कोटा के किसान ओम प्रकाश ने जहर में ढूंढी संजीवनी, पूरे देश के लिए बने मिसाल

ओम प्रकाश की पर्यावरण को लेकर ये दीवानगी ही है कि एक पेड़ की क़ीमत न केवल समझते हैं बल्कि उसे लोगों को समझाते भी हैं.

कोटा के किसान ओम प्रकाश ने जहर में ढूंढी संजीवनी, पूरे देश के लिए बने मिसाल
किसान ने बिना किसी स्वार्थ के प्रकृति को बचाने का बीड़ा उठाया है.

कोटा: एक तरफ़ हम दिन-रात सिंगल यूज प्लास्टिक (Single Use Plastic) का उपयोग कर प्रकृति को ज़हर देने का काम करते हैं तो कोटा का एक किसान ऐसा भी है, जिसने इसी जहर से संजीवनी देने की ख़ास मुहिम चलाई है. 

किसान ने बिना किसी स्वार्थ के प्रकृति को बचाने का बीड़ा उठाया है और मुहिम चलाई है एक पॉलिथीन, एक पौधा. हम जिस सिंगल यूज प्लास्टिक को यूजलेस समझ कर सड़क या कचरे में फेंक देते हैं, वो उसे हमसे लेकर देता है एक पौधा.
'एक पॉलिथीन दो और एक पौधा लो' प्रकृति को बचाने के लिए ये ख़ास पहल कोटा के किसान ओम प्रकाश ने शुरू की है. किसान ओम प्रकाश की ये कोशिश प्रकृति को बचाने के लिए ख़ास है. ओम प्रकाश सड़क पर पड़ी पॉलिथीन लेकर लोगों को पौधा देते हैं. 

ओम प्रकाश की पर्यावरण को लेकर ये दीवानगी ही है कि एक पेड़ की क़ीमत न केवल समझते हैं बल्कि उसे लोगों को समझाते भी हैं. बीते पंद्रह साल से ओम प्रकाश इसी तरह लोगों से आह्वान करते हैं कि सिंगल यूज प्लास्टिक को सड़क पर न फेंके. कचरे में न डालें, उसे मुझे दे और मैं उसके बदले आपको एक पौधा दूंगा. ओम प्रकाश लोगों से जमा हुई इस तरह की पॉलिथीन में ही मिट्टी डालकर पौधा तैयार करते हैं और इस तरह सिंगल यूज प्लास्टिक से पौधे तैयार किए हैं, जिन्हें वो लोगों को देते हैं ताकि उस सिंगल यूज प्लास्टिक का न केवल सद उपयोग हो सके बल्कि उससे होने वाले नुक़सान को रोक फ़ायदे में बदला जा सके.

निश्चित ही ओम प्रकाश की ये पहल ख़ास ओर संदेश देने वाली है. न केवल सिंगल यूज प्लास्टिक से पर्यावरण को होने वाले नुक़सान को इससे कम किया जा सकता है बल्कि उसके उपयोग के साथ पौधे लगाने के लिए भी लोगों को प्रेरित किया जा रहा है.