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शादी ब्याह में ढोल बजाने वाले राजस्थानी, अब यूरोप में लहराएंगे देश का परचम

राजस्थान के धोद बैंड समूह के कलाकार यूरोप के फ्रांस, जर्मनी, इटली, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड, स्वीडन सहित कई देशों के सर्द माहौल में हजारों लोगों को अपने मस्त संगीत से सराबोर कर राजस्थान और पूरे देश का नाम रौशन करेंगे. 

शादी ब्याह में ढोल बजाने वाले राजस्थानी, अब यूरोप में लहराएंगे देश का परचम
धोद ग्रुप अपनी अलग पहचान बना चुका है. (प्रतीकात्मक फोटो)

जयपुर: अगले महीने जब देश के इस मरूस्थलीय प्रदेश में भारी गर्मी पड़ रही होगी, यहां के धोद बैंड समूह के कलाकार यूरोप के फ्रांस, जर्मनी, इटली, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड, स्वीडन सहित कई देशों के सर्द माहौल में हजारों लोगों को अपने मस्त संगीत से सराबोर कर राजस्थान और पूरे देश का नाम रौशन कर रहे होंगे. यहां खास बात यह है कि 25 ऐसे युवक इस बैंड का हिस्सा हैं जो कभी ब्याह शादियों में ढोल बजाया करते थे.

धोद बैंड ग्रुप के संस्थापक रईस भारती ने 'भाषा' को बताया कि बैंड अपनी पहली प्रस्तुति 6 जून को पेरिस के डिज्नीलैंड में शुरू करेगा और उसके बाद तीन माह तक इसके कलाकार प्रतिदिन अपनी प्रस्तुति से यहां आने वाले हजारों लोगों को राजस्थानी संगीत की लय ताल पर झूमने को मजबूर कर देंगे.

मिला है जापान से अवार्ड
भारती को इस वर्ष फरवरी में जापान के टोक्यो में एक संस्थान की ओर से नृत्य और संगीत के जरिये दुनिया के विभिन्न देशों के बीच मैत्री बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान के लिये 'अवार्ड फॉर कल्चर एबेंसेडर' से नवाजा गया है.

50 कलाकारों का बनाया गया है समूह
उन्होंने बताया कि इस साल धोद ग्रुप ने राजस्थान के कलाकारों को नई दिशा देने के लिये 50 कलाकारों का एक समूह बनाया है. इसके लिए छह माह पूर्व तैयारी शुरू की गई और शादी ब्याह में ढोल बजाने वाले 100 लोगों में से 19 से 25 वर्ष की आयु के 25 श्रेष्ठ युवकों का चयन किया गया. इन युवकों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी ढोल बजाने की कला का प्रदर्शन करने के लिए तैयार किया गया.

इंटरनेशनल स्तर पर एक पहचान की उम्मीद
वह कहते हैं कि अमूमन ढोल बजाने वालों को वह सम्मान और मुकाम नहीं मिल पाता, जो दूसरे साज बजाने वालों को मिलता है. ऐसे में वह शादी ब्याह तक ही सिमटकर रह जाते हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि धोद बैंड में शामिल किया गया राजस्थान के युवाओं का यह दल अपने ढोल की थाप पर लोगों को थिरकने को मजबूर कर देगा और इससे ढोल को इंटरनेशनल स्तर पर एक नयी पहचान मिलेगी. 

पेरिस में देंगे शानदार प्रस्तुति
उन्होंने बताया कि अपने हर कार्यक्रम को यादगार और ज्यादा से ज्यादा लोकप्रिय बनाने के लिए ये कलाकार पिछले 3 महीने से मेहनत कर रहे है. ये कलाकार धोद बैंड के कलाकारों के साथ मिलकर पेरिस में एक कार्यक्रम में प्रस्तुति देंगे जहां हर रोज तकरीबन पचास हजार दर्शक आते हैं. यह शो वहां हर रोज आयोजित किया जाता है. इसके अलावा पांच अन्य देशों में भी बैंड अपने कार्यक्रम पेश करेगा.

उन्होंने कहा कि धोद ग्रुप राजस्थान का पहला ऐसा ग्रुप है जो साल के आठ महीने विश्व भ्रमण पर रहता है. 

एक हजार कलाकारों को मिली है पहचान
उन्होंने कहा कि इस ग्रुप के माध्यम से वह अब तक एक हजार कलाकारों को दुनिया के स्तर पर पहचान दिला चुके है. धोद ग्रुप में राजस्थानी कला, तबला, ढोलक, करताल, गायन, विवाह समारोह में बजने वाला ब्रास बैंड, राजस्थानी नृत्य, कालबेलिया डांस, भवई डांस आदि का प्रदर्शन किया जाता है. 

उन्होंने बताया कि डिज्नीलैंड के निमंत्रण पर इस साल पहली बार धोद बैंड भारत का प्रतिनिधित्व करेगा. यहां तीन महीने तक प्रतिदिन करीब 50 हजार लोग यह शो देखेंगे. धोद बैंड 18 साल में करीब 100 देशों में शो कर चुका है. ग्रुप ने लंदन में डायंमड जुबली सेलिब्रेशन में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पेरिस यात्रा के दौरान स्वागत संगीत में अपने संगीत की प्रस्तुति दी थी. ग्रुप ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम, फ्रांस के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिये भी संगीत बजाया है.