डीडवाना: सोशल मीडिया पर मानवता की सेवा, हाथों के ट्रांसप्लांट के लिए जुटाई 27 लाख की राशि

सोशल मीडिया पर मुहिम के जरिये श्रवण रेवाड़ और प्रताप बुरबक ने देश-विदेश में अपने दोस्तों से 27 लाख की राशि जुटा ली और दस लाख की राशि प्रेमाराम का परिवार जुटाएगा.

डीडवाना: सोशल मीडिया पर मानवता की सेवा, हाथों के ट्रांसप्लांट के लिए जुटाई 27 लाख की राशि
अंगदान करके दूसरों के जीवन में खुशियों की सौगात दी जा सकती है.

हनुमान तंवर, डीडवाना: सोशल मीडिया का सदुपयोग करें तो यह बहुत ही फायदेमंद है. डीडवाना के प्रवासी युवाओं द्वारा सोशल मीडिया का सदुपयोग मानवता की सेवा के लिए किया जा रहा है, जिसकी इन दिन देश ही नहीं, विदेशों तक चर्चा हो रही है.

दरअसल, युवाओं की सोशल मीडिया से एक बिना हाथ के युवक को हाथ देने के लिए चलाई जा रही मुहिम रंग ला रही है. अजमेर जिले के रूपनगढ़ कस्बे के नजदीक एक गांव है. कोटड़ी में किसान परिवार में जन्मे प्रेमाराम खुशी से अपना बचपन बिता रहे थे. इसी दौरान वर्ष 2008 में एक अनहोनी उस वक्त घट गई, जब प्रेमाराम अपने चाचा के साथ खेतों में काम कर रहे थे. इसी दौरान करंट आया और प्रेमाराम के दोनों हाथों को लील गया. 

उस मनहूस दिन से प्रेमाराम की जिंदगी दुखों भरी हो गई और प्रेमाराम अपने रोजमर्रा के कामों के लिए भी दूसरों पर निर्भर हो गए. प्रेमाराम के इलाज के लिए पता किया तो पहले तो देश मे ही नामुमकिन लगा मगर अब केरला के कोची के एक इंस्टिट्यूट में इलाज संभव बताया जा रहा है मगर इलाज इतना महंगा है कि प्रेमाराम के दोनों हाथ ट्रांसप्लांट कराने 34 लाख का खर्चा आएगा, जो परिवार के लिए संभव नहीं था.

27 लाख की राशि जुटाई गई
प्रेमाराम का परिवार यह खर्च उठाने में सक्षम नहीं हुआ तो चुरू के सिपाही धर्मवीर जाखड़ और प्रेमाराम के चचेरे फौजी भाई सोराम मुंडेल ने सोशल मीडिया पर मुहिम छेड़ी, जिसे डीडवाना के विदेश में प्रवासी युवा श्रवण रेवाड़ प्रताप बुरङक ने उसको पूर्ण कर अंजाम दिया है. सोशल मीडिया पर मुहिम के जरिये श्रवण रेवाड़ और प्रताप बुरबक ने देश-विदेश में अपने दोस्तों से 27 लाख की राशि जुटा ली और दस लाख की राशि प्रेमाराम का परिवार जुटाएगा.

2 जनवरी को कोची जाएंगे प्रेमाराम 
प्रेमाराम के इलाज और हाथों के ट्रांसप्लांट के लिए चलाई गई मुहिम पूरी हो चुकी है और केरल के कोची स्थित अमृता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिचर्स सेंटर में दोनों हाथ ट्रांसप्लांट होंगे. 2 जनवरी को प्रेमाराम का परिवार फ्लाइट से कोची इलाज के लिए जाएगा. कोची के इस हॉस्पिटल द्वारा अब तक 6 लोगों के हाथों का ट्रांसप्लांट सफलता पूर्वक किया जा चुका है. 

क्या है प्रेमाराम के पिता का कहना
प्रेमाराम के पिता ने अपने बेटे के साथ हुई दुर्घटना और उसमे हाथ गंवाने से हुई तकलीफ के बाद लोगों से अपील करते हुए कहते हैं कि हादसों में जवान लोगों की मौत हो जाती है. कई बार कम उम्र में भी युवा अपंग हो जाते हैं. ऐसे में अंगदान करके दूसरों के जीवन में खुशियों की सौगात दी जा सकती है. 

सोशल मीडिया पर मानवता के चलाई गई मुहिम के सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है और हर कोई सोशल मीडिया पर चलाई गई इस मुहिम की दाद दे रहा है. हम आपसे अपील करते हैं कि आप भी सोशल मीडिया का सदुपयोग करे और मानवता की सेवा के साथ साथ देश की एकता और अखंडता के लिए काम करें ताकि सोशल मीडिया भी देश सेवा का एक अच्छा जरिया बन सके.