आंखों में धूल झोंक रहे थे. इसमें पाकिस्तान और अब्दुल कदीर खान की मदद चीन भी कर रहा था.

भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण वर्ष 1974 में किया था. तब अब्दुल कदीर खान Netherlands में एक Uranium Enrichment Facility में काम किया करते थे. परमाणु बम बनाने के लिए सबसे जरूरी चीज Uranium ही होती है लेकिन इस Uranium को Centrifuges की मदद से एनरिच किया जाता है और अब्दुल कदीर खान  Netherlands में काम करने के बहाने Centrifuges बनाने का Blue Print चुरा रहे थे. इसके लिए इन्हें वहां कि अदालत ने दोषी भी माना था. 

लेकिन उससे पहले ही वो Netherlands से भागकर पाकिस्तान आ गए थे और उन्हें पाकिस्तान के तब के प्रधानमंत्री जुल्फीकार अली भुट्टो ने पाकिस्तान के Atomic Energy Commision का सदस्य बना दिया. जिसके बाद उन्होंने पाकिस्तान के कहुटा में एक रिसर्च लैब बनाई जो आगे चलकर स्मगलिंग के जरिए चुराई गई तकनीक के आधार पर परमाणु बम बनाने वाली एक फैक्ट्री में बदल गई.

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'खान नेटवर्क' का सच

अपने देश को परमाणु ताकत बनाने के साथ-साथ अब्दुल कदीर खान दुनिया के अलग-अलग देशों को भी गैरकानूनी ढंग से Nuclear Technology बेचने लगे. इसके लिए उन्होंने बाकायदा एक नेटवर्क बनाया जिसे दुनिया आज खान नेटवर्क के नाम से जानती है.

इस खान नेटवर्क ने ईरान, उत्तर कोरिया, और लीबिया जैसे देशों को न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी बेची और आज उत्तर कोरिया जैसा देश इसी के दम पर अमेरिका और जापान पर परमाणु हमले की धमकी देता है. उत्तर कोरिया ने पाकिस्तान से Nuclear Technology ली और बदले में पाकिस्तान को मिसाइल बनाना सिखाया और आज भी पाकिस्तान की ज्यादातर मिसाइलें उत्तर कोरिया की तकनीक पर ही आधारित हैं. 

हालांकि वर्ष 2004 में इस खान नेटवर्क का भंडाफोड़ हो गया. पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने उन्हें उनके पद से हटा दिया. लेकिन परवेज मुशर्रफ ने अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें किसी भी तरह की सजा देने पर रोक भी लगा दी और इसके बाद लंबे समय तक उन्हें उनके घर में ही नजरबंद कर दिया गया. लेकिन ये सब भी अमेरिका के दबाव की वजह से हुआ था.

लेकिन जब तक दुनिया को ये सब पता चला, तब तक पाकिस्तान के हाथ परमाणु बम लग चुका था. जिसे आज कई लोग इस्लामिक बम कहते हैं क्योंकि इस्लामिक दुनिया में सिर्फ पाकिस्तान के पास ही Nuclear Bomb है.

पत्नी ने किया था इस बात का खुलासा

अब्दुल कदीर खान की पत्नी हैनी कदीर खान ने कुछ वर्ष पहले जर्मनी के एक अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा था कि उनके पति पाकिस्तान की सरकार के निर्देश पर ही दुनिया के अलग-अलग देशों को Nuclear Technology बेच रहे थे. यानी परमाणु बमों की स्मगलिंग के मामले में पाकिस्तान में सब मिले हुए थे.

लेकिन जैसा कि कहा जाता है हर बुरे काम का नतीजा बुरा ही होता है. जिस अब्दुल कदीर खान को कभी पाकिस्तान में हीरो का दर्जा हासिल था. उनके घर से बाहर जाने तक पर रोक लगा दी गई, उनका बाकी का जीवन अदालतों के चक्कर लगाते हुए बीता और कुछ दिनों पहले जब वो कोरोना से संक्रमित हुए तो पाकिस्तान की सरकार ने उनकी कोई मदद नहीं की और परसो यानी रविवार को पाकिस्तान के लिए परामणु बम बनाने वाले अब्दुल कदीर खान की मौत हो गई.

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