मुरैना में क्षत्रिय-गुर्जर समाज में बढ़ा तनाव! बसों में तोड़फोड़, पुलिस ने कई हिरासत में लिए

गुर्जर समाज के युवाओं ने गुरुवार देर शाम जरेरूआ गांव के सामने आक्रोशित होकर बसों में तोड़फोड़ की. इस दौरान कई सवारियों को मामूली चोटें भी आईं.

मुरैना में क्षत्रिय-गुर्जर समाज में बढ़ा तनाव! बसों में तोड़फोड़, पुलिस ने कई हिरासत में लिए

करतार सिंह राजपूत/मुरैनाः सम्राट मिहिर भोज की जाति को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ता ही जा रहा है. बता दें कि इस मुद्दे पर गुर्जर और क्षत्रिय समाज आमने -सामने आ गया है और दोनों ही तरफ से सोशल मीडिया पर एक दूसरे पर अभद्र टिप्पणी की जा रही है. गुरुवार को मुरैना में क्षत्रिय समाज के लोगों ने आक्रोशित होकर विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान क्षत्रिय समाज के कुछ लोगों ने गुर्जर समाज द्वारा लगाई गई होर्डिंग को फाड़ दिया. 

इसके विरोध में गुर्जर समाज के युवाओं ने गुरुवार देर शाम जरेरूआ गांव के सामने आक्रोशित होकर बसों में तोड़फोड़ की. इस दौरान कई सवारियों को मामूली चोटें भी आईं. गुस्साए लोगों ने बसों को रोककर उन्हें खाली कराया और फिर डंडों और पत्थरों से बसों को तोड़कर नुकसान पहुंचाया. इस दौरान गुर्जर समाज के युवाओं ने गुर्जर एकता के नारे भी लगाए. मामला बढ़ने पर पुलिस ने दोनों पक्षों के कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया है. 

क्या है विवाद
दरअसल बीती 8 सितंबर को ग्वालियर नगर निगम ने शिवपुरी लिंक रोड पर सम्राट मिहिर भोज की एक प्रतिमा स्थापित की है. इस प्रतिमा की शिलापट्टिका पर गुर्जर सम्राट मिहिर भोज लिखा हुआ है. इस पर क्षत्रिय समाज ने आपत्ति जताई. क्षत्रिय समाज का दावा है कि सम्राट मिहिर भोज गुर्जर नहीं थे. साथ ही क्षत्रिय समाज का ये भी कहना है कि महापुरुषों की प्रतिमाओं पर उनकी जाति का उल्लेख करना भी ठीक नहीं है. दोनों ही समाज सम्राट मिहिर भोज को अपनी-अपनी जाति का बता रहे हैं. 

क्या कहते हैं इतिहासकार
इतिहासकार लाल बहादुर सिंह का कहना है कि सम्राट मिहिर भोज के बारे में जो शिलालेख मिलते हैं, उनमें उन्हें प्रतिहार राजवंश का राजा बताया गया है. इतिहासकार बताते हैं कि राजा मिहिर भोज के प्रतिहार होने का जो शिलालेख है, वो आज भी ग्वालियर के मृगनयनी म्यूजियम में रखा हुआ है.