मां के कष्ट देख इंजीनियर बेटे ने बनाई वर्ल्ड क्लास बायो टॉयलेट चेयर, मिला यह अवॉर्ड...

ग्वालियर के जयसिंह नरवरिया पेशे से सरकारी अधिकारी हैं, बीते कुछ सालों से स्वच्छता मिशन के लिए काम कर रहे हैं, पथरीले क्षेत्र में बॉयो टॉयलेट बनाने की उपलब्धि हासिल कर चुके हैं.

मां के कष्ट देख इंजीनियर बेटे ने बनाई वर्ल्ड क्लास बायो टॉयलेट चेयर, मिला यह अवॉर्ड...
पथरीले क्षेत्र में बॉयो टॉयलेट बनाने की उपलब्धि भी हासिल कर चुके हैं जयसिंह नरवरिया

ग्वालियरः मध्य प्रदेश के ग्वालियर के एक इंजीनियर ने वर्ल्ड क्लास बायो टायलेट चेयर बनाई है. जो उन बुजुर्गों ओर मरीजों के लिए मुफीद साबित होगी है, जो चलने-फिरने से लाचार हो या फिर बिस्तर से नही उठ पाते है. दुनिया की ये पहली स्मार्ट चेयर है जिसमें मानव मल बाहर नही आता है. इस स्मार्ट बॉयो चेयर को विशाखापट्टम में आयोजित इंटरनेशनल फेयर में गोल्ड मैडल मिला है. इसके अलावा इस इंजीनियर ने सीवर के चॉक होने की समस्या को खत्म करने के लिए भी एक नई तकनीक ईजाद की है जिसको पायलेट प्रोजेक्ट के तहत ग्वालियर में शुरू किया जाएगा. ग्वालियर के जयसिंह नरवरिया पेशे से सरकारी अधिकारी हैं, बीते कुछ सालों से स्वच्छता मिशन के लिए काम कर रहे हैं, पथरीले क्षेत्र में बॉयो टॉयलेट बनाने की उपलब्धि हासिल कर चुके हैं, लेकिन जब मां की तबीयत खराब हुई तो सबसे ज्यादा कष्ट शौच को लेकर होने लगा. जिसके बाद उन्होनें एक बॉयोटायलेट चेयर बनाई है. 

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जयसिंह नरवरिया प्रतिदिन अपनी मां को उठाकर ले जाना और सीट पर न बैठ पाने की मजबूरी देखना ही नीयत बन रही थी. एक रात मां को कष्ट हुआ तो इंजीनियर और उनकी पत्नी दोनों उठाकर ले गए. लेकिन कष्ट वही था सीट पर न बैठ पाना. हर दिन होने वाले इस कष्ट को ध्यान में रख दो महीने में ही देश की पहली बॉयो डाइजेस्टर स्मार्ट चेयर बना दी, जिसमें न मल की बदबू और न ही मल फेंकने की समस्या थी. इनबिल्ट टैंक में मौजूद बैक्टीरिया मल को डाइजेस्ट कर देता है और सिर्फ पानी ही बाहर निकलता है.  

देश और विदेश में सभी जगह बेहतरीन ऑटोमेटिक टॉयलेट चेयर बनाई गई हैं. इन सभी में मल के हिस्से को बाहर निकालकर फेंकने जाना पड़ता हैं, लेकिन ग्वालियर में बनी इस चेयर में इन बिल्ट चैंबर को बाहर नहीं निकालना पड़ता है. मल भी पानी बनकर बाहर निक लता है. इस पानी का इस्तेमाल पौधों में खाद के लिए किया जा सकता है. वाहनों में लगाने पर भी सड़क पर मल नहीं फैलेगा, सिर्फ पानी ही फैलेगा, जिससे कोई नुकसान नहीं होगा. जयसिंह के द्वारा बनाई गयी ये चेयर देश के अलग-अलग हिस्सों में हुई प्रतियोगिता में प्रथम आ चुकी है, दुनियाभर के लोग भी अब भारती की इस स्मार्ट चेयर को देखने के लिए ग्वालियर आ चुके है.   

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वहीं इस इंजीनियर ने हाल ही में देश में संभवत पहली बार चोक सीवर लाइन को बैक्टीरिया से खोलने का फार्मूला तैयार किया है .इस तरह के बैक्टीरिया को डेवलप किया गया जिसका विशेष घोल बनाकर सीवर में डाला जाएगा, यह बैक्टीरिया 48 घंटे के अंदर चोक सीवर लाइन को खोल रखने में सक्षम होगा .ग्वालियर नगर निगम ने इस घोल की टेस्टिंग भी कर ली है .अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो सीवर चॉक होने की समस्या दिनों की बात हो जाएगी . फिलहाल ग्वालियर नगर इस फार्मूले को पायलेट प्रोजेक्ट के तहत शुरू करने जा रहा है.