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आधा महाराष्‍ट्र बाढ़-बारिश से परेशान, तो औरंगाबाद में कृत्रिम वर्षा की तैयारी

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में कृत्रिम बारिश के प्रयोग के लिए शहर से 40 किलोमीटर के दायरे में उपयुक्त बादल मिला है.

आधा महाराष्‍ट्र बाढ़-बारिश से परेशान, तो औरंगाबाद में कृत्रिम वर्षा की तैयारी
कृत्रिम बारिश का प्रयोग अगले 2 महीने तक जारी रहेगा. (प्रतीकात्मक फोटो)

औरंगाबाद: महाराष्ट्र में इन दिनों पानी से लोग परेशान है. जहां एक ओर बारिश की वजह से सूबे के कई भागों में पानी भरा पड़ा है. वहीं, महाराष्ट्र के कई भागों में सूखा है. जिसके लिए अब कृत्रिम बारिश कराने की योजना बनाई जा रही है. इसके लिए प्रयोग शुरू भी कर दिया गया है.

शुक्रवार को महाराष्ट्र के औरंगाबाद में कृत्रिम बारिश का प्रयोग शुरू किया गया. इसके लिए पहले रडार के माध्यम से बादलों का अभ्यास किया गया. इस दौरान सी-90 विमान ने औरंगाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरी.

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2 महीने तक जारी रहेगा प्रयोग
महाराष्ट्र के औरंगाबाद में कृत्रिम बारिश के प्रयोग के लिए शहर से 40 किलोमीटर के दायरे में उपयुक्त बादल मिला है. सूत्रों के अनुसार, कृत्रिम बारिश का प्रयोग अगले 2 महीने तक जारी रहेगा. इस दौरान विमान में एक पायलट और 2 विशेषज्ञों की टीम मौजूद थी. यह विमान सीड्स क्लाऊडिंग करेगा.

कई हिस्सों में सुखा और बाढ़
महाराष्ट्र में कोंकण, पश्चिम महाराष्ट्र और उत्तर महाराष्ट्र में बाढ़ के हालात है. तो दूसरी ओर महाराष्ट्र का मराठवाडा इलाका में अगस्त महिने तक बारीश ही नहीं हुयी. ऐसे में सूखाग्रस्त मराठवाड़ा को राहत देने के लिए कृत्रिम बारिश का प्रयोग औरंगाबाद में शुक्रवार (9 अगस्त) से शुरु किया गया. औरंगाबाद एअरपोर्ट से दोपहर 1.30 बजे सी-90 विमान ने उड़ान भरी थी. 

सी 90 विमान लाया गया औरंगाबाद
इस कृत्रिम बारिश के प्रयोग के लिए सी-90 विमान औरंगाबाद में लाया गया है. क्लाऊड सिडिंग के लिए सी-90 विमान को 48 फ्लेअर्स (flares) जोड़े गए है. औरंगाबाद डिविजनल ऑफिस पर रडार और नियंत्रण कक्ष बनाए गए है. 

पायलट को दी जाएगी जानकारी
इस रडार की सहायता से बादलों का अभ्यास किया जाएगा. इस दौरान बारिश के लिए आवश्यक बादल कहां मौजूद है इसकी जानकारी विमान के पायलट को उपलब्ध कराई जाएगी. उसके बाद औरंगाबाद एअरपोर्ट से क्लाऊड सिडिंग के लिए आया सी 90 विमान उड़ान भरेगा.

होगी लगातार मॉनिटरिंग
औरंगाबाद मे अगले 2 महीनों के लिए यह कृत्रिम बारिश का प्रयोग जारी रहेगा. अगले दो महीने तक कृत्रिम बारीश के लिए बने नियंत्रण कक्ष में हर दिन सुबह विशेषज्ञों की मिटिंग होगी. हर दिन बादलों का अभ्यास किया जाएगा. इसके साथ ही कृत्रिम बारीश कहां कराना है इसपर फैसला होगा. 

कम बारिश वाले इलाकों में होगा प्रयोग
इस दौरान प्रदेश के औरंगाबाद, सोलापूर, नागपूर, मुंबई और पुणे में रडार की मदद इस तरह का प्रयोग किया जाएगा. इस प्रयोग के लिए महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार से अनुमति ली गयी है. प्रदेश में औसत से कम बारिश वाले जिलो में ही यह प्रयोग किया जाएगा. 

9 अगस्त से हुई शुरुआत
शुरुवात में जुलाई महिने के अंतिम चरण में कृत्रिम बारिश का प्रयोग राज्य सरकार करनेवाली थी. लेकिन अब अगस्त के पहले हफ्ते में शुरुआत करने का फैसला हुआ. जिसके बाद शुक्रवार (9 अगस्त) को इसकी शुरुआत हुई. अब यह प्रयोग कितना सफल होता है, यह देखने वाली बात होगी.

अधिकारी लेंगे निर्णय
नोडल ऑफिसर सतिश खडके ने बताया कि 9 अगस्त को कृत्रिम बारिश के प्रयोग की शुरुवात हुई है. अगले 2 महिने तक यह प्रयोग जारी रहेगा. इस दौरान हर दिन सुबह बादलों का अभ्यास किया जाएगा और क्लाऊड सिंडिंग का निर्णय संबंधित अधिकारी लेंगे.