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#IndiaKaArth- हमारे जीवन का हर हिस्‍सा संस्कृति का हिस्सा है: सुभाष चंद्रा

'अर्थ' एक सांस्‍कृतिक उत्सव है, जो हमारी संस्कृति के मायनों को जीवित रखता है.

#IndiaKaArth- हमारे जीवन का हर हिस्‍सा संस्कृति का हिस्सा है: सुभाष चंद्रा

नई दिल्‍ली: भारत की मिट्टी की महक, परंपरा और विरासत, इतिहास, कला और संस्‍कृति की खुशबू को महसूस करने वाले भारत के पहले बहु-क्षेत्रीय संस्कृति त्‍योहार 'अर्थ' (Arth: A Culture Fest) के शुभारंभ के अवसर पर बोलते हुए राज्‍यसभा सांसद सुभाष चंद्रा ने कहा कि 'अर्थ: ए कल्‍चर फेस्‍ट' इस मायने में बेहद खास है कि इस सांस्‍कृतिक पर्व ने युवा मन में सभ्‍यता और संस्‍कृति के मन में जिज्ञासा उत्‍पन्‍न की है. मेरे विचार से संस्‍कृति मानव जाति के लिए सब कुछ है. प्राचीन ग्रंथों का जिक्र करते हुए कहा कि संस्‍कृति का अर्थ सिर्फ सरकार की परिभाषा से नहीं समझना चाहिए. प्राचीन ग्रंथों का अध्‍ययन किया जाए तो देखेंगे कि उनमें भी राजा यानी सरकार के कर्तव्‍य बताए गए हैं. उसमें बताया गया है कि राजा को किस तरह कर संग्रह करना चाहिए. आज की सरकारें उससे सीख ले सकती हैं.

उन्‍होंने कहा कि आज के युवा संस्‍कृति को लेकर कंफ्यूज हैं जबकि हमारे जीवन का हर हिस्‍सा संस्‍कृति का हिस्‍सा है. परंपरा और आधुनिकता के संदर्भ में कहा कि भारतीय संस्‍कृति की सोच पूरी तरह से वैज्ञानिक है. उन्‍होंने भारतीय सभ्‍यता में नमस्‍कार और पैर छूने जैसे अभिवादन के तरीके के पीछे जुड़ी वैज्ञानिक संकल्‍पना के बारे में बताया. इसके साथ ही कहा कि पिछले ढाई हजार वर्षों में हमारी संस्‍कृति पर कई स्‍तरों के माध्‍यम से कुठाराघात हुआ है. लेकिन इसके बावजूद भारतीय संस्‍कृति ही दुनिया की एकमात्र संस्‍कृति है कि जिसके पास दुनिया की समस्‍याओं का पूर्ण समाधान है.

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#IndiaKaArth: संस्‍कृति का महाकुंभ, सभ्‍यता और परंपरा के 'अर्थ' को कीजिए महसूस, देखिए PICS

उन्‍होंने कहा कि इस वक्‍त दुनिया की आबादी तकरीबन आठ अरब है लेकिन हर शख्‍स के जीवन में किसी न किसी चीज की कमी है. यानी इस दुनिया में एक चीज कॉमन है और वह है दुख (Suffering). इसके साथ ही जब आप भारतीय दर्शन को देखेंगे तो पाएंगे कि गौतम बुद्ध से लेकर हमारे संपूर्ण जातीय इतिहास में इसका समाधान खोजने का प्रयास किया गया है.

सुभाष चंद्रा ने कहा कि इस लिहाज से देखें तो दुनिया की संपूर्ण समस्‍याओं का हल खोजने का प्रयास हमारे मनीषियों ने किया है. हम भले ही अपनी कहानियों को मिथक, किवदंतियां कहें लेकिन उनके पीछे एक गहरी वैज्ञानिक सोच छुपी है. हमें उसको समझना चाहिए और गर्व करना चाहिए. इसके साथ ही उन्‍होंने जोड़ा कि हमारी साढ़े तीन हाथ की काया में संपूर्ण ब्रह्मांड का रहस्‍य छुपा है.

