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जयपुर: ट्रिपल तलाक पर बिल से जगी मुस्लिम महिलाओं में उम्मीद, न्याय का भरोसा

बिल के लोकसभा में पेश होने के बाद ट्रिपल तलाक से पीड़ित महिलाएं काफी खुश हैं.

जयपुर: ट्रिपल तलाक पर बिल से जगी मुस्लिम महिलाओं में उम्मीद, न्याय का भरोसा
शुक्रवार को रविशंकर प्रसाद ने बिल प्रस्तुत किया था. (फाइल फोटो)

जयपुर: केंद्र सरकार ने सत्रहवीं लोकसभा में शुक्रवार को ट्रिपल तलाक के खिलाफ मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2019 पेश किया. जिसके बाद लंबे समय से न्याय की बाट जोह रही कानूनी लड़ाई लड़ने वाली मुस्लिम महिलाओं में उम्मीद जगी है.बता दें, इस विधेयक के कानून बनने के बाद ट्रिपल तलाक देने वाले मुस्लिम पुरुषों पर कानूनी कार्रवाई हो सकेगी. माना जा रहा है कि मुस्लिम समाज में महिलाएं सशक्त होंगी और परिवारों का सशक्तीकरण होगा.

बिल के लोकसभा में पेश होने के बाद ट्रिपल तलाक से पीड़ित शबनम काफी खुश है. उनका निकाह 2018 की फरवरी में हुआ था .लेकिन मुस्लिम शरियत के अनुसार शबनम विदा नहीं हुई थी. इस दौरान उनके पति का आना जाना जारी था. कुछ महीने बीत जाने के बाद ससुराल वालों की मांग बढ गई. दहेज के तौर पर वो रुपये मांगते रहे .बेटी के लिए पीहर के पास जो था वो सब कुछ दे दिया गया था. लेकिन उनके ससुराल वालों और पति ने शबनम को तलाक दे दिया.

भारतीय मुस्लिम महिला कन्वेनर व नेशनल विमन वेलफेयर सोसायटी के फाउण्डर निशांत हुसैन ने बताया कि आज सैकडों की संख्या में मुस्लिम महिलाएं ट्रिपल तलाक के कारण पीड़ित हैं. लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है. इस तरह के मामले में महिलाएं थाने जाए तो इस पर कानून नहीं होने के कारण कोई कार्रवाई नहीं की जाती है. बता दें कि पिछले महीने 16 वीं लोकसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद पिछला विधेयक निष्प्रभावी हो गया था. क्योंकि यह राज्यसभा में लंबित था. 

दरअसल, लोकसभा में किसी विधेयक के पारित हो जाने और राज्यसभा में उसके लंबित रहने की स्थिति में निचले सदन के भंग होने पर वह विधेयक निष्प्रभावी हो जाता है. सरकार ने सितंबर 2018 और फरवरी 2019 में दो बार तीन तलाक अध्यादेश जारी किया था. इसका कारण यह है कि लोकसभा में इस विवादास्पद विधेयक के पारित होने के बाद वह राज्यसभा में लंबित रहा था.