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चूरू: ताल छापर का नमक उद्योग क्षेत्र के लिए था वरदान, अब हाल बेहाल

विश्वविख्यात कृष्ण मृग अभयारण्य की सीमा पर करीब 1000 एकड़ में फैले लवण उद्योग का अब दम टूटने लगा है. सरकार ने नमक उद्योग लगाकर इस उद्योग की कभी सुध नहीं ली. 

चूरू: ताल छापर का नमक उद्योग क्षेत्र के लिए था वरदान, अब हाल बेहाल
प्रतीकात्मक तस्वीर

चूरू: जिले का ताल छापर काली रनों के धान के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है बल्कि यहां पर नमक उद्योग भी आजादी से पहले अपने पांव जमा चुका था. देश की आजादी के करीब एक दशक बाद रेतीले धोरों के पूर्वी मुहाने पर चूरू जिले के ताल छापर इलाके में रोजगार के लिए नमक उद्योग वरदान साबित हुआ था. हालात और परिस्थितियों से घिरा यह उद्योग करीब चार दशक बाद आज रेंगने लगा है.

विश्वविख्यात कृष्ण मृग अभयारण्य की सीमा पर करीब 1000 एकड़ में फैले लवण उद्योग का अब दम टूटने लगा है. सरकार ने नमक उद्योग लगाकर इस उद्योग की कभी सुध नहीं ली. नमक व्यवसायियों का कहना है कि सन 1962 में करीब 35 से 40 नमक उद्योग शुरू हुए जो आज 5 से 7 तक सिमट कर रह गए. नमक व्यवसाई कंचन देवी पिंचा ने बताया कि राव मटीरियल (नमक का पानी) शुरुआती दिनों में 4-6 फीट की गहराई पर उपलब्ध था. जो कुईओ से आसानी से निकल जाता था जो समय 300 से 400 फीट पर गहराई पर चला गया. 

डीजल से निकलने वाला नमक की 12 यूनिट महंगी बिजली और महंगे श्रमिक खर्च के बाद भी उत्पादन की मात्रा बहुत कम हो गई है. महंगे श्रमिक और महंगी बिजली ने लवण उद्योग की कमर तोड़ दी है. नमक व्यवसाई जय प्रकाश सोनी ने बताया कि तालछापर नमक उद्योग से 15 से 20 गाड़ियां नियमित हरियाणा निर्यात होती थी जो आज एक-दो गाड़ी तक सिमट कर रह गई हैं.

जूली फ्लोरा बना कोढ़ में खाज करीब छह दशक पुराने इस उद्योग में अधिक खर्च और उत्पादन की कमी के कारण हालात दयनीय बने हुए हैं और तो और नमक प्लॉटों के आसपास बहुतायत की संख्या में पैदा हुए जुली फ्लोरा (विदेशी बबुल) भी रॉ मटीरियल को कम करने में सहायक सिद्ध हो रहा है. जिसे यदि सरकार निकलवा दे तो नमक उत्पादन में कुछ वृद्धि होने की संभावना है.

श्रमिक रोजगार की तलाश में एक समय था जब लवण उद्योग ताल छापर, देवानी, रामपुर, सुर वास, गोपालपुरा, गुलेरिया गांव के श्रमिकों के लिए वरदान साबित हो रहा था. उत्पादन की कमी और फेल होते इस उद्योग ने श्रमिकों को रोजगार की तलाश में भटकने पर विवश कर दिया है.

अभयारण्य विस्तार में नमक उद्योग व्यवसाय जमीन छोड़ने को तैयार व्यवसायियों से जब इस विषय पर वार्ता हुई तो उन्होंने बताया कि सरकार यदि निश्चित मुआवजा दे तो अभयारण्य विस्तार के लिए हम भूमि छोड़ने को भी तैयार हैं क्योंकि नमक का उत्पादन अब ना के बराबर होता है कुछेक नमक प्लॉट ही बचे हैं जो वर्तमान में नमक उत्पादन कर रहे हैं.