उल्‍लेखनीय है कि 'अर्थ' का इस बार दूसरा सीजन आयोजित हो रहा है. दरअसल, 'अर्थ' एक सांस्‍कृतिक उत्सव है, जो हमारी संस्कृति के मायनों को जीवित रखता है. आज से शुरू हुआ यह फेस्टिवल साहित्य, संस्कृति, समाज, संगीत, परंपराओं, इतिहास और कला पर केंद्रित है. इस महोत्‍सव का आयोजन दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्‍टेडियम में हो रहा है. Arth- A Culture Fest तीन दिन (21, 22 और 23 फरवरी) तक चलेगा. इस तीन दिवसीय फेस्टिवल में आपको भारत की संस्‍कृति की झलक दिखेगी.

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इस महोत्‍सव में आपको 30 से ज्‍यादा वक्‍ताओं, 10 से अधिक पैनल डिस्कशन, 10 से ज्‍यादा वर्कशॉप के अलावा कई परफॉर्मेंस देखने-सुनने एवं अलग-अलग तरह के भारतीय व्‍यंजनों का स्‍वाद चखने को मिलेगा. इस तरह यह फेस्टिवल भारत के विद्वानों, दार्शनिकों, लेखकों, कलाकारों और शिल्‍पकारों की भागीदारी का गवाह बनेगा.

यहां पढ़ें Arth: A Culture Fest का पूरा शेड्यूल...

पहला दिन (21 फरवरी 2020)
11:00 बजे - महिषासुर मर्दिनी: द मदर स्लेन्स द डिमॉन : पुरुलिया छऊ, तारापद रजक द्वारा
12:00 बजे - दीप प्रज्‍जवलन और उद्घाटन संबोधन:  केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, राज्‍यसभा सांसद सुभाष चंद्रा, श्रेयसी गोयनका, विक्रम संपत
12:30 बजे - भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समझ (पैनलिस्ट): गीता चंद्रन, माधवी मुद्गल, मैथिल देविका, शोवना नारायण, मॉडरेटर: सुजॉय प्रोसाद चटर्जी
1:30 बजे - ऋग्वेद का पुनरीक्षण (पैनलिस्ट): हिमानी मित्तल, केवी कृष्णन, संजीव सान्याल, सतीश के एस, वासुदेव ऐताल
2:15 बजे- रेगिस्तान के गीत : राजस्थान के लंगा, मांगनियार और कालबेलिया का परफॉर्मेंस, कलाकार: सूरम नाथ
3:00 बजे- द पेन ऑफ सेपरेशन : विभाजन का दर्द, (पैनलिस्ट) : किश्वर देसाई, मीनाक्षी जैन, सरदिन्दु मुखर्जी, मॉडरेटर: मकरंद परांजपे
3:45 बजे- Whose Economy Is It Anyway? लॉर्ड मेघनाद देसाई की संजीव सान्‍याल से बातचीत
4:30 बजे- अश्विन सांघी की किताब 'Vishnu's Vault' के लोकार्पण के साथ चर्चा- 'इतिहास और पौराणिक कथाओं में समकालीन' (पैनलिस्ट): अश्विन सांघी, संजीव सान्याल, मॉडरेटर: राधाकृष्णन पिल्लई
5:15 बजे- खुश रहने के कारण हैं: आज के भारत में मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य : श्याम भट्ट, योगिनी शाम्भवी, मॉडरेटर: विक्रम संपत
6 बजे- मिलिंद सोमन की पुस्‍तक 'Made In India' की पुस्‍तक के लोकार्पण के साथ चर्चा- 'फिट इंडिया तो हिट इंडिया' राज्यवर्धन सिंह राठौड़ की मिलिंद सोमन के साथ बातचीत
6:45 बजे- कुमार विश्वास की परफॉर्मेंस
8 बजे - शुभा मुद्गल की परफॉर्मेंस

दूसरा दिन (22 फरवरी 2020)
सुबह 11 बजे- गुरु का गीत: गुरबाणी, कलाकार: भाई मनोहर सिंह
11:45 बजे- The Warp And Weft: The Grandeur Of Indian Wear (पैनलिस्ट): शाइना एनसी, सुदीप भूटोरिया, सुवनकर सेन, मॉडरेटर: शेफाली वैद्य
12:30 बजे- वो पुरुष, जिनके विचारों ने भारत को आकार दिया: नेताजी, स्वामी विवेकानंद और सावरकर, (पैनलिस्ट): अनुज धर, मकरंद परांजपे, विक्रम संपत, लॉर्ड मेघनाद देसाई, मॉडरेटर: शुभ्रास्था
1:15 बजे - साहित्य से सिनेमा तक: सेल्युलाइड पर साहित्यिक प्रभाव (पैनलिस्ट): अनंत विजय, भगवानदास मोरवाल, मनोज राजन त्रिपाठी, मॉडरेटर: अर्पित वगेरिया
2:00 बजे- बिना किसी कारण के खुशी- मंदिरा बेदी की सत्यदेव बर्मन के साथ बातचीत
2:30 बजे- 'सही' कारण की पैरवी (Lobbying For The 'Right' Cause), पैनलिस्ट: अनुराग सक्सेना, आर जगन्नाथन, रतन शारदा, शाइना एनसी, मॉडरेटर: शुभ्रस्था
3:15 बजे- PM - भगवान के अपने देश से: केरल के पैनलिस्टों से ओटन थुल्ल: मोहना कृष्णन
3:15 बजे- भगवान के अपने देश से (From God's Own Country): केरल से ओट्टन थुल्लल (पैनलिस्ट): मोहना कृष्णन
4:00 बजे- "विश्वगुरु बनना: नई विश्व व्यवस्था में भारत का स्थान पुनः प्राप्त करना, (पैनलिस्ट): अनुराग सक्सेना, बैजयंत जय पांडा, डेविड फ्रॉली, हिंडोल सेनगुप्ता, मॉडरेटर: राघव अवस्थी
4:45 बजे- India's Civilizational Ethos And Its Intersection With Secularism: केरल के राज्‍यपाल आरिफ मोहम्‍मद खान के साथ मयंक सिंह की बातचीत
5:45 बजे- The Abrogation Of Article 370 And What It Means To 'Kashmiriyat' (पैनलिस्ट): गोहर गिलानी, जामयांग शेरिंग नामग्याल, सुशांत सरीन, सैयद सलमान चिश्ती, विवेक अग्निहोत्री, मॉडरेटर: अभिजीत अय्यर मित्र
6:45 बजे- Nationalism In Times Of Strife: राष्‍ट्रवाद के नए आयाम- अमित शाह से सुधीर चौधरी की बातचीत
7:45 बजे- Desert Echoes - मामे खान की परफॉर्मेंस
8:45 बजे- Euphoria की परफॉर्मेंस

तीसरा दिन (23 फरवरी 2020)
सुबह 11 बजे- Cymbals From The North East: मणिपुरी पुंग और डोल चोलम कलाकार: सिनम बसु
11:45 बजे- Sacred Ecologies: Indic Faiths And Their Message (पैनलिस्ट): डेविड फ्रॉले, दुष्यंत श्रीधर, हेमा हरि, मॉडरेटर: डीके हरि
12:30 बजे- साहित्य में जीवन-  रस्किन बॉन्ड की प्रेमक गोस्वामी के साथ बातचीत
1:15 बजे- संस्कृति और कला पर चर्चा: प्रसून जोशी और यतींद्र मिश्रा के बीच बातचीत

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