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बाड़मेर: फसली ऋण के लेकर जिला अधिकारियों ने जताई चिंता, सरकार से की यह मांग

किसानों को फसली ऋण देने के लिए सहकारी समितियों के पास पैसा नहीं है. सहकारी बैंकों की पूंजी पर गहरा संकट आ गया है.

बाड़मेर: फसली ऋण के लेकर जिला अधिकारियों ने जताई चिंता, सरकार से की यह मांग
किसानों को फसली ऋण नहीं मिल पाया है.

भूपेश आचार्य/बाड़मेर: किसानों को खरीब की फसल बुवाई के बाद भी अभी तक फसली ऋण नहीं मिल पाया है. जिसके बाद गहलोत सरकार के सामनें कुछ जिला अधिकारियों ने प्रदेश में कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई है. जिला अधिकारी ने बताया है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो स्थितियां बिगड़ने में देर नहीं लगेगी. बाड़मेर के जिला अधिकारी हिमांशु गुप्ता ने बजट की मांग उठाई. उन्होंने कहा कि बाड़मेर में जो लक्ष्य है, उसके अनुपात में बहुत कम ऋण वितरण हुआ है. यहां कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है. 29 अगस्त को मुख्यमंत्री गहलोत का बाड़मेर दौरा भी है.

सरकार ने कर्ज माफी कर वाहवाही तो लूट ली, लेकिन अब किसानों को फसली ऋण देने के लिए सहकारी समितियों के पास पैसा नहीं है. सहकारी बैंकों की पूंजी पर गहरा संकट आ गया है. यहां 600 करोड़ रुपए किसानों को बांटने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन किसानों को फसली ऋण नहीं मिल पाया है. ऐसे में किसान मुश्किल में है. वहीं द बाड़मेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के अधीन संचालित ग्राम सेवा सहकारी समितियों पर ताले लटक रहे हैं. व्यवस्थापक विभिन्न मांगों को लेकर मुख्य कार्यालय के आगे धरना दे रहे हैं अब किसानों को फसली ऋण नहीं मिलने पर जिला शाखा के चक्कर काट रहे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि अब किसानो का धैर्य टूट रहा है जिसके बाद किसान सड़कों पर उतर सकते हैं.

मुख्य सचिव ने वीडियो कांफ्रेंस सहकारी बैंकों के फसली ऋण, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना तथा किसान मान धन योजना की प्रगति जानने के लिए आयोजित की. कांफ्रेंस में सबसे पहले बाड़मेर कलक्टर हिमांशु गुप्ता ने बजट की मांग उठाई. उन्होंने कहा कि बाड़मेर में जो लक्ष्य है, उसके अनुपात में बहुत कम ऋण वितरण हुआ है. यहां कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है. 29 अगस्त को मुख्यमंत्री का बाड़मेर कार्यक्रम है. ऐसे में किसानों का ऋण मिलना जरूरी है. सरकार जल्द इसके लिए बजट उपलब्ध कराए.

ऋण प्रणाली ऑनलाइन के बाद समिति कर्मचारियों की हड़ताल किसानों के लिए संकट बन गई है. यहां अगस्त माह बीतने को रहा है और किसानों खरीफ फसल ऋण नहीं मिला है. जबकि प्रति वर्ष मई में ऋण मिल जाता है.