नर्सिंग कॉलेजों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, हाईकोर्ट के इस आदेश पर लगाई रोक

ग्वालियर चंबल अंचल के नर्सिंग कॉलेजों को देश की सर्वोच्च अदालत यानी कि सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. 

नर्सिंग कॉलेजों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, हाईकोर्ट के इस आदेश पर लगाई रोक
सांकेतिक तस्वीर

शैलेन्द्र सिंह भदौरिया/ ग्वालियर: ग्वालियर चंबल अंचल के नर्सिंग कॉलेजों को देश की सर्वोच्च अदालत यानी कि सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. यह राहत मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के उस आदेश पर मिली है, जिसके आधार पर इन सभी नर्सिंग कॉलेजों की जांच के आदेश हुए थे. सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस आदेश पर स्टे लगाया गया है और मामले से जुड़े सभी पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए आगामी 25 अक्टूबर को अगली सुनवाई नियत की है.

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दरअसल मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में एक जनहित याचिका दायर की गई थी. जिसमें अंचल के नर्सिंग कॉलेजों के अंदर अनियमितता के साथ संचालन किए जाने का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की गई थी. जिस पर याचिकाकर्ता की ओर से कई ऐसे तथ्य भी हाईकोर्ट के समक्ष रखे गए थे. जिसके आधार पर हाई कोर्ट द्वारा जनहित में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए ग्वालियर चंबल अंचल के नर्सिंग कॉलेजों की फिजिकल जांच के आदेश जारी किए थे.

नर्सिंग कॉलेजों के निरीक्षण का आदेश दिया था
जिसमें याचिकाकर्ता को भी फिजिकल वेरिफिकेशन कमेटी का सदस्य बनाते हुए उनकी मौजूदगी में ही नर्सिंग कॉलेजों के निरीक्षण का आदेश दिया था. जिस पर प्राइवेट नर्सिंग इंस्टिट्यूट एसोसिएशन ऑल इंडिया कि ग्वालियर इकाई के द्वारा एक लेटर पिटिशन सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई.

आदेश पर रोक लगाई है
जहां हुई सुनवाई के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के उस आदेश पर रोक लगाई है. जिसके आधार पर इन कॉलेजों का निरीक्षण किया जाना था. सुप्रीम कोर्ट से मिले इस स्टे के पीछे एसोसिएशन के अध्यक्ष की ओर से बताया गया है कि जिन तथ्यों को हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में दर्शाया गया है. वह दमोह और सागर जिले के थे जबकि जांच की मांग ग्वालियर जिले के नर्सिंग कॉलेजों की करी गई थी. ऐसे में ग्वालियर चंबल अंचल के कॉलेजों की जांच के आदेश दिए गए जबकि दमोह सागर जिले सहित मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में जांच के आदेश नहीं हुए. 

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राहत मिली
ऐसे में एसोसिएशन ने मांग की की हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे प्रदान किया जाए. लिहाजा सुप्रीम कोर्ट ने इन तथ्यों पर संज्ञान लेकर सैकड़ों कॉलेज और हजारों छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करते हुए प्राथमिक राहत प्रदान की है.