निजी अस्पतालों में लगेंगे सरकारी हॉस्पिटल के बचे वेंटिलेटर-ऑक्सीजन, फ्री में मिलेगी सुविधा

Bharatpur News: आदेश में कहा कि सभी कलेक्टर अपने-अपने क्षेत्र में स्थित राजकीय चिकित्सालयों में वेंटिलेटर और ऑक्सीजन कन्सन्ट्रेटर लगाने के बाद जो अतिरिक्त बचे उसे निजी अस्पतालों में लगवाएं.

 निजी अस्पतालों में लगेंगे सरकारी हॉस्पिटल के बचे वेंटिलेटर-ऑक्सीजन, फ्री में मिलेगी सुविधा
ऑक्सीजन कंसंट्रेटर-वेंटिंलेटर को लेकर सरकार ने उठाया बड़ा कदम. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Bharatpur: भरतपुर जिला कलेक्टर हिमांशु गुप्ता की पहल पर अब राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी कलेक्टर्स को वेंटीलेटर और ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर को लेकर निर्देश जारी किए हैं. इसके तहत अब सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर-ऑक्सीजन कंसंट्रेटर लगाने के बाद शेष वेंटिलेटर-ऑक्सीजन कंसंट्रेटर निजी अस्पताल में लगाए जा सकेंगे. लेकिन निजी अस्पताल मरीज से वेंटिलेटर-ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का कोई चार्ज नहीं ले सकेंगे.
 
सरकार ने भरतपुर कलेक्टर हिमांशु गुप्ता की पहल को आगे बढ़ाते हुए जिला कलेक्टर को यह व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिया, जिससे संसाधन होने से जिंदगियों को बचाया जा सके. कोरोना महामारी में बढ़ती मौतों की संख्या ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है. 

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हर रोज 150 से ज्यादा लोगों की कोरोना से जान जा रही है. वहीं, सैंकड़ों की संख्या में मरीज हर रोज अस्पताल में भर्ती होने के लिए चक्कर लगाते है, लेकिन उन्हे निराशा हाथ लग रही है. मौत के बढ़ते आंकड़ें को देखते हुए सरकार ने एक अहम निर्णय लिया है. इस निर्णय के तहत अब सरकार निजी अस्पताल संचालकों को वेंटिलेटर और ऑक्सीजन कन्सन्ट्रेटर उपलब्ध करवाएगी.

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को सभी जिला कलेक्टरों को एक आदेश जारी किए हैं. इन आदेशों में कहा कि सभी कलेक्टर अपने-अपने क्षेत्र में स्थित राजकीय चिकित्सालयों में वेंटिलेटर और ऑक्सीजन कन्सन्ट्रेटर लगाने के बाद जो अतिरिक्त बचे उसे निजी अस्पतालों में लगवाएं. हालांकि, इसके लिए सरकार ने एक शर्त भी रखी है.

ये उपकरण सरकार निजी अस्पतालों में मुफ्त में तो लगा देगी, लेकिन अस्पताल संचालक इन उपकरणों का चार्ज मरीज से नहीं वसूलेंगे. इसके लिए कलेक्टर को इसकी प्रॉपर मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं. क्योंकि पिछले दिनों ऐसा ही एक मामला भरतपुर में सामने आने के बाद बवाल मच गया था.

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बता दें कि राज्य के कई राजकीय अस्पतालों में पीएम केयर फंड (PM Care Fund) से आए वेंटिलेटर पिछले कई महीनों से डिब्बों में यूं ही बंद पड़े हैं. इसके पीछे का कारण अस्पतालों में इन्हे इंस्टॉल करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होना है. इसके अलावा एक कारण .स्पतालों में इन वेंटिलेटर को मॉनिटरिंग करने के लिए ट्रेंड स्टाफ की कमी भी है। इसे देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है.

पिछले दिनों राज्य के भरतपुर जिले के राजकीय अस्पताल के 10 वेंटिलेटर जिले के एक निजी अस्पताल संचालक को किराए पर दे दिए. 2 हजार रुपए प्रतिदिन के किराए के हिसाब से लिए इन वेंटिलेटर पर भर्ती मरीजों से अस्पताल संचालक 20-30 हजार रुपए प्रतिदिन का चार्ज वसूल रहे थे. ये वेंटिलेटर पीएम केयर फंड से अस्पताल को मिले थे.

सांसद रंजीता कोली ने जब पीएम केयर फंड से अस्पताल को मिले वेंटिलेटर की जानकारी मांगी तो इसका खुलासा हुआ. इस मामले पर जमकर बवाल भी मचा. इस मामले पर भरतपुर कलेक्टर ने बताया था कि आरबीएम अस्पताल में इस समय 60 वेंटिलेटर हैं, जिसमें से 20 कोरोना वार्ड में लगे हैं और 20 वेंटिलेटर सामान्य मरीजों के लिए ICU वार्ड में लगाए है. 

डीएम ने कहा था कि 20 वेंटिलेटर उपयोग में नहीं आ रहे थे, क्योंकि अस्पताल में ऑक्सीजन पॉइंट की कमी है. इसलिए सभी प्राइवेट अस्पतालों को कहा गया है कि अगर किसी को वेंटिलेटर की जरूरत है तो वे 60 हजार रुपए प्रति माह के हिसाब से वेंटिलेटर किराए पर ले सकते हैं, जिसके बाद एक प्राइवेट अस्पताल को 10 वेंटिलेटर किराए पर दिए थे.

(इनपुट-देवेंद्र सिंह)