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उदयपुर में सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बने विदेशी पक्षी

उदयपुर में करीब एक दर्जन से भी अधिक ऐसे कई तालाब है जहां इन दिनों पक्षियों ने अपना डेरा डाल रखा है

उदयपुर में सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बने विदेशी पक्षी
पक्षी प्रेमियों के लिए यह पूरा सीजन बेहद खास रहता है

अविनाश जगनावत/उदयपुर: लेकसिटी कही जाने वाली उदयपुर की कुदरती फिंजा इन दिनों देशी-विदेशी पक्षियों की चहचहाट से गुंज रही है. जिले के अधिकांश जलाशयों में दूनिया के कोने कोने से आए पक्षियों ने अपना डेरा डाल रखा है. जो स्थानीए लोगों के साथ उदयपुर भ्रमण पर आ रहे सैलानियों के भी अपनी ओर आकर्षित कर रहे है. जलाशों में पानी की कम मात्रा होने के बावजुद भी इस बार पक्षियों की बंपर आवक हुई है. जिसने शहर की खुबसुरती को चार चांद लगा दिये है.

अरावली पहाड़ी के बीच बसा नीली झीलों का शहर, राजस्थान का कश्मीर और पूर्व का वेनिस जैसे अनेकों नामों से दूनिया में विख्यात उदयपुर शहर देशी विदेशी सैलानियों की ही पहली पसंद नहीं है. बल्कि सर्दी के मौसम में अस्थाई प्रवास पर आने वाले देश दुनिया के पक्षियों के भी पहली पसंद बनता जा रहा है. झीलों को स्वच्छ पानी और यहा का मौसम इन पक्षियों को खुब रास आता है. यही कारण है कि हर साल सीमा के पास से सर्द मौसमे हजारों की संख्या में प्रवासीय प्रक्षी यहां आते है.

शहर की फतह सागर, पिछोल झील हो याप निकटवर्ती मेनार तालाब, भटेवरिया तालाब और डूंगला तालाब सहित करीब एक दर्जन से भी अधिक ऐसे कई तालाब है जहां इन दिनों पक्षियों ने अपना डेरा डाल रखा है. शहर की झीलों में आए पक्षियों में मुख्य रूप से युरोप, चायना, मंगोलिया, साइबेरिया, और सेन्ट्रल ऐशिया के अन्य देशों से आए है. जिसमें फ्लैमिंगों, रोजी पेलिका, डाल मैशियन जैसी कई बड़ी बर्ड शामिल है. 

उदयपुर शहर और आस पास के झीलों में बड़ी तादात में पक्षियों को देख प्रकृति और पक्षि प्रेमी भी काफी खुश नजर आ रह है. पक्षी प्रेमियों के लिए यह पूरा सीजन बेहद खास रहता है. जब उन्हे पक्षियों को देखने के लिए जंगलों को खाक नहीं छाननी पड़ती है और महज तालाब के किनारे बैठ कर ही वे देश विदेश से आए कई प्रजातियों के पक्षियों को देख सकते है. 

पक्षी प्रेमियों की माने तो हर साल यहा करीब तीन सौ प्रजाती के पक्षी आते है जिनमें करीब डेढ सौ प्रजातियों के पक्षि ऐसे है जो विदेशों से हजारों किलो मीटर का सफर तय कर यहा आते है. हांलाकि शहर की प्रमुख झीलों में मानवीय गतिविधियों के बढने से यहां आने वाले पक्षियों की संख्या में पिछले कुछ सालो में कमी आई है लेकिन अन्य जलाशयों में आने वाले पक्षियों की तादात लगातार बढ़ रही है.

देश विदेश से आने वाले पक्षियों को लेकर वन विभाग भी पुरी तरह से अलर्ट रहता है. विभाग के अधिकारियों ने पहल कर जलाशयों के आस पास रहने वाले ग्रामिणों को पक्षियों के संरक्षण के लिए जागरूर किया और उन्हे विशेष प्रशिक्षण भी दिया. यही कारण है कि आज जलाशयों पर बर्ड वॉच के लिए जाने वाले सैलानियों को गाइड कर पा रहे है. साथ ही वे पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूर हुए है. यही नहीं विभाग की ओर से प्रदेशव्यापी अभियान के तहत उदयपुर में भी पक्षियों की गणना का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है. 

दुनिया के कई देशों से आने वाले पक्षियों के प्रति जागरूकता बढाने और देश विदेश से आने वाले सैलानियों को इस ओर आकर्षित करने के लिए वन विभाग की ओर से बर्ड फैयर का भी आयोजन किया जा रहा है. तीन दिन तक आयोजित होन वाले इस फैयर में बर्ड वॉचिंग के साथ कई कार्यक्रमों को आयोजन होगा.