जयपुर: फ्री FIR रजिस्ट्रेशन ने बढ़ाई पुलिस की मुश्किलें, अपराधों में 60 फीसदी की बढ़ोत्तरी

राज्य में फ्री एफआईआर रजिस्ट्रेशन ने पुलिस का सिरदर्द बढ़ा दिया है. हालत यह है कि फ्री एफआईआर रजिस्ट्रेशन के कारण अपराधों में 60 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी हो गई है. 

जयपुर: फ्री FIR रजिस्ट्रेशन ने बढ़ाई पुलिस की मुश्किलें, अपराधों में 60 फीसदी की बढ़ोत्तरी
फाइल फोटो

विष्णु शर्मा, जयपुर: राज्य में फ्री एफआईआर रजिस्ट्रेशन ने पुलिस का सिरदर्द बढ़ा दिया है. हालत यह है कि फ्री एफआईआर रजिस्ट्रेशन के कारण अपराधों में 60 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी हो गई है. इनमें हत्या, एससी-एसटी, पॉक्सो जैसे गंभीर प्रकृति के अपराध भी शामिल हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि पुलिस अपराध दर्ज नहीं कर रही थी या फिर अपराध बढ़े हैं.

राजस्थान में अलवर के थानागाजी में पति के सामने महिला से गैंगरेप की थाने में एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी. मामले का खुलासा होने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संवेदनशीलता बरतते हुए प्रदेश में थानों में एफआईआर दर्ज नहीं होने पर एसपी ऑफिस में शिकायत दर्ज करने के निर्देश दिए थे. इसके बाद से प्रदेश में एफआईआर दर्ज की जा रही है. या यूं कहें कि राज्य में पुलिस ने फ्री एफआईआर रजिस्ट्रेशन की नीति अपना ली है. 

पुलिस मुख्यालय (Police Headquarters) की ओर से पिछले दिनों एसीएस गृह को पत्र लिखकर जानकारी दी गई कि फ्री एफआईआर रजिस्ट्रेशन की नीति अपनाने के कारण पिछले साल की तुलना में अपराधों में अच्छी-खासी बढ़ोत्तरी हो गई है. इससे पुलिस जांच में दबाव महसूस कर रही है.

पिछले साल की तुलना में नवम्बर 2019 तक अपराधों में 31.4 तक बढ़ गए हैं. अपराध बढ़ने के साथ पुलिस पर अनुसंधान का भार भी बढ़ गया है. नवंबर 2019 तक अनुसूचित जाति अत्याचार के मामलों में 47.57 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई है. अनुसूचित जनजाति अत्याचार के मामले 60.42 प्रतिशत तक बढ़े हैं. महिला अत्याचार के मामलों में 50.26 % की बढ़ोतरी हुई है. बाल यौन अपराध (पॉक्सो एक्ट) के प्रकरणों में 45.23 की वृद्धि हुई है. हत्या, हत्या के अपराध जैसे जघन्य अपराध भी बढ़े हैं. नवंबर तक पिछले वर्ष की तुलना में हत्या के 10% और हत्या के प्रयास में 17% की बढ़ोत्तरी हुई है. लूट, अपहरण और बलात्कार के मामले भी 37 प्रतिशत से बढ़े हैं.

पुलिस मुख्यालय (Police Headquarters) ने गृह विभाग को लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना में इस तरह के सभी मामलों में त्वरित और समयबद्ध अनुसंधान करना होता है. प्रकरणों में बढ़ोत्तरी के कारण पैंडिंग प्रकरणों की संख्या भी बढ़ गई है. इससे पुलिसकर्मी जांच में दबाव महसूस कर रहे हैं. साथ ही अपराधियों को सजा दिलाने में भी मुश्किलें सामने आ रही हैं.