चूरू: 33वें दिन उग्र हो गए धरने पर बैठे किसान, किया तहसील कार्यालय का घेराव

मंच के माध्यम से किसान नेताओं ने सरकार से 20 हेक्टेयर रकबा जोड़ने पर सवाल किया और पूछा कि कांग्रेस सरकार ने नया रकबा कहां जोड़ा है, सरकार जनता को गुमराह न करे.

चूरू: 33वें दिन उग्र हो गए धरने पर बैठे किसान, किया तहसील कार्यालय का घेराव
किसानों ने तहसील कार्यालय के आगे डेरा डाल दिया.

नारेंद्र, चूरू: अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले तहसील कार्यालय के आगे किसानों के धरने ने 33वें दिन विशाल रूप ले लिया. पूरे क्षेत्र के किसान धरना स्थल पर इकट्ठे हुए और तहसील कार्यालय का घेराव किया.

तहसील कार्यालय के सामने 14 नवंबर से बीमा क्लेम सहित 15 सूत्री मांगों को लेकर किसान धरने पर बैठे हैं लेकिन सरकार द्वारा किसानों की उचित मांगों के समाधान के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई. स्थानीय विधायक द्वारा किसानों के द्वारा अपनी वाजिब मांगों को लेकर लगाए जा रहे धरने को किसानों के समय और पैसे की बर्बादी बताए जाने पर भी किसानों में आक्रोश नजर आया.

मंच के माध्यम से किसान नेताओं ने सरकार से 20 हेक्टेयर रकबा जोड़ने पर सवाल किया और पूछा कि कांग्रेस सरकार ने नया रकबा कहां जोड़ा है, सरकार जनता को गुमराह न करे.

पुलिस जाब्ते ने किसानों को अंदर घुसने से रोका
तहसील का घेराव करने से पहले किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में बाजार में रैली निकाली. करीब 3 बजे किसानों ने तहसील कार्यालय के दरवाजे पर धावा बोल दिया और जबर्दस्ती कार्यालय में घुसने का प्रयास किया लेकिन शांति व्यवस्था के लिए उपस्थित पुलिस जाब्ते ने किसानों को अंदर घुसने से रोका.

4 बजे प्रशासन की तरफ से एसडीएम अर्पिता सोनी ने किसानों के प्रतिनिधि मंडल को वार्ता के लिए बुलाया. एसडीएम सोनी ने उच्च अधिकारियों और बीमा अधिकारी से फोन पर बात की पर किसान नेता संतुष्ट नजर नहीं आए और वार्ता विफल रही.

किसानों ने तहसील कार्यालय के आगे डेरा डाला
किसानों ने तहसील कार्यालय के आगे डेरा डाल दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की. शाम 5 बजे बाद प्रशासन द्वारा 23 तारीख को चूरू में वार्ता के आश्वासन के बाद किसानों ने पड़ाव हटाया लेकिन मांगें नहीं माने जाने तक धरना जारी रहेगा.

प्रजापत ने कहा विभिन्न मांगों को लेकर किसान ने 14 नवंबर से धरने पर बैठे हैं. आज किसानों ने तहसील कार्यालय का घेराव किया है. प्रशासन ने वार्ता के लिए बुलाया पर वार्ता विफल रही, जब तक हमारी मांगों को नहीं माना जाएगा, धरना प्रदर्शन जारी रहेगा.