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कश्‍मीर घाटी में 5 महीने में 91 आतंकी ढेर, अब जैश की कमान संभालने को नहीं कोई तैयार

सेना और पुलिस ने मिलकर आतंक की कमर तोड़ दी है. मारे गए आतंकियों में हिजबुल मुजाहिदीन, जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर और अंसार ग़ज़ावत-उल-हिंद के 13 टॉप कमांडर भी शामिल हैं.

कश्‍मीर घाटी में 5 महीने में 91 आतंकी ढेर, अब जैश की कमान संभालने को नहीं कोई तैयार

नई दिल्‍ली: कश्‍मीर घाटी में आतंक पर सेना का प्रहार जारी है. इस साल अब तक सिर्फ 5 महीने में ही 91 आतंकियों को ढेर कर दिया गया. इसमें हिजबुल मुजाहिदीन, जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर और अंसार ग़ज़ावत-उल-हिंद के 13 टॉप कमांडर भी शामिल हैं. आतंक विरोधी इस अभियान को सफल बताते हुए पुलिस और सेना मानती है कि इस साल कश्मीर में आतंक की कमर टूट गई है. खास कर पुलवामा हमले के बाद, सेना के मुताबिक हालत यह है कि अब जैश के नेतृत्व को संभालने के लिए कोई भी आगे नहीं आ रहा है.

सेना के 15कोर के जीओसी लेफ्टनट जेनरल के.जी.एस ढिल्लों कहते हैं "पुलवामा के बाद 41 आतंकी मारे गए हैं. उनमें 25 जैश के थे. असल में हमने जैश की लीडरशिप को निशाना बनाया है. अब घाटी में कोई भी जैश का नेतृत्व करने के लिए सामने नहीं आ रहा है." सेना के साथ राज्य पुलिस भी मानती है कि इस साल हमने आतंकियों की कमर तोड़ दी है. जैश और लश्कर को काफी नुकसान पहुंचा है. मारे जाने के साथ-साथ दर्जनों आतंकियों को पकड़ा भी गया है. साथ ही नए युवाओं को आतंक के रास्‍ते पर जाने से भी रोका गया है.

राज्य पुलिस मुखिया दिलबाग सिंह कहते है "बड़ी संख्या में लश्कर और जैश के आतंकियों को मारा गया है. जैश के करीब 27 विदेशी आतंकी मारे गए. 19 लश्कर के थे. ऐसे विदशी आतंकियों के सफाए ने आतंकियों को कमज़ोर किया है."    

मिली जानकारी अनुसार, इस साल जनवरी की शुरुआत में पुलिस, सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) द्वारा आतंकवाद विरोधी अभियान चलाने के लिए एक संयुक्त रणनीति बनाई गई थी. इसके अंतर्गत मानव इंटेलिजेंस की मदद से प्री-डॉन ऑपरेशन शुरू करने का निर्णय लिया गया. मारे गए आतंकवादियों के आंकड़ों से पता चलता है कि 90 फीसदी ऑपरेशन साफ-सुथरे थे. यहां आम लोगों को किसी तरह की क्षति नहीं हुई. मध्यरात्रि को अभियान शुरू करने से प्रदर्शनकारी युवाओं के साथ टकराव से बचा गया.

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक आज कश्मीर में कोई भी जैश कमांडर सक्रिय नहीं है. दक्षिण और उत्तरी कश्मीर में सक्रिय कुछ जैश आतंकवादी हो सकते हैं, जो पहले से ही रडार पर हैं. सुरक्षा विशेषज्ञ ने कहा कि हिज्ब, जैश, लश्कर और अब अंसार गज़्वातुल हिन्द के शीर्ष नेतृत्व की मौत के साथ, स्थानीय आतंकवादी भर्ती के लिए एक बड़ी सेंध लग गई है. पुलिस अधि‍कारी ने कहा "इस साल, 40 युवा विभिन्न आतंकवादी रैंकों में शामिल हो गए हैं. यह आंकड़ा 2017 के बाद सबसे कम है. इस नई भर्तियों में पांच मारे गए, तीन पकड़े गए और चार वापस लौट गए." अधिकारी ने कहा कि जीवित आतंकवादी कमांडरों के बीच, हिज़्ब के मुख्य कमांडर रियाज़ नाइकू ही बचा है."

सुरक्षाबलों के मुताबिक मारे गए कमांडरों में वे लोग शामिल हैं जो इस साल 14 फरवरी को पुलवामा के लेथपोरा में सुरक्षा बलों पर घातक आत्मघाती हमले का हिस्सा थे. हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान मारे गए.