दौसा: बिजली विभाग उड़ा रहा सरकारी आदेशों की धज्जियां, किसान परेशान

राज्य सरकार किसानों को प्रोत्साहन देने के लिए एक से एक बेहतर योजनाएं लॉन्च कर रही है लेकिन दौसा का बिजली विभाग राज्य सरकार की योजना पर पानी फेरता दिख रहा है.  

दौसा: बिजली विभाग उड़ा रहा सरकारी आदेशों की धज्जियां, किसान परेशान
दौसा का किसान संघ

दौसा: राज्य सरकार किसानों को प्रोत्साहन देने के लिए एक से एक बेहतर योजनाएं लॉन्च कर रही है लेकिन दौसा का बिजली विभाग राज्य सरकार की योजना पर पानी फेरता दिख रहा है. हालात यह है कि किसानों को अब आंदोलन के लिए आमदा होना पड़ा है. दौसा का किसान संघ किसानों की मदद के लिए मैदान में आ गया है. दौसा जिले का किसान विद्युत विभाग से बेहद परेशान है. किसानों को समय पर बिजली नहीं मिल पा रही है. सरकार किसानों को सिंचाई के लिए दिन में बिजली देने की बात करती है तो दौसा जिले के किसानों को सिंचाई के लिए रात्रि में बिजली दी जा रही है. ऐसे में कड़ाके की ठंड में किसान खेतों को पानी नहीं दे पा रहे हैं.

किसानों का कहना है कि सरकार ने चुनाव के दौरान ढेरो वादे किये थे, लेकिन सरकार उन वादों पर खरा नहीं उतरा रही है. किसान नेता रमेश चंद का कहना है कि किसानों को सिंचाई के लिए रात्री में बिजली दी जा रही है जो इस कड़ाके की सर्दी में किसानों के साथ सरकार की वादा खिलाफी का बड़ा उदाहरण है.

किसानों का यह भी कहना है कि पूववर्ती सरकार ने किसानों को बिजली में सबसीडी देने की योजना शुरू की थी जो किसानों के बिजली के बिल में ही समायोजित की जाती थी, लेकिन इस सरकार ने बैंक खातों में सबसिडी डालने का काम शुरू किया है जो किसानों को आपस में लड़वाने का काम कर रही है. किसानों का कहना है कि एक परीवार में चार लोग हैं. ऐसे में सबसीडी के पैसे को लेकर झगड़ा फसाद होता है. लिहाजा सबसिडी को पूर्व की भांती बिलों में ही समायोजित किया जाये, जिससे किसानों के परीवारों में होने वाले झगड़ो से निजात मिल सके.

किसानों का यह भी कहना है कि बिजली के मिटर खराब होने पर शिकायत करने और डिमांड नोटिस का पैसा जमा करवाने के बावजुद भी उन्हें समय से बदला नहीं जाता. वहीं ट्रांसफर्मर जलने पर 72 घंटे में सरकार ने बजलने का निर्देष दिया हुआ है, लेकिन वह काम भी दौसा का बिजली महकमा नहीं कर रहा है. 

किसानों का कहना है कि 20 दिन में भी ट्रांसफर्मर नहीं बदले जा रहे और जब बदला जाता है तो किसानों को ही ट्रांसफर्मर अपने स्तर पर लेकर जाना पड़ता है जबकी यह काम बिजली विभाग के ठेकेदार का होता है. ऐसे में सरकार द्वारा किसानों को दी जा रही सुविधा का विभागीय अधिकारी ठेकेदार से मिलकर भ्रष्टाचार कर रहे हैं.