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जयपुर में टैंकरों के पानी की शुद्धता पर संदेह, अधिकारियों को दिए जांच के निर्देश

जयपुर जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में पीएचईडी की ओर से प्रतिदिन 1500 टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है. जहां पानी की शुद्धता संदेह के घेरे में है. 

जयपुर में टैंकरों के पानी की शुद्धता पर संदेह, अधिकारियों को दिए जांच के निर्देश
शहरी क्षेत्र के निजी टैंकर संचालक बिना जांच के पानी की सप्लाई कर रहे हैं.

जयपुर: भीषण गर्मी के दौर में पेयजल संकट से जूझ रहे लोगों की प्यास बुझाने के लिए सरकारी और गैर सरकारी टैंकरों से जिस पानी से सप्लाई की जा रही है. उसकी शुद्धता (गुणवत्ता) की कोई गारंटी नहीं है. टैंकरों से आपूर्ति विभाग के स्तर पर भी की जा रही है और लोग निजी स्तर पर भी टैंकरों से पानी मंगवाकर अपनी प्यास बुझाने के प्रबंध कर रहे हैं. विशेष गंभीर मामला सरकारी स्तर पर संचालित टैंकरों से पानी आपूर्ति करने का है. यह टैंकर किन जल स्त्रोतों से पानी की आपूर्ति कर रहे हैं, उनके बारे में न तो प्रशासन के अधिकारियों को पता है और न ही जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अभियंताओं को इसकी जानकारी है. टैंकरों से जो पानी लोगों के घरों तक पहुंचाया जा रहा है, उस पानी की प्रयोगशाला में जांच भी नहीं कराई है.

जयपुर जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में पीएचईडी की ओर से प्रतिदिन 1500 टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है. इतनी अधिक मात्रा में पानी की शुद्धता संदेह के घेरे में है. पीएचईडी ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में जल वितरण के लिए अलग-अलग संवेदक अधिकृत किए हुए हैं. तो कुछ जगहों पर प्राइवेट टैंकरों से पानी की सप्लाई की जाती है. इनमें से शहरी क्षेत्र के निजी टैंकर संचालक बिना जांच के पानी की सप्लाई कर रहे हैं. 

वहीं ग्रामीण क्षेत्र के ठेकेदारों ने जांच की बात तो दूर अभी तक पानी के नमूने विभाग के कार्यालय में जमा नहीं कराए हैं. नियम यह है कि पानी की आपूर्ति से पहले पानी के नमूने की जांच हो जानी चाहिए. साथ ही यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि संवेदक जिस जल स्रोत के पानी के नमूने दे रहा है वहां के पानी की आपूर्ति करेगा. जब पानी की मांग कम हुई तो जयपुर कलक्टर साहब की नींद खुली है. शिकायतों के सामने आने के बाद अब जिला कलक्टर जगरूप सिंह यादव ने संवेदक के जल स्त्रोतों के पानी की जांच कराने के निर्देश दिए हैं.

जयपुर जिले में संवेदक फर्म और निजी टैंकर संचालकों ने टैंकरों से जलापूर्ति तो शुरू कर दी, लेकिन अभियंताओं की मेहरबानी के चलते जल स्त्रोतों के पानी की प्रयोगशाला में जांच नहीं कराई. इतना ही नहीं जिन जल स्त्रोतो से जलापूर्ति की जा रही है उनके बारे में विभाग को जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है. वहीं जो पानी वितरित किया जा रहा है उसकी लैबोरेट्री जांच तो दूर नमूने भी संकलित नहीं किए गए है. ऐसे में जो पानी जनता तक पहुंचाया जा रहा है, उसकी शुद्धता पर सवाल खडे हो रहे हैं. 

वहीं मामले को लेकर कलक्टर जगरूप सिंह यादव ने जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में निजी नलकूपों से सप्लाई किए जा रहे पेयजल की गुणवत्ता की जांच सुनिश्वचित करने के निर्देश दिये है. यादव ने बताया की नए नलकूप स्थापित करने का कार्य प्रगति पर है. अब तक कुल 732 नलकूप में से 556 नलकूप खोदे जा चुके हैं. 446 नलकूपों द्वारा पेयजल सप्लाई सुचारू रूप से चालू कर दी गई है. जिला कलक्टर ने कहा कि नये खोदे गये सभी नलकूपों द्वारा पेयजल सप्लाई चालू करे और शेष नलकूपों का कार्य भी तत्काल प्रभाव से पूरा करने के निर्देश दिए है.

कलक्टर जगरूप सिंह यादव भी खुद मानते हैं की टैंकरों के भराव वाले जलस्त्रोतों के पानी की जांच जरूरी है, लेकिन बिना गुणवत्ता जांच जल वितरण गलत है. जलदाय विभाग के अभियंताओं से रिपोर्ट तलब की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी. टैंकरों के पानी की जांच के लिए नमूने संकलित किए जा रहें है. विभागीय प्रयोगशाला में इनकी जांच होगी. नमूनों के संकलन में हुई देरी की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.