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MP सरकार कर रही 'राइट टु हेल्थ' पर विचार, ऐसे होगी इलाज की व्यवस्था

मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल परिसर में निजी भागीदारी में डायग्नोस्टिक सेंटर स्थापित किए जाएं. मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा और लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है. 

MP सरकार कर रही 'राइट टु हेल्थ' पर विचार, ऐसे होगी इलाज की व्यवस्था
सांकेतिक तस्वीर

भोपालः मध्य प्रदेश की राज्य सरकार ने प्रदेशवासियों को 'राइट टु हेल्थ' (स्वास्थ्य का अधिकार) पर विचार करना शुरू कर दिया है. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गुरुवार को स्वास्थ्य अधिकारियों से कहा कि वे इस पर विचार करें कि बेहतर स्वास्थ्य लोगों का अधिकार हो. आधिकारिक तौर पर दी गई जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गुरुवार को लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए विशेषज्ञों की सीधी भर्ती करने के निर्देश दिए और कहा कि बेहतर स्वास्थ्य लोगों का अधिकार हो, इसके लिए 'राइट टु हेल्थ' की दिशा में विचार करें. 

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बैठक में कहा कि मरीजों की, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मरीजों की सुविधा का ध्यान रखते हुए सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के देखने का समय सुबह नौ बजे से अपराह्न् चार बजे तक निर्धारित किया जाना चाहिए. मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल परिसर में निजी भागीदारी में डायग्नोस्टिक सेंटर स्थापित किए जाएं. मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा और लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है. उन्होंने इस दिशा में विशेष प्रयास करने पर जोर दिया कि कार्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी फंड प्रदेश में स्वास्थ्य के क्षेत्र में अधिक से अधिक आए. 

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मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य सूचकांकों के बीच के अंतर को समाप्त करने के लिए लक्ष्य और समय आधारित रणनीति बनाएं. मातृ एवं शिशु मृत्युदर में कमी लाने को सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल कर परिणाम आधारित योजनाएं बनाएं. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि यह सुनिश्चित करें कि डॉक्टर अस्पतालों में उपलब्ध हों और विशेषज्ञों की सेवाएं मरीजों को मिलें. स्वस्थ मध्यप्रदेश के लिए जरूरी है कि स्वास्थ्य सुविधाओं और व्यवस्थाओं का हर स्तर पर उन्नयन कर उन्हें बेहतर बनाएं. (इनपुटः आईएएनएस)