close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

राजस्थान: केयर्न ने तेल पर रॉयल्टी का भुगतान रोका, ONGC से विवाद के बाद लिया फैसला

सूत्रों ने बताया कि विवाद की वजह से केयर्न ने सार्वजनिक क्षेत्र की आयल एंड नैचुरल गैस (ओएनजीसी) को जुलाई, 2017 से 40 करोड़ डॉलर की रॉयल्टी का भुगतान नहीं किया है.

राजस्थान: केयर्न ने तेल पर रॉयल्टी का भुगतान रोका, ONGC से विवाद के बाद लिया फैसला
ओएनजीसी राजस्थान के बाड़मेर ब्लॉक की लाइसेंस धारक है.

नई दिल्ली: खनन क्षेत्र के दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल की वेदांता लिमिटेड की इकाई केयर्न आयल एंड गैस ने राजस्थान ब्लॉक से उत्पादित अपने हिस्से के कच्चे तेल पर रॉयल्टी का भुगतान रोक दिया है. लागत वसूली को लेकर भागीदार ओएनजीसी के साथ विवाद के चलते केयर्न ने यह कदम उठाया है. 

मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि विवाद की वजह से केयर्न ने सार्वजनिक क्षेत्र की आयल एंड नैचुरल गैस (ओएनजीसी) को जुलाई, 2017 से 40 करोड़ डॉलर की रॉयल्टी का भुगतान नहीं किया है. ओएनजीसी राजस्थान के बाड़मेर ब्लॉक की लाइसेंस धारक है. यह देश में जमीनी क्षेत्र में होने वाली सबसे बड़ी तेल खोज है.

ओएनजीसी की इस क्षेत्र से उत्पादित तेल के मूल्य पर 20 प्रतिशत की दर से रॉयल्टी भुगतान करने की जिम्मेदारी है. रॉयल्टी का पूरा भुगतान ओएनजीसी को करना है चाहे उसकी उसमें कितनी भी हिस्सेदारी क्यों न हो.

हालांकि, 2011 में जब ओएनजीसी ने केयर्न का वेदांता द्वारा अधिग्रहण को मंजूरी दी थी. उस समय दोनों भागीदारों के बीच इस बात की सहमति बनी थी कि वे अपनी क्षेत्र में हिस्सेदारी के अनुपात में रॉयल्टी का भुगतान करेंगे. ऐसे में केयर्न को अपने हिस्से के 70 प्रतिशत कच्चे तेल और ओएनजीसी को 30 प्रतिशत रॉयल्टी का भुगतान करना था. 

यह कार्य प्रतिपूर्ति के जरिये किया जाना था. यानी ओएनजीसी 100 प्रतिशत रॉयल्टी का भुगतान करेगी और उसके बाद केयर्न उसे 70 प्रतिशत की भरपाई करेगी. सूत्रों ने बताया कि अपने हिस्से की भरपाई का यह काम जुलाई, 2017 से बंद है. यदा कदा किसी महीने में कुछ भुगतान हुआ है. इस बारे में संपर्क करने पर केयर्न के प्रवक्ता ने कहा कि उस पर संयुक्त उद्यम भागीदार का कुछ भी बकाया नहीं है. हालांकि, प्रवक्ता ने इस बारे में अधिक खुलासा नहीं किया. 

वहीं ओएनजीसी के अधिकारियों ने दोनों भागीदारों के बीच विवाद और केयर्न से रॉयल्टी की प्रतिपूर्ति में समस्या की बात मानी. सूत्रों ने कहा कि खोज की लागत रिकवरी मामले में विवाद को लेकर केयर्न ने रॉयल्टी का भुगतान रोका है. 

वास्तव में सरकार ने कुछ साल पहले उस क्षेत्र में भी तेल एवं गैस खोज की अनुमति दी है जिस क्षेत्र में पहले से ही खोज की जा चुकी है और उसे उत्पादन करने वाला क्षेत्र माना जा चुका है. ऐसे क्षेत्र में खोज पर आने वाली लागत को तेल की बिक्री से मिलने वाली आय में से भी काट लिया जाता है. ऐसे क्षेत्र में खोज और विकास कार्य पूरा होने पर खर्चे की कटौती के बाद होने वाले मुनाफे को भागीदारों और सरकार के बीच बांटा जाता है.

ओएनजीसी इसमें केयर्न द्वारा किये गये कुछ खर्च को लेकर सहमत नहीं है और वह इस लागत की राजस्व में से कटौती के पक्ष में नहीं है. केयर्न ने मामले को मध्यस्थता अदालत में उठाया है ताकि इसका समाधान हो सके. बहरहाल यह विवाद बना हुआ है